दीपक अपनी पत्नी राधिका और आठ साल की बेटी के साथ रहता था। शादी को करीब दस साल हो चुके थे और दोनों के बीच किसी बड़े विवाद की बात कभी सामने नहीं आई थी। दीपक एक प्राइवेट कंपनी में काम करता था, जबकि राधिका घर संभालती थी।
पिछले कुछ समय से राधिका शाम के वक्त अक्सर घर से बाहर जाने लगी थी। जब भी दीपक पूछता कि कहां जा रही हो, उसका जवाब लगभग हमेशा एक जैसा होता—"सविता के घर जा रही हूं।"
सविता उनकी पड़ोसी और राधिका की पुरानी परिचित थी, इसलिए दीपक को कभी शक नहीं हुआ।
एक शाम राधिका ने फिर कहा कि वह सविता के घर जा रही है। दीपक ने हां में सिर हिला दिया। लेकिन उस दिन संयोग से उसे ऑफिस का काम जल्दी खत्म हो गया और वह करीब आधे घंटे बाद ही घर लौट आया।
घर पहुंचने पर उसने देखा कि राधिका वहां नहीं थी।
दीपक ने सविता को फोन किया।
सविता ने कहा, "राधिका तो आज मेरे घर आई ही नहीं।"
दीपक कुछ देर तक फोन हाथ में लिए खड़ा रहा।
उसे पहली बार लगा कि बात सामान्य नहीं है।
उसने घर के बाहर लगे CCTV की रिकॉर्डिंग देखी। करीब 7:15 बजे राधिका घर से निकली थी। वह अकेली थी। करीब दस मिनट बाद एक सफेद कार उसके पास आकर रुकी। राधिका कार में बैठ गई और कार तेजी से वहां से निकल गई।
दीपक ने फुटेज दोबारा चलाया।
कार का नंबर साफ दिखाई नहीं दे रहा था, लेकिन ड्राइवर का चेहरा कुछ हद तक नजर आ रहा था।
दीपक उसे पहचानता नहीं था।
उस रात राधिका करीब दो घंटे बाद घर लौटी।
दीपक ने कुछ नहीं पूछा।
अगले दिन भी उसने सामान्य व्यवहार किया, लेकिन इस बार उसने तय कर लिया कि वह खुद पता लगाएगा कि राधिका आखिर किससे मिल रही है।
दो दिन बाद राधिका ने फिर वही कहा, "मैं सविता के घर जा रही हूं।"
दीपक ने कुछ नहीं कहा और कुछ दूरी से उसका पीछा किया।
राधिका इस बार शहर के पुराने बाजार के पास एक छोटे से कैफे में पहुंची। वहां वही सफेद कार पहले से खड़ी थी।
राधिका अंदर गई।
कुछ मिनट बाद एक आदमी उससे मिलने आया।
दीपक का शक और गहरा गया।
लेकिन तभी उसने देखा कि राधिका उस आदमी को एक फाइल दे रही थी।
दोनों के बीच कोई सामान्य बातचीत नहीं हो रही थी। राधिका बार-बार आसपास देख रही थी।
दीपक ने दूर से उनकी कुछ तस्वीरें ले लीं।
करीब आधे घंटे बाद वह आदमी चला गया।
राधिका भी घर लौट आई।
उस शाम दीपक ने सीधे सवाल किया, "तुम सविता के घर नहीं जातीं, है ना?"
राधिका कुछ पल चुप रही।
फिर उसने कहा, "तुम मेरा पीछा कर रहे थे?"
दीपक ने फोन पर ली गई तस्वीर उसके सामने रख दी।
राधिका की आंखों में डर साफ दिखाई देने लगा।
दीपक ने पूछा, "यह आदमी कौन है?"
राधिका ने जवाब दिया, "उसका नाम निखिल है।"
दीपक ने पूछा, "और तुम उससे क्या छिपा रही हो?"
राधिका ने कहा, "तुम्हारे बारे में।"
दीपक कुछ समझ नहीं पाया।
राधिका ने बताया कि निखिल उसके मायके के इलाके में रहने वाला एक पुराना परिचित था। कुछ महीने पहले उसे पता चला कि दीपक के नाम से एक पुराने बैंक खाते में संदिग्ध लेनदेन हुए हैं। राधिका को शक था कि किसी ने दीपक के दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल किया है।
दीपक ने कहा, "मुझे तो ऐसे किसी खाते के बारे में पता ही नहीं।"
राधिका ने कहा, "इसीलिए मैं तुम्हें बताने से पहले सबूत जुटा रही थी।"
निखिल बैंकिंग दस्तावेजों की जांच से जुड़े काम में था और उसने राधिका को पुराने रिकॉर्ड समझने में मदद की थी।
दीपक ने पूछा, "लेकिन तुमने सविता का नाम क्यों लिया?"
