वैदिक पंचांगीय गणनाओं के अनुसार, 18 सितंबर 2026 को ग्रहों के सेनापति, अग्नि तत्व और अदम्य आक्रामकता के कारक मंगल देव अपनी नीच राशि 'कर्क' में प्रवेश करने जा रहे हैं।
जब मंगल नीच अवस्था में आते हैं, तो जातक के भीतर धैर्य और विवेक समाप्त हो जाता है। व्यक्ति तार्किक सोच छोड़कर अत्यधिक भावनात्मक प्रतिक्रिया देने लगता है और यही आवेग कार्यक्षेत्र और वित्तीय मामलों में आत्मघाती साबित होता है।
इस गोचर का सबसे तीव्र और संहारक प्रभाव 3 विशेष राशियों (मेष, वृश्चिक और मकर) पर पड़ने जा रहा है। इन राशि वालों के लिए 18 सितंबर के बाद के 72 घंटे अत्यधिक तनावपूर्ण रहेंगे, जहां जरा सी लापरवाही भारी वित्तीय नुकसान, व्यापारिक अनुबंध टूटने और कानूनी पचड़ों का कारण बन सकती है।
परंतु, इस पूरे गोचर में वो 1 कौन सी गलती है जो पूरी तिजोरी खाली कर सकती है? वह सबसे बड़ी गलती है—भावुकता या गुस्से में आकर लिया गया वित्तीय जोखिम और अपनों से कड़वे बोल। इस दौरान शेयर बाजार में 'घाटा रिकवर' करने की हड़बड़ी या किसी परिचित के दबाव में आकर बिना कागजात के दिया गया बड़ा उधार संचित पूंजी को एक झटके में शून्य कर सकता है।
आइए विस्तार से जानते हैं कि 18 सितंबर के मंगल गोचर से किन 3 राशियों को सबसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है:
18 सितंबर मंगल गोचर: इन 3 राशियों के लिए 72 घंटे का महा-अलर्ट
1. मेष राशि — चतुर्थ भाव में नीच मंगल, सुख भाव पर प्रहार और प्रॉपर्टी सौदों में धोखा
मेष राशि के स्वामी स्वयं मंगल देव हैं और उनका अपनी नीच राशि के चतुर्थ भाव में जाना आपके मानसिक और पारिवारिक सुख को सीधे प्रभावित करेगा।
वित्तीय व करियर का बड़ा खतरा: यदि आप जमीन-जायदाद, मकान, फ्लैट या वाहन की खरीद-बिक्री में लगे हैं, तो 18 सितंबर के आसपास कोई बड़ा कागजी या कानूनी पेच फंस सकता है।
किसी भी एग्रीमेंट पर आंख मूंदकर हस्ताक्षर न करें। दफ्तर में कार्य का अत्यधिक दबाव रहेगा और आपकी किसी पुरानी गलती को तूल दिया जा सकता है। व्यापार व लेन-देन: चालू नकदी प्रवाह (कैश फ्लो) में रुकावट आ सकती है और अवांछित खर्चों के कारण मासिक बजट डगमगाएगा।
सावधानी की सलाह: कार्यस्थल और परिवार में किसी से भी तीखी बहस न करें और वाहन बेहद धीमी गति से चलाएं।
शुभ रंग: सफेद/हल्का पीला | शुभ अंक: 9
2. वृश्चिक राशि — नवम भाव में नीच मंगल, भाग्य में अड़चनें और व्यापारिक भुगतान में रुकावट
वृश्चिक राशि के स्वामी भी मंगल देव हैं। मंगल का भाग्य भाव में नीच अवस्था में जाना यह संकेत देता है कि भाग्य के भरोसे लिया गया कोई भी जोखिम भरा फैसला उलटा पड़ेगा।
वित्तीय व करियर का बड़ा खतरा: जिस बड़ी डील या सरकारी टेंडर पर आपको शत-प्रतिशत भरोसा था, वह अंतिम क्षणों में किसी प्रक्रियात्मक अड़चन से लटक सकती है। शेयर बाजार, इंट्राडे, एफएंडओ या क्रिप्टो में लगाया गया पैसा अचानक अटकने का खतरा रहेगा। कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों की आंतरिक गुटबाजी आपको निशाना बना सकती है।
व्यापार व लेन-देन: किसी पार्टी को दिया गया बड़ा माल या बकाया पेमेंट तय समय पर नहीं मिलेगा, जिससे देनदारियां बढ़ सकती हैं।
