उत्तर प्रदेश के कानपुर में रहने वाली 42 वर्षीय सुनीता के घर उसका 26 वर्षीय भतीजा रोहित अक्सर आता-जाता था। रोहित शहर में नौकरी करता था और परिवार के लोगों की मदद भी करता था।
लेकिन पिछले कुछ दिनों से उसका रात में चाची के घर आना परिवार के लिए चर्चा का विषय बन गया था।
एक रात करीब 11 बजे रोहित फिर घर पहुंचा। सुनीता ने उसे सीधे अंदर बुलाया और दरवाजा बंद कर लिया।
सुनीता के पति महेश ने यह देखा तो उन्हें शक हुआ।
अगली सुबह उन्होंने सुनीता से पूछा कि रोहित रात में क्यों आया था।
सुनीता ने सिर्फ इतना कहा, “तुम जितना सोच रहे हो, मामला उससे कहीं ज्यादा बड़ा है।”
महेश को उसकी बात पर भरोसा नहीं हुआ।
दो दिन बाद उन्होंने रोहित को फिर रात में आते देखा। इस बार रोहित के हाथ में एक काली फाइल थी।
महेश ने दरवाजा खोलकर दोनों से सवाल किया।
रोहित ने बिना कुछ कहे फाइल मेज पर रख दी।
अंदर करीब 15 साल पुराने जमीन के दस्तावेज थे।
महेश ने बताया कि यह जमीन उनके पिता की थी और वर्षों पहले अचानक परिवार के नाम से गायब हो गई थी। उस समय सभी ने मान लिया था कि कागजों में गलती हुई होगी।
लेकिन फाइल में एक पुरानी रजिस्ट्री की कॉपी थी।
उस पर महेश के पिता के हस्ताक्षर जैसे दिखने वाले हस्ताक्षर मौजूद थे।
सुनीता ने बताया कि उसे कुछ महीने पहले पुराने संदूक में एक पत्र मिला था। पत्र में लिखा था कि जमीन के कागज किसी परिवार के सदस्य ने नहीं, बल्कि बाहर के व्यक्ति ने बदलवाए थे।
रोहित पिछले कई महीनों से उसी व्यक्ति की तलाश कर रहा था।
लेकिन फाइल में एक और दस्तावेज था, जिसने पूरा मामला बदल दिया।
उसमें जमीन बेचने के बदले मिली रकम का बैंक रिकॉर्ड था।
रकम जिस खाते में गई थी, वह परिवार के एक पुराने परिचित के नाम था।
पुलिस में शिकायत की गई।
जांच के दौरान सामने आया कि वर्षों पहले फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन पर कब्जा करने की कोशिश हुई थी। परिवार के लोगों को अलग-अलग कहानियां बताकर मामला दबा दिया गया था।
महेश को अब समझ आया कि सुनीता और रोहित रात में चोरी-छिपे क्यों मिल रहे थे।
सुनीता किसी छिपे रिश्ते को लेकर नहीं, बल्कि अपने पति के परिवार की 15 साल पुरानी जमीन की सच्चाई खोजने में रोहित की मदद कर रही थी।
लेकिन जांच के दौरान पुलिस को एक और सुराग मिला—पुरानी रजिस्ट्री पर गवाह के रूप में जिस व्यक्ति के हस्ताक्षर थे, वह आज भी उसी शहर में रह रहा था।
और उसी व्यक्ति के पास उस जमीन से जुड़े मूल दस्तावेज होने की आशंका थी।
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