23 किलोमीटर की राइड… मंजिल सिर्फ 40 मीटर दूर… और तभी गाड़ी ने कहा—‘भाई, अब मुझसे न हो पाएगा!’
कहानी है एक मैडम की, जिन्होंने मानेश्वर से सेक्टर 64 के लिए करीब 23 किलोमीटर की राइड बुक की।
राइडर भी समय पर पहुंचा और मैडम को लेकर निकल पड़ा।
करीब 23 किलोमीटर का सफर पूरा हुआ।
अब मंजिल सामने थी।
बस ड्रॉप लोकेशन से लगभग 40 मीटर पहले पहुंचते ही गाड़ी ने अचानक झटके लेने शुरू कर दिए।
राइडर ने समझ लिया कि मामला गंभीर है।
फ्यूल इंडिकेटर पहले ही लाल हो चुका था और अब इंजन भी बोल रहा था—
“भाई, आखिरी सांस चल रही है!”
कुछ ही सेकंड बाद गाड़ी बंद।
राइडर ने मैडम से कहा,
“मैडम, बस 40 मीटर आगे आपकी लोकेशन है। गाड़ी का पेट्रोल खत्म हो गया है। आप थोड़ा सा पैदल चली जाएंगी तो मैं गाड़ी को धक्का देकर पेट्रोल पंप तक ले जाऊंगा।”
लेकिन मैडम का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच चुका था।
बोलीं,
“मुझे इससे कोई मतलब नहीं! जब राइड ली थी तभी पेट्रोल चेक करना चाहिए था। मुझे मेरी ड्रॉप लोकेशन तक छोड़ो, वरना 1 स्टार दूंगी और ऐप पर शिकायत भी करूंगी!”
राइडर ने फिर समझाने की कोशिश की,
“मैडम, मेरी बात समझिए। अगर गाड़ी यहां से स्टार्ट होकर आपकी लोकेशन के मोड़ पर बंद हो गई तो सड़क पर और परेशानी होगी। बस 40 मीटर ही तो है।”
मैडम ने तुरंत जवाब दिया,
“मैं हाई हील्स पहनकर आई हूं। मैं एक कदम भी पैदल नहीं चलने वाली!”
राइडर ने ज्यादा बहस करना ठीक नहीं समझा।
उसने गाड़ी स्टार्ट करने की कोशिश की।
घुर्र… घुर्र…
और फिर…
शांत!
गाड़ी ने भी साफ कर दिया कि अब बहस का कोई फायदा नहीं।
पेट्रोल पूरी तरह खत्म हो चुका था।
मैडम का गुस्सा अभी भी कायम था।
राइडर ने चुपचाप फोन निकाला और किराये में 50 रुपये कम कर दिए।
फिर बोला,
“मैडम, मेरी गलती है कि मैंने फ्यूल पहले ठीक से नहीं देखा। गाड़ी सच में बंद हो गई है। आपकी परेशानी के लिए माफी चाहता हूं और किराये में 50 रुपये कम कर रहा हूं।”
अब मैडम ने राइडर की बात सुनी।
शायद उन्हें लगा कि सामने वाला बहस करने के बजाय अपनी गलती मान रहा है।
उन्होंने किराया कम होने के बावजूद पूरा पैसा राइडर को दे दिया।
बैग उठाया और बोलीं,
“ठीक है… लेकिन अगली बार पेट्रोल चेक कर लेना!”
और फिर हाई हील्स में मजबूरी से वही 40 मीटर पैदल चल पड़ीं।
उधर राइडर ने भी राहत की सांस ली।
गाड़ी को स्टार्ट करने की आखिरी उम्मीद छोड़कर उसने हैंडल पकड़ा और धक्का लगाते हुए पेट्रोल पंप की तरफ चल पड़ा।
अब सवाल यह है कि गलती आखिर किसकी थी?
राइडर की—क्योंकि इतनी लंबी राइड शुरू करने से पहले पेट्रोल पर्याप्त होना चाहिए था?
या मैडम की—क्योंकि 23 किलोमीटर का सफर पूरा होने के बाद सिर्फ 40 मीटर की दूरी के लिए इतनी बहस करना जरूरी था?
आप बताइए—अगर आपके साथ ऐसा होता तो आप क्या करते? 40 मीटर पैदल चले जाते या राइडर से ड्रॉप तक पहुंचाने की मांग करते?
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