इंस्टाग्राम पर दोस्ती, फिर सुनसान मकान में बुलाकर युवक को फंसाने का आरोप… 1 लाख की डिमांड और अचानक पहुंच गए दो पुलिसकर्मी

 


इंस्टाग्राम पर हुई दोस्ती के बाद मिलने पहुंचे युवक को कथित तौर पर ब्लैकमेल करने का मामला सामने आया तो कहानी में ऐसा मोड़ आया कि दो पुलिस आरक्षकों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई। मामला मध्य प्रदेश के जबलपुर का है, जहां एक युवती और उसके दो साथियों पर युवक को फंसाकर पैसे मांगने का आरोप लगा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बेलखेड़ा निवासी दो चचेरे भाइयों की कुछ दिन पहले इंस्टाग्राम के जरिए रागिनी शर्मा नाम की युवती से दोस्ती हुई थी। बातचीत के बाद युवती ने दोनों को मिलने के लिए बुलाया। बताया गया कि मुलाकात के दौरान युवती ने उनसे 500 रुपये भी लिए और इसके बाद उन्हें शताब्दीपुरम स्थित एक ईडब्ल्यूएस क्वार्टर में बने सूने मकान में ले गई।

रिपोर्ट्स के अनुसार, कमरे में पहुंचने के बाद युवती ने युवकों पर छेड़छाड़ और बदसलूकी के आरोप लगाने शुरू कर दिए। इसके बाद उसके दो कथित साथियों—साहिल बर्मन और विवेक तिवारी—के वहां पहुंचने की बात सामने आई। आरोप है कि दोनों ने युवकों के साथ मारपीट की और पुलिस में शिकायत करने की धमकी दी।

इसके बाद कथित तौर पर मामला रफा-दफा करने के लिए एक लाख रुपये की मांग की गई। युवक द्वारा पैसे देने से इनकार करने पर पुलिस को फोन करने की बात कही गई। कुछ ही देर में यादव कॉलोनी चौकी में तैनात आरक्षक सचिन जैन और सिद्धार्थ मौके पर पहुंच गए।

युवकों का आरोप था कि पुलिसकर्मियों ने भी उन्हें कार्रवाई और जेल जाने का डर दिखाया तथा मामला आपसी समझौते से खत्म करने की बात कही। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी बाद में युवक के परिजनों ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दे दी।

मामला जब जबलपुर के एसपी संपत उपाध्याय तक पहुंचा तो उन्होंने कोतवाली सीएसपी रितेश कुमार शिव को जांच के निर्देश दिए। प्राथमिक जांच में पुलिसकर्मियों के मौके पर पहुंचने और वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना नहीं देने समेत कुछ बिंदुओं पर सवाल उठे। इसके बाद सचिन जैन और सिद्धार्थ को लाइन अटैच कर उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए।

वहीं पुलिस ने रागिनी शर्मा और उसके दो कथित साथियों के खिलाफ मामला दर्ज कर तीनों को गिरफ्तार किया। रिपोर्टों के मुताबिक उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। पुलिस ने मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या इस तरह की घटना में पहले भी किसी अन्य व्यक्ति को निशाना बनाया गया था।

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर किसी व्यक्ति को झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर पैसे वसूलने की कोशिश की गई थी, तो उसमें और कौन-कौन लोग शामिल थे। साथ ही, मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों की भूमिका को लेकर भी विभागीय जांच के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे कथित हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग का मामला कहना ज्यादा उचित है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

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