गोरे रंग चिकना बदन और सुन्दर फीगर फेस वाली लड़की की चक्कर में नवजवान लड़के अपनी ज़िंदगी खराब कर लेते हैं,,, कैसे,,, चलिए मैं आपको बताती हूं....
सुंदर पत्नी के चक्कर में आज के युवा अपनी आधी उम्र तो निकाल देते हैं इसी की तलाश में, बिना ये जाने कि लड़की वास्तव में कैसी है जो उसे और उसके पूरे परिवार को लेकर आगे चल सके। आज की कहानी भी इसी पर है। आपको पसंद आएगी, आप भी अपने विचार लिख सकते हैं।
राघव लेडीज़ शोरूम पर काम किया करता था। वहाँ सुंदर से सुंदर लड़कियाँ और महिलाएँ कपड़े खरीदने आया करती थीं।
राघव जब खूबसूरत महिलाओं को देखता तो उसे भी लगता—मैं भी एक खूबसूरत लड़की से शादी करूंगा। जब मैं उसके साथ बाज़ार, शादी या पार्टी में निकलूंगा तो लोग देखते ही रह जाएंगे और सब लोग यही कहेंगे—वाह, राघव ने क्या अच्छी किस्मत पाई है।
रोज़ की तरह राघव आज भी शाम को घर लौटा। माँ ने एक लड़की का फोटो दिखाते हुए कहा—राघव, तेरे लिए लड़की देखी है, पसंद कर ले।
राघव ने फोटो में देखा—सिंपल सी, एक पतली-दुबली लड़की, सांवले रंग की।
राघव ने फोटो टेबल पर गुस्से से पटकते हुए माँ से कहा—यह तो ज़रा सी भी सुंदर नहीं है। हमारे शोरूम में तो एक से एक सुंदर लड़कियाँ आती हैं।
मैं नहीं करूंगा इस लड़की से शादी।
इतना कहकर राघव अपने कमरे में चला गया। राघव ने ठान लिया—मैं शादी नहीं करूंगा उस सांवली लड़की से, चाहे मुझे घर से भाग जाना क्यों न पड़े।
माँ पीछे-पीछे राघव के कमरे तक आई और खूब समझाया। घर के सभी सदस्यों ने समझाते हुए कहा—अच्छी लड़की है, पढ़ी-लिखी है