दीदी ने ₹100 की राइड बचाने के लिए मंगाई बिरयानी, डिलीवरी बॉय को फोन कर बोलीं- ‘भैया, मुझे भी घर ले चलो’


सोशल मीडिया पर देसी जुगाड़ से जुड़े किस्से अक्सर लोगों का ध्यान खींच लेते हैं। ऐसा ही एक मजेदार किस्सा इन दिनों चर्चा में है, जिसमें एक महिला ने घर जाने के लिए बाइक राइड बुक करने के बजाय खाना ऑर्डर करने का रास्ता चुन लिया। कहानी के मुताबिक, महिला को घर जाना था और जब उसने राइडिंग ऐप पर बाइक का किराया देखा तो करीब 100 रुपये दिख रहे थे। बस फिर क्या था, उसके दिमाग में ऐसा आइडिया आया जिसे सुनकर कोई हंसे बिना नहीं रह पाएगा।

बताया जा रहा है कि महिला ने रैपिडो ऐप खोला तो घर तक जाने के लिए बाइक राइड का किराया करीब 100 रुपये दिखाई दिया। महिला ने सोचा कि अगर 100 रुपये सिर्फ घर जाने के लिए खर्च करने हैं, तो क्यों न इसी रकम में कुछ खाने का सामान ही मंगा लिया जाए।

इसके बाद उसने स्विगी पर जाकर करीब 100 रुपये की बिरयानी ऑर्डर कर दी।

ऑर्डर करने के कुछ देर बाद महिला ने डिलीवरी बॉय को फोन किया।

महिला ने पूछा, “भैया, आप निकल गए या नहीं?”

डिलीवरी बॉय ने जवाब दिया, “मैडम, ऑर्डर पैक हो गया है, बस निकल रहा हूं।”

इसके बाद महिला ने उससे कहा, “बस पांच मिनट रुकना, मैं भी आ रही हूं… मुझे भी ले चलना।”

डिलीवरी बॉय शायद महिला की बात सुनकर कुछ पल के लिए हैरान रह गया होगा। फिर मजाकिया अंदाज में उसने कहा, “वाह मैडम! एक तीर से दो निशाने! आपने तो 100 रुपये की बाइक राइड बचाने के लिए सीधे बिरयानी ही ऑर्डर कर दी!”

यानी महिला का प्लान साफ था—बिरयानी भी घर पहुंच जाए और खुद भी उसी डिलीवरी के साथ घर पहुंच जाएं।

कुछ देर बाद डिलीवरी बॉय रेस्टोरेंट पहुंचा, बिरयानी का पैकेट लिया और अपनी बाइक से निकल पड़ा। कहानी के मुताबिक महिला रास्ते में उससे मिलीं और उसकी बाइक पर बैठ गईं।

एक तरफ डिलीवरी बॉय को ऑर्डर पहुंचाना था और दूसरी तरफ महिला के लिए यह पूरा सफर किसी देसी जुगाड़ से कम नहीं था। उनके हाथ में बिरयानी का पैकेट था और दिमाग में शायद यही चल रहा था कि आज तो 100 रुपये की राइड का खर्च भी बच गया और खाना भी घर पहुंच रहा है।

लेकिन इस मजेदार जुगाड़ का दूसरा पहलू भी है।

डिलीवरी बॉय के लिए किसी ग्राहक को अपनी बाइक पर बैठाकर ले जाना जोखिम भरा हो सकता है। अगर रास्ते में ट्रैफिक पुलिस रोक लेती या कंपनी के नियमों में इसकी अनुमति नहीं होती, तो परेशानी डिलीवरी बॉय के लिए खड़ी हो सकती थी। किसी दुर्घटना की स्थिति में बीमा और जिम्मेदारी से जुड़े सवाल भी उठ सकते हैं।

यानी महिला ने भले ही अपनी तरफ से इसे पैसे बचाने का स्मार्ट तरीका समझा हो, लेकिन डिलीवरी पार्टनर के लिए यह फैसला उतना आसान या सुरक्षित नहीं था।

कहानी का सबसे मजेदार हिस्सा यही है कि महिला ने घर जाने के लिए ₹100 खर्च करने के बजाय ₹100 की बिरयानी मंगाने का रास्ता चुन लिया। हालांकि यह किस्सा सोशल मीडिया पर वायरल दावे/मजेदार कहानी के रूप में सामने आता है, इसलिए इसे किसी वास्तविक घटना के रूप में स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं माना जाना चाहिए।

फिर सवाल यह है कि क्या इसे शानदार देसी जुगाड़ कहा जाए या फिर ऐसी बचत से बचना चाहिए जिसमें किसी दूसरे व्यक्ति की नौकरी और सुरक्षा जोखिम में पड़ सकती है?

आप क्या सोचते हैं—दीदी की स्मार्टनेस की तारीफ होनी चाहिए या यह जुगाड़ गलत था?

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