एक शहर के सबसे अमीर सेठ थे। उनके पास पैसे, बिजनेस, फैक्ट्री सब कुछ था।
एक शाम वो फैक्ट्री से घर लौटे तो घर में सब पूजा कर रहे थे। सेठ जी को पूजा-पाठ में भरोसा नहीं था, वो अपने कमरे में चले गए। अचानक उनके सीने में बेचैनी होने लगी। बड़े-बड़े डॉक्टर आए, सारी जाँच की, रिपोर्ट में सब ठीक निकला, फिर भी बेचैनी कम नहीं हुई।
रात के 3 बजे तक उन्हें नींद नहीं आई। वो घर से बाहर निकल कर टहलने लगे। टहलते-टहलते वो शहर से काफी दूर निकल गए। एक चबूतरे पर बैठ कर अपने पुराने दिनों को याद करने लगे।
तभी एक कुत्ता आया और उनकी एक चप्पल मुँह में दबा कर भाग गया। सेठ उसके पीछे भागे तो कुत्ता एक झुग्गी-बस्ती में घुस गया।
वहाँ उन्होंने एक झोपड़ी से एक महिला के रोने की आवाज सुनी। सुबह के 4 बज रहे थे। पहले तो उन्होंने सोचा आगे बढ़ जाऊँ, फिर मन में आया कि देख तो लूँ बात क्या है।
दरवाजा खटखटाया तो महिला ने बताया - मेरी 7 साल की बेटी बहुत बीमार है, ऑपरेशन के लिए पैसे नहीं हैं। कल एक बाबा जी निकले थे, उन्होंने कहा था बेटा कल सुबह 4 बजे रोना और ऊपर वाले को याद करना, चमत्कार होगा। इसलिए मैं रो रही हूँ।
ये सुनते ही सेठ जी का दिल पिघल गया। उन्होंने तुरंत एम्बुलेंस बुलाई, डॉक्टर को फोन किया, बच्ची के ऑपरेशन का सारा खर्च खुद दिया और उस महिला को अपनी फैक्ट्री में नौकरी और रहने के लिए जगह भी दी।
और तभी उनकी अपनी बेचैनी भी खत्म हो गई।
तब उन्हें समझ आया कि ऊपर वाला है। उसने न मेरी जात पूछी, न उस महिला ने मेरी जात पूछी। उसने बस मुझे जरिया बना कर वहाँ भेज दिया।
इस कहानी की सीख:
1. अगर आप भरोसा रखेंगे तो चमत्कार जरूर होगा।
2. जिंदगी में एक दूसरे की मदद करते चलेंगे, तो आपकी मदद अपने आप ऊपर वाला करेगा।
3. दुनिया में ऊपर वाले ने सिर्फ एक ही धर्म बनाया है, जिसे मानवता कहते हैं, इंसानियत कहते हैं।
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