शादी के 5 साल बाद पत्नी ने पति से कहा- “आज मेरे साथ मत आना”, लेकिन पति ने दूर से पीछा किया तो एक बंद पड़े स्कूल में पहुंची महिला, अंदर मिला ऐसा राज जिसने सबको चौंका दिया


 इंदौर में रहने वाले 35 वर्षीय मोहित की शादी को पांच साल हो चुके थे। उसकी पत्नी आरती एक निजी स्कूल में काम करती थी। पिछले कुछ दिनों से आरती के व्यवहार में बदलाव आया था। वह अक्सर शाम को अकेले कहीं चली जाती और लौटने के बाद पूछने पर सिर्फ इतना कहती कि स्कूल का जरूरी काम था।

एक शाम आरती ने घर से निकलते समय मोहित से साफ कहा, “आज मेरे साथ मत आना, मुझे एक जरूरी काम है।”

मोहित को उसकी बात अजीब लगी।

आरती के जाने के करीब दस मिनट बाद मोहित भी अपनी बाइक लेकर उसके पीछे निकल पड़ा। आरती मुख्य सड़क छोड़कर शहर के पुराने हिस्से में पहुंची और एक बंद पड़े स्कूल के सामने रुक गई।

मोहित ने दूर से देखा कि आरती ने स्कूल का पुराना दरवाजा खोला और अंदर चली गई।

करीब बीस मिनट तक वह बाहर इंतजार करता रहा।

फिर अंदर से हल्की आवाजें सुनाई दीं।

मोहित ने खिड़की से अंदर झांका तो वहां आरती के साथ करीब 60 वर्षीय एक बुजुर्ग व्यक्ति बैठा था। दोनों के सामने पुराने कागजात और कई तस्वीरें रखी थीं।

मोहित को लगा कि आरती उससे कोई बड़ी बात छिपा रही है।

वह अंदर चला गया और सीधे सवाल किया, “तुम यहां क्या कर रही हो?”

आरती कुछ देर चुप रही।

बुजुर्ग व्यक्ति ने एक पुरानी तस्वीर मोहित के सामने रख दी।

तस्वीर देखकर मोहित के चेहरे का रंग बदल गया।

तस्वीर में उसके पिता उस पुराने स्कूल के बाहर खड़े दिखाई दे रहे थे। तस्वीर करीब 20 साल पुरानी थी।

बुजुर्ग व्यक्ति ने बताया कि वह इसी स्कूल में शिक्षक था। करीब 20 साल पहले स्कूल बंद होने से पहले मोहित के पिता ने वहां पढ़ने वाले कई गरीब बच्चों के लिए एक छोटी छात्रवृत्ति शुरू की थी।

लेकिन उनके निधन के बाद वह व्यवस्था बंद हो गई।

आरती को कुछ महीने पहले पुराने दस्तावेजों से इसकी जानकारी मिली थी। उसने स्कूल के पुराने रिकॉर्ड तलाशने शुरू किए और पता लगाया कि छात्रवृत्ति के लिए रखी गई रकम का एक हिस्सा आज भी एक पुराने खाते में मौजूद था।

आरती उसी रकम से उन बच्चों के परिवारों की मदद करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन वह मोहित को इसलिए नहीं बताना चाहती थी क्योंकि पहले सारे दस्तावेज और रिकॉर्ड की पुष्टि करना चाहती थी।

मोहित ने फाइल के अंदर देखा तो उसे अपने पिता की लिखावट में एक पुराना नोट मिला।

उसमें लिखा था—

“अगर मैं कभी यह काम पूरा न कर पाऊं, तो इसे कोई ऐसा व्यक्ति पूरा करे जिसे बच्चों की चिंता हो।”

आरती ने वह नोट पढ़कर ही यह काम शुरू किया था।

मोहित को समझ आया कि जिस बात को वह पत्नी का कोई छिपा हुआ रिश्ता समझ रहा था, उसके पीछे उसके अपने पिता की वर्षों पुरानी अधूरी जिम्मेदारी थी।

कुछ दिनों बाद पुराने रिकॉर्ड की जांच के बाद उन बच्चों के परिवारों तक मदद पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू की गई।

मोहित ने आरती से सिर्फ इतना कहा—

“तुमने मुझसे राज जरूर छिपाया, लेकिन आज पता चला कि वह राज किसी इंसान से नहीं, मेरे पिता के अधूरे वादे से जुड़ा था।”

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