हरियाणा के गुरुग्राम की एक कॉलोनी में 35 वर्षीय अरुण अपनी पत्नी पूजा और छह साल के बेटे के साथ रहता था। अरुण एक निजी कंपनी में काम करता था और सुबह जल्दी ऑफिस निकल जाता था। उसके घर के सामने ही 32 वर्षीय करण अपनी मां के साथ रहता था। दोनों परिवारों में अच्छी जान-पहचान थी, इसलिए करण का अरुण के घर आना-जाना भी सामान्य माना जाता था।
कुछ महीनों से अरुण ने गौर किया कि उसके ऑफिस जाने के बाद करण अक्सर उसके घर आता था। कभी बिजली का बिल जमा कराने, कभी सामान पहुंचाने और कभी पूजा की मदद करने के बहाने वह घर में काफी देर तक रहता। अरुण ने एक-दो बार पत्नी से पूछा भी, लेकिन पूजा ने कहा कि करण पड़ोसी है और मुश्किल समय में मदद कर देता है।
अरुण ने बात को वहीं छोड़ दिया।
लेकिन एक दिन ऑफिस से लौटते वक्त अरुण अचानक वापस घर आ गया। जैसे ही उसने दरवाजा खोला, करण बाहर निकलता मिला। अरुण ने पूछा कि इतनी दोपहर को वह यहां क्या कर रहा था। करण ने कहा कि पूजा ने गैस सिलेंडर उठाने में मदद मांगी थी।
अरुण को जवाब अजीब लगा, लेकिन उसने कोई विवाद नहीं किया।
इसके बाद उसने घर के CCTV की रिकॉर्डिंग देखनी शुरू की। उसे पता चला कि करण पिछले एक महीने में करीब दर्जनभर बार उसके घर आया था। ज्यादातर बार वह अरुण के ऑफिस जाने के थोड़ी देर बाद आता और उसके लौटने से पहले निकल जाता।
अरुण का शक अब बढ़ चुका था।
एक रात उसने पत्नी से कहा कि अगले दिन उसे ऑफिस के काम से बाहर जाना है। लेकिन असल में उसने छुट्टी ले ली और घर के पास ही एक दोस्त के यहां चला गया। दोपहर में CCTV पर करण घर के अंदर जाता दिखाई दिया।
करीब आधे घंटे बाद अरुण चुपचाप घर पहुंचा।
उसने दरवाजा खोला तो अंदर से धीमी आवाजें आ रही थीं। वह कुछ पल दरवाजे के बाहर ही खड़ा रहा। तभी उसे करण की आवाज सुनाई दी—
“अगर ये बात बाहर निकल गई तो सिर्फ तुम्हारा नहीं, मेरा भी सब खत्म हो जाएगा।”
अरुण के होश उड़ गए।
उसने दरवाजा खोला तो पूजा और करण दोनों घबरा गए। अरुण ने पूछा कि आखिर ऐसी कौन-सी बात है जिसे दोनों छिपा रहे हैं।
पूजा रोने लगी, लेकिन करण वहां से जाने लगा। अरुण ने उसे रोककर साफ कहा कि अब उसे पूरी सच्चाई बतानी होगी।
काफी देर की बहस के बाद पूजा ने बताया कि कुछ महीने पहले उसे एक अनजान नंबर से धमकी भरे फोन आने लगे थे। फोन करने वाला व्यक्ति अरुण के ऑफिस और उसके बैंक खाते से जुड़ी निजी जानकारी बता रहा था।
पूजा डर गई थी।
उसने करण को यह बात बताई क्योंकि करण को कंप्यूटर और मोबाइल की अच्छी जानकारी थी। करण ने दावा किया था कि वह पता लगा सकता है कि फोन कौन कर रहा है।
लेकिन कुछ समय बाद मामला उल्टा हो गया।
धमकी देने वाला व्यक्ति पूजा से पैसे मांगने लगा। उसने कहा कि अगर पैसे नहीं दिए तो अरुण के नाम से कुछ फर्जी दस्तावेज और निजी तस्वीरें इंटरनेट पर डाल देगा।
पूजा ने डर के कारण यह बात अपने पति से छिपा ली।
अरुण ने पूछा कि फिर करण इतनी बार घर क्यों आता था।
करण ने बताया कि वह धमकी देने वाले व्यक्ति का पता लगाने की कोशिश कर रहा था। उसने कुछ चैट और फोन नंबर भी ट्रेस किए थे। लेकिन वह भी पुलिस के पास जाने से डर रहा था क्योंकि उसके पास कुछ संदिग्ध डिजिटल फाइलें थीं।
अरुण को बात पूरी तरह साफ नहीं लगी।
उसने करण का फोन देखने की मांग की। करण पहले तैयार नहीं हुआ, लेकिन बाद में फोन पुलिस के सामने देने पर सहमत हो गया।
पुलिस ने फोन की जांच की तो एक चौंकाने वाली बात सामने आई।
धमकी देने वाला नंबर कई बार करण के ही पुराने नंबर से संपर्क कर चुका था।
अब शक करण पर भी जाने लगा।
पूछताछ में करण टूट गया। उसने स्वीकार किया कि शुरुआत में उसने पूजा की मदद करने की कोशिश की थी, लेकिन बाद में उसने खुद इस मामले का फायदा उठाना शुरू कर दिया। उसने धमकी देने वाले व्यक्ति की पहचान कर ली थी, लेकिन पूजा और अरुण को पूरी जानकारी देने के बजाय वह उन्हें डराकर कुछ पैसे हासिल करना चाहता था।
लेकिन असली धमकी देने वाला करण नहीं था।
जांच में पता चला कि वह व्यक्ति अरुण के ऑफिस में काम करने वाला एक पूर्व कर्मचारी था। उसे अरुण के बैंक और ऑफिस से जुड़े कुछ पुराने दस्तावेजों की जानकारी थी। उसने उसी जानकारी का इस्तेमाल करके परिवार को डराने की कोशिश की थी।
पुलिस ने उस व्यक्ति को हिरासत में लिया तो उसके पास कई फर्जी दस्तावेज और अलग-अलग लोगों को भेजे गए धमकी भरे मैसेज मिले।
अरुण को अब समझ आया कि पत्नी का पड़ोसी से छिपकर मिलना सिर्फ एक साधारण घरेलू बात नहीं थी। लेकिन उसे यह भी पता चला कि पूजा ने डर के कारण उससे सच छिपाया और करण ने उसी डर का फायदा उठाने की कोशिश की।
इस घटना के बाद अरुण ने पुलिस के सामने पूरा मामला रखा। डिजिटल रिकॉर्ड, CCTV और फोन चैट के आधार पर जांच आगे बढ़ी।
मोहल्ले में कई दिनों तक यही चर्चा रही कि पति को अपनी पत्नी और पड़ोसी के बीच गलत रिश्ता होने का शक था, लेकिन दरवाजे के पीछे सुनी गई एक बातचीत ने कहानी को बिल्कुल दूसरी दिशा में मोड़ दिया।
जिस रिश्ते को देखकर अरुण को सबसे पहले शक हुआ था, उसके पीछे ब्लैकमेलिंग, डिजिटल धमकी और पैसों का खेल छिपा था।
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