पंजाब के लुधियाना शहर में 32 वर्षीय दीपेश अपनी पत्नी राधिका के साथ रहता था। दोनों की शादी को करीब तीन साल हो चुके थे। दीपेश एक ऑटो पार्ट्स की दुकान चलाता था, जबकि राधिका घर से ही सिलाई का काम करती थी। दोनों की जिंदगी सामान्य चल रही थी, लेकिन पिछले कुछ महीनों से दीपेश को अपनी पत्नी के व्यवहार में कुछ अजीब बदलाव नजर आने लगे थे।
राधिका फोन हमेशा अपने पास रखती। पहले वह फोन कहीं भी रख देती थी, लेकिन अब बाथरूम तक जाते समय भी उसे साथ ले जाती। रात को अचानक मैसेज आने पर वह दूसरे कमरे में चली जाती। दीपेश ने कई बार पूछा, लेकिन राधिका हर बार कहती कि सिलाई का काम करने वाली महिलाओं के मैसेज होते हैं।
एक दिन दीपेश दुकान से जल्दी घर लौट आया। उसने देखा कि राधिका बालकनी में खड़ी होकर किसी से फोन पर बात कर रही थी। उसे देखते ही उसने कॉल काट दी।
दीपेश ने पूछा, “किससे बात कर रही थी?”
राधिका ने कहा, “किसी ग्राहक से।”
दीपेश ने कोई बहस नहीं की, लेकिन अब उसने ध्यान देना शुरू कर दिया।
कुछ दिनों बाद राधिका का फोन सोफे पर पड़ा था। उसी समय एक मैसेज आया। स्क्रीन पर नाम सेव नहीं था, सिर्फ एक नंबर दिखाई दे रहा था। मैसेज था—“अब पुरानी बात छिपाने से कुछ नहीं होगा।”
दीपेश ने राधिका से पूछा तो उसने तुरंत फोन अपने हाथ में ले लिया।
“गलत नंबर है,” उसने कहा।
लेकिन दीपेश को भरोसा नहीं हुआ।
उसने नंबर अपने फोन में सेव कर लिया।
रात को जब राधिका सो गई तो दीपेश ने उस नंबर पर कॉल किया। दूसरी तरफ कुछ सेकंड तक कोई आवाज नहीं आई। फिर एक आदमी ने धीमे स्वर में कहा, “आपको अभी सच नहीं जानना चाहिए।”
कॉल कट गया।
दीपेश पूरी रात सो नहीं पाया।
अगले दिन उसने दोबारा नंबर मिलाया, लेकिन फोन बंद था।
अब उसे लगा कि शायद उसकी पत्नी का कोई पुराना प्रेम संबंध वापस सामने आ गया है। उसने राधिका से साफ पूछा कि क्या शादी से पहले उसकी जिंदगी में कोई और था।
राधिका कुछ देर चुप रही और फिर बोली कि कॉलेज के समय उसका एक दोस्त था, लेकिन शादी के बाद उससे कोई संपर्क नहीं रहा।
दीपेश ने उस दोस्त का नाम पूछा।
राधिका ने कहा—“सुमित।”
वही नाम अगले दिन उसे एक पुराने कागज पर भी मिला।
दीपेश ने सुमित के बारे में जानकारी जुटाई। पता चला कि वह करीब चार साल पहले लुधियाना छोड़कर चंडीगढ़ चला गया था। लेकिन पिछले दो महीनों में उसका नंबर कई बार राधिका के फोन पर आया था।
दीपेश ने जब राधिका से दोबारा पूछा तो वह रोने लगी।
उसने बताया कि सुमित अचानक उसके संपर्क में आया था। उसने कहा था कि उसके पास राधिका के परिवार से जुड़ी कुछ पुरानी जानकारी है, जिसे वह सार्वजनिक कर सकता है।
दीपेश ने पूछा, “ऐसी कौन-सी जानकारी?”
