मुसीबत के समय इंसान अक्सर अपनी जमा-पूंजी का सहारा लेता है। किसी के पास बचत होती है तो कोई जरूरत पड़ने पर अपने गहने गिरवी रखकर पैसे जुटाने की कोशिश करता है। लेकिन अगर जिस गहने को सालों से असली सोना समझकर संभालकर रखा गया हो, उसकी कीमत जांच के बाद शून्य निकल आए तो स्थिति कितनी चौंकाने वाली होगी, इसका अंदाजा इसी घटना से लगाया जा सकता है।
बताया जा रहा है कि एक व्यक्ति आर्थिक परेशानी के बीच अपनी पत्नी के टीका और पेंडल को गिरवी रखकर कुछ पैसे जुटाने के इरादे से ज्वेलरी की दुकान पर पहुंचा। उसे पूरा भरोसा था कि गहने सोने के हैं और उन पर लगी 18 कैरेट हॉलमार्क की मुहर भी इसकी पुष्टि करती है।
लेकिन दुकान पर गहनों की जांच शुरू होते ही पूरा मामला ही बदल गया।
गहनों पर लगी थी 18 कैरेट की मुहर
मिली जानकारी के अनुसार, व्यक्ति उझानी से खरीदा हुआ टीका और पेंडल लेकर ज्वेलरी की दुकान पर पहुंचा था। उसने दुकानदार को बताया कि दोनों गहनों पर 18 कैरेट हॉलमार्क की मोहर लगी हुई है।
गहनों को पहली नजर में देखने पर वे सोने के ही दिखाई दे रहे थे। उनकी बनावट भी ऐसी थी कि सामान्य तौर पर देखकर किसी को आसानी से संदेह नहीं होता। ऊपर से गहनों पर लगी हॉलमार्क की मुहर ने व्यक्ति का भरोसा और मजबूत कर दिया था।
उसे उम्मीद थी कि दुकानदार गहनों की कीमत के आधार पर उसे जरूरत के पैसे दे देगा।
लेकिन दुकानदार ने बिना जांच किए गहनों को गिरवी रखने से इनकार कर दिया और पहले उनकी गुणवत्ता जांचने का फैसला किया।
जांच शुरू हुई तो सामने आया हैरान करने वाला सच
दुकानदार ने जब गहनों की जांच कराई तो परिणाम देखकर वह खुद भी हैरान रह गया।
जांच में सामने आया कि गहनों पर भले ही 18 कैरेट की मुहर लगी हुई थी, लेकिन जांच के मुताबिक उनके अंदर सोना मौजूद नहीं था। दोनों गहनों की Gold Value Zero बताई गई।
यानी जिस गहने को देखकर व्यक्ति यह मानकर आया था कि वह 18 कैरेट सोना है, जांच के दौरान उसकी सोने की कीमत शून्य बताई गई।
यह परिणाम सामने आने के बाद व्यक्ति के लिए सबसे बड़ा झटका यही था कि जिस चीज को वह असली सोना समझकर अपनी पत्नी के पास सुरक्षित रखे हुए था, जरूरत पड़ने पर वही गहना पैसे जुटाने के काम नहीं आया।
हॉलमार्क देखकर ही भरोसा करना पड़ सकता है भारी
दुकानदार ने व्यक्ति को समझाया कि सिर्फ किसी गहने पर हॉलमार्क की मुहर देखकर उसे असली सोना मान लेना सही नहीं है। गहना खरीदते समय उसकी विश्वसनीयता और दस्तावेजों की भी जांच करना जरूरी है।
इस घटना ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया कि अगर किसी गहने पर सोने की शुद्धता दर्शाने वाली मुहर लगी हो, लेकिन जांच में उसमें सोना ही न मिले, तो ग्राहक के लिए कितना बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है।
खासकर ऐसे समय में जब कोई व्यक्ति अपनी जरूरत पूरी करने के लिए गहने गिरवी रखने पहुंचता है, तब उसे उम्मीद होती है कि उसकी जमा पूंजी मुश्किल वक्त में काम आएगी। लेकिन यहां तो जांच के बाद उसकी उम्मीद ही टूट गई।
सिर पकड़कर बैठ गया आदमी
जांच का नतीजा सामने आने के बाद वह व्यक्ति भी परेशान हो गया। जिस गहने को लेकर वह आर्थिक मदद मिलने की उम्मीद से दुकान पर आया था, उसकी कथित तौर पर कोई Gold Value नहीं निकली।
दुकानदार की बात सुनने के बाद वह अपना सिर पकड़कर बैठ गया। उसके सामने एक तरफ आर्थिक परेशानी थी और दूसरी तरफ पत्नी के गहनों को लेकर हुआ यह बड़ा झटका।
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सबक यही है कि सोने के गहने खरीदते समय केवल दिखावट या किसी मुहर पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। खरीदारी के समय अधिकृत विक्रेता से गहना लेना, उचित बिल और जरूरी दस्तावेज संभालकर रखना तथा शुद्धता से संबंधित विवरण की पुष्टि करना बेहद जरूरी है।
जरूरी सावधानी
यह विवरण उपलब्ध कराई गई घटना के आधार पर है। किसी खास दुकान, विक्रेता या व्यक्ति पर धोखाधड़ी का आरोप साबित मानकर निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। यदि किसी ग्राहक को अपने गहने की शुद्धता पर संदेह है, तो उसे मान्यता प्राप्त परीक्षण केंद्र या विश्वसनीय ज्वेलर से स्वतंत्र जांच करानी चाहिए।
Post a Comment