सावधानी की सलाह: आने वाले दिनों में कोई भी नया कर्ज न लें और न ही किसी अनजान व्यक्ति के नाम पर जमानत दें।
शुभ रंग: हल्का नारंगी | शुभ अंक: 9
3. मकर राशि — सप्तम भाव में नीच मंगल, साझेदारी में दरार और कानूनी मुकदमों का भय
मकर राशि के जातकों के लिए मंगल देव का गोचर सप्तम (साझेदारी व दांपत्य) भाव में होगा।
वित्तीय व करियर का बड़ा खतरा: आपके बिजनेस पार्टनर के साथ पैसों के लेन-देन को लेकर गहरा अविश्वास पैदा हो सकता है, जिससे साझेदारी टूटने तक की नौबत आ सकती है। टैक्स, जीएसटी या सरकारी नियमों में की गई कोई पुरानी भूल भारी आर्थिक दंड का कारण बन सकती है। नौकरीपेशा लोगों को उच्च अधिकारियों के गुस्से का सामना करना पड़ सकता है।
व्यापार व लेन-देन: दैनिक बिक्री में मंदी का असर दिखेगा और पुराने ग्राहकों से संबंध बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी।
सावधानी की सलाह: आवेश में आकर नौकरी बदलने या पार्टनरशिप खत्म करने का फैसला न लें, वाणी पर कड़ा संयम रखें।
शुभ रंग: हल्का स्लेटी/ग्रे | शुभ अंक: 8
मंगल के अनिष्ट प्रभाव को शांत करने के 3 अचूक शास्त्रीय उपाय
नीच मंगल की मारक और उग्र ऊर्जा को शांत करने तथा अपने धन व करियर की रक्षा के लिए ये सिद्ध उपाय तुरंत अपनाएं:
हनुमान जी को चमेली के तेल का दीपक और सुंदरकांड पाठ: प्रतिदिन शाम के समय संकटमोचन हनुमान जी के समक्ष चमेली या तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
उन्हें लाल सिंदूर का तिलक लगाएं और शांत मन से 'सुंदरकांड' अथवा 3 बार 'श्री हनुमान चालीसा' का पाठ करें। हनुमान जी की भक्ति मंगल के समस्त अमंगल को भस्म कर देती है। शिवलिंग पर कच्चा गाय का दूध, गंगाजल और शहद अर्पण: भगवान शिव ही उग्र अग्नि को शांत करने वाले नीलकंठ हैं। प्रतिदिन सुबह शिवलिंग पर शुद्ध जल में थोड़ा कच्चा दूध और शहद मिलाकर अर्पित करें। इसके बाद शांत चित्त होकर 'महामृत्युंजय मंत्र' का 108 बार जाप करें।
लाल मसूर की दाल और गुड़ का दान: प्रत्येक मंगलवार को सवा किलो लाल मसूर की दाल और गुड़ किसी जरूरतमंद व्यक्ति या भिक्षुक को दान करें। इसके साथ ही बंदरों को गुड़-चना खिलाएं या किसी गौशाला में लाल गाय को गुड़ की रोटी दें।
Comment Box में 'जय बजरंगबली' और 'हर हर महादेव' जरूर लिखें, संकटमोचन हनुमान जी और देवाधिदेव महादेव आपके सभी संकटों, नीच मंगल के दुष्प्रभावों और वित्तीय नुकसान से रक्षा करें!
अस्वीकरण (Disclaimer)
नोट: इस लेख में दी गई जानकारी ज्योतिषीय गणनाओं, पंचांगीय गोचर और सामान्य मान्यताओं पर आधारित है। हर व्यक्ति की कुंडली में लग्न, महादशा, अंतर्दशा और अन्य ग्रहों की स्थिति भिन्न होती है, इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने या कोई बड़ा वित्तीय, कानूनी व करियर से जुड़ा निर्णय लेने से पूर्व संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ या अनुभवी ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।
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