37 वर्षीय विवेक अपनी पत्नी काजल के साथ रहता था। दोनों की शादी को 12 साल हो चुके थे। घर-परिवार ठीक चल रहा था, लेकिन पिछले कुछ महीनों से काजल का व्यवहार बदल गया था। वह अक्सर रात में फोन लेकर बालकनी में चली जाती और कई बार सुबह जल्दी घर से निकल जाती।
विवेक ने कई बार पूछा, लेकिन काजल हर बार कहती कि वह अपनी सहेली से मिलने जा रही है।
एक सुबह करीब 5 बजे विवेक की आंख खुली तो काजल घर में नहीं थी। उसने फोन किया तो फोन बंद मिला।
घबराकर वह बाहर निकला। कुछ देर बाद उसे काजल शहर के पुराने रेलवे स्टेशन के पास दिखाई दी। उसके हाथ में एक छोटा बैग था और वह अकेली बेंच पर बैठी किसी का इंतजार कर रही थी।
विवेक दूर से उसे देखता रहा।
कुछ देर बाद एक ट्रेन आई, लेकिन काजल उसमें नहीं चढ़ी।
वह अचानक उठी और वापस घर की तरफ चली गई।
विवेक भी पीछे-पीछे घर लौट आया।
घर पहुंचकर उसने पहली बार काजल की अलमारी खोलने का फैसला किया। कपड़ों के नीचे एक पुराना लकड़ी का डिब्बा रखा था। उसमें कुछ तस्वीरें, एक पुराना पहचान पत्र और एक अस्पताल की रसीद थी।
रसीद देखकर विवेक के पैरों तले जमीन खिसक गई।
वह अस्पताल उसी शहर का था, लेकिन तारीख उनकी शादी से दो साल पहले की थी।
डिब्बे में एक और तस्वीर थी। तस्वीर में काजल एक नवजात बच्चे को गोद में लिए खड़ी थी।
विवेक को समझ नहीं आया कि यह बच्चा कौन था।
तभी काजल घर लौट आई।
विवेक ने तस्वीर उसके सामने रख दी।
काजल काफी देर तक चुप रही। फिर उसने बताया कि शादी से पहले उसकी एक करीबी रिश्तेदार की बेटी की हालत बेहद खराब थी। बच्चे के जन्म के बाद उसकी मां की मौत हो गई थी। परिवार की परिस्थितियों के कारण बच्चे को दूसरे शहर भेज दिया गया था।
लेकिन काजल पिछले कई सालों से उस बच्चे की खबर गुप्त रूप से रख रही थी।
विवेक ने पूछा कि फिर वह सुबह स्टेशन क्यों गई थी?
काजल ने बताया कि उसे पिछले सप्ताह एक पत्र मिला था। उसमें लिखा था कि वह बच्चा अब बड़ा हो चुका है और अपनी असली कहानी जानना चाहता है। वह उसी से मिलने स्टेशन गई थी।
लेकिन कहानी में असली मोड़ तब आया जब विवेक ने डिब्बे में रखा एक दूसरा कागज देखा।
उसमें लिखा था कि बच्चे की पहचान से जुड़े दस्तावेजों में किसी ने जानबूझकर गलत नाम दर्ज करवाया था।
अब मामला सिर्फ काजल के पुराने राज का नहीं था।
विवेक ने पुलिस से संपर्क किया। जांच में सामने आया कि वर्षों पहले बच्चे की पहचान बदलकर उसे दूसरी जगह भेजने में कई लोगों की भूमिका थी। इसके पीछे संपत्ति और पारिवारिक विवाद जुड़ा हुआ था।
जिस सुबह विवेक को लगा था कि उसकी पत्नी किसी से छिपकर मिलने स्टेशन गई है, वह दरअसल 12 साल पुराने एक ऐसे राज को सुलझाने निकली थी, जिसे उसने शादी के बाद भी किसी को नहीं बताया था।
और सबसे बड़ा सवाल अब यह था कि इतने साल बाद वह बच्चा अचानक अपनी असली पहचान क्यों तलाश रहा था?
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