बाजार में 10 दिन मिलती है कांच जैसी यह मिठाई, काली मिर्च और लौंग से होती है तैयार..कई बीमारियों का है इलाज

राजस्थान के करौली में एकदम कांच जैसी एक खास मिठाई सैकड़ों साल से बनती आ रही है. इसका स्वाद भी सालभर में एक मेले के दौरान 10 दिन ही मिल पाता है. इस खास मिठाई का नाम तिल गिनी है. यह मिठाई केवल करौली में ही बनती है.

इस खास मिठाई का नाम तिलगिनी है. देखने में यह मिठाई एकदम कांच जैसी दिखाई पड़ती है. सिर्फ खास मौके पर मिलने वाले, इस मीठे जायके का न केवल स्वाद दमदार है बल्कि उसका नाम भी अन्य मिठाइयों से एकदम अलग है.

एकदम कांच जैसी और काली मिर्च और चाशनी से तैयार होने वाली इस खास मिठाई का स्वाद भी करौली में खास मौके पर कुछ दिनों के लिए ही मिलता है. इस खास मिठाई का स्वाद सिर्फ महाशिवरात्रि मेले के दौरान ही मिल पाता है.

तिल गिनी नाम की इस खास मिठाई का स्वाद भी केवल करौली में ही मिल सकता है. इस मिठाई को तैयार करने वाले भी यहां कुछ चुनिंदा मुस्लिम कारीगर है. जो सैकड़ों सालों से इस खास मिठाई को बनाते आ रहे हैं.

बात करें तिलगिनी की मांग की तो, वह भी जबरदस्त रहती है. इसकी अच्छी मांग रहने का एक कारण जो भी इस मिठाई को एक बार चख लेता है तो फिर वह इसके स्वाद को नहीं भूल पाता है.

इसे तैयार करने का भी एक सीक्रेट तरीका है. जिसे करौली में कुछ पुश्तैनी कारीगर ही जानते हैं. इसे तैयार करने के लिए सबसे पहले चाशनी ली जाती है फिर उसमें काली मिर्च के साथ अलग किस्म के मसालों के साथ लौंग का खास मसाला डाला जाता है. स्वाद में शानदार होने के साथ यह मिठाई सेहत के लिए भी फायदेमंद रहती है. यह खाने को हजम करने में बहुत ही कारगर है. बाजार में यह मिठाई 240 रुपए किलो से ₹280 किलो तक बिकती है.

तिलगिनी का स्वाद केवल करौली में महाशिवरात्रि मेले में ही लिया जा सकता है. सभी आम लोग इस मिठाई को दवाई के रूप में खाते हैं. इस प्रतिष्ठित मिठाई का स्वाद भी केवल करौली में ही मिल सकता है. कई सालों से करौली में इसका टेस्ट बरकरार है.

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