राधिका ने कहा, "क्योंकि मुझे डर था कि अगर घर में किसी को पता चल गया कि मैं तुम्हारे दस्तावेजों की जांच कर रही हूं तो वह व्यक्ति सावधान हो जाएगा।"
दीपक ने पहली बार महसूस किया कि मामला उसकी सोच से बिल्कुल अलग हो सकता है।
लेकिन उसके मन में एक सवाल अब भी था।
"तुमने मुझे क्यों नहीं बताया?"
राधिका ने कहा, "क्योंकि जिस व्यक्ति पर मुझे शक था, वह हमारे घर का बहुत करीबी था।"
दीपक ने पूछा, "कौन?"
राधिका ने कोई नाम नहीं लिया।
उसने कहा, "पहले यह फाइल देखो।"
फाइल में दीपक के पुराने बैंक रिकॉर्ड थे। कुछ रकम ऐसे खातों में गई थी जिनसे उसका कोई संबंध नहीं था। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि उन खातों में से एक में रकम ट्रांसफर होने के कुछ दिन बाद उसी रकम का एक हिस्सा एक संपत्ति खरीदने में इस्तेमाल हुआ था।
उस संपत्ति के कागज पर जिस व्यक्ति का नाम था, उसे देखकर दीपक के होश उड़ गए।
वह उसका अपना चचेरा भाई सचिन था।
दीपक ने कहा, "यह कैसे हो सकता है?"
राधिका ने बताया कि उसे कुछ महीने पहले घर के पुराने दस्तावेजों में सचिन के नाम से जुड़ा एक कागज मिला था। इसके बाद उसने निखिल की मदद से बैंक रिकॉर्ड की जानकारी जुटानी शुरू की।
दीपक को अब अपने पुराने पारिवारिक रिश्ते याद आने लगे।
सचिन कई साल तक उसके पिता के कारोबार में मदद करता रहा था।
दीपक ने उसी रात सचिन से बात करने की कोशिश की।
सचिन ने कहा कि उसे इन लेनदेन के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
दीपक ने दस्तावेजों का जिक्र किया तो सचिन ने फोन काट दिया।
अगली सुबह दीपक ने पुलिस को पूरी जानकारी देने का फैसला किया।
पुलिस ने दस्तावेजों की जांच शुरू की। बैंक रिकॉर्ड, संपत्ति के कागज और पुराने लेनदेन की जानकारी जुटाई गई।
जांच में कुछ रकम वास्तव में उन खातों तक पहुंची जिनका संबंध सचिन के कारोबारी संपर्कों से था। लेकिन पुलिस ने सिर्फ बैंक रिकॉर्ड के आधार पर उसे दोषी नहीं माना और पूरे लेनदेन की जांच शुरू की।
इसी बीच पुलिस को एक पुराना दस्तावेज मिला जिसमें दीपक के पिता ने कुछ साल पहले अपने दस्तावेजों के गलत इस्तेमाल की आशंका दर्ज की थी।
दीपक के लिए यह सबसे बड़ा झटका था।
उसे अब समझ आ रहा था कि राधिका उससे कुछ छिपा जरूर रही थी, लेकिन वजह कोई प्रेम संबंध नहीं था।
वह अपने पति के खिलाफ चल रहे किसी पुराने वित्तीय खेल का सच पता करने की कोशिश कर रही थी।
दीपक ने राधिका से कहा, "तुमने सच छिपाकर मुझे बहुत परेशान किया।"
राधिका ने कहा, "मुझे पता है। लेकिन मैं चाहती थी कि जब तुम्हें बताऊं तो मेरे पास सिर्फ शक नहीं, सबूत भी हों।"
मामले की जांच आगे बढ़ती रही।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी बाकी था—अगर दीपक के दस्तावेजों का इस्तेमाल किसी और ने किया था, तो वे दस्तावेज उस व्यक्ति तक पहुंचे कैसे?
और जिस व्यक्ति पर राधिका को शक था, क्या वह सचिन ही था या कोई ऐसा शख्स जो अब तक परिवार के सामने बिल्कुल निर्दोष बनकर रह रहा था?
उस दिन दीपक को एक बात जरूर समझ आ गई थी—कभी-कभी पति-पत्नी के बीच छिपी हुई बात का मतलब बेवफाई नहीं होता। लेकिन जब सच बहुत देर से सामने आता है, तो शक रिश्तों को अपराध से भी ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है।
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