राधिका ने जवाब नहीं दिया।
यही बात दीपेश को सबसे ज्यादा परेशान कर रही थी।
उस रात उसने राधिका के पुराने सामान की तलाश की। एक पुराने बैग में उसे एक छोटी डायरी मिली। डायरी में तीन साल पुरानी तारीख के नीचे एक नाम और कुछ रकम लिखी हुई थी।
सुमित का नाम भी उसी पन्ने पर था।
दीपेश ने अगले दिन सुमित को ढूंढने की कोशिश की। इसी दौरान उसके पास फिर उसी नंबर से फोन आया।
इस बार आवाज साफ थी।
“अगर राधिका ने आपको सब कुछ नहीं बताया तो उसके पिता की पुरानी फाइल देखिए।”
कॉल कट गया।
दीपेश को लगा कि मामला अब गंभीर है।
उसने राधिका के पिता की पुरानी फाइल खोजी। उसमें जमीन और बैंक लेन-देन से जुड़े कुछ दस्तावेज थे। एक कागज देखकर दीपेश चौंक गया। उस पर एक बड़ी रकम का हिसाब था और नीचे एक गवाह के तौर पर सुमित का नाम लिखा था।
दीपेश ने राधिका से फिर सवाल किया।
आखिरकार उसने बताया कि शादी से पहले उसके पिता ने एक जमीन का सौदा किया था। सौदे में कुछ रकम एक बिचौलिए के जरिए दी गई थी, लेकिन बाद में पता चला कि कागजों में गड़बड़ी थी। सुमित उस समय राधिका के पिता के परिचित के यहां काम करता था और उसे पूरे मामले की जानकारी थी।
राधिका ने शादी के बाद यह बात इसलिए छिपाई क्योंकि उसे डर था कि परिवार में बड़ा विवाद हो जाएगा।
लेकिन सुमित के पास पुराने दस्तावेजों की कॉपी थी।
अब वह उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर राधिका के परिवार से पैसे मांग रहा था।
दीपेश ने पुलिस को पूरी जानकारी देने का फैसला किया।
पुलिस ने सुमित के नंबर की जांच की तो पता चला कि पिछले कुछ महीनों में वह अलग-अलग नंबरों से राधिका को संपर्क कर रहा था। उसके खिलाफ पहले भी धमकी देने की शिकायत दर्ज हो चुकी थी।
लेकिन जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ।
राधिका के पिता के पुराने जमीन सौदे में जिस बिचौलिए का नाम था, वह अब शहर में नहीं रहता था। पुलिस ने उसके पुराने रिकॉर्ड खंगाले तो पता चला कि वह कई परिवारों से इसी तरह पैसे ऐंठ चुका था।
सुमित उसके साथ पहले काम कर चुका था।
पुलिस ने सुमित को पूछताछ के लिए बुलाया। उसने स्वीकार किया कि उसने राधिका को पुराने दस्तावेजों के नाम पर डराया था और पैसे मांग रहा था। लेकिन उसने यह भी बताया कि जमीन के कागजों में असली गड़बड़ी किसी और ने की थी।
जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को पुराने बैंक रिकॉर्ड और रजिस्ट्री दस्तावेज मिले। मामला अब वर्षों पुराने जमीन विवाद तक पहुंच चुका था।
दीपेश के लिए सबसे बड़ा झटका यह था कि जिस नंबर और नाम को देखकर उसने पत्नी के पुराने प्रेम संबंध का शक किया था, उसके पीछे असल में ब्लैकमेलिंग और संपत्ति विवाद की कहानी थी।
राधिका ने माना कि उसने पति से सच छिपाकर गलती की। दीपेश ने भी स्वीकार किया कि उसे शुरुआत में ही पत्नी की बात सुननी चाहिए थी।
पुराना नंबर, एक रहस्यमय फोन कॉल और तीन साल पुरानी डायरी ने आखिरकार उस राज को सामने ला दिया जिसे राधिका लंबे समय से अपने परिवार से छिपाती आ रही थी।
मामले की जांच जारी रही और पुलिस ने पुराने जमीन सौदे से जुड़े दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए।
दीपेश के लिए उस दिन एक बात बिल्कुल साफ हो गई—फोन में छिपा कोई नाम हमेशा प्रेम कहानी का सबूत नहीं होता, कभी-कभी उसके पीछे सालों पुराना ऐसा राज होता है जो पूरे परिवार को हिला सकता है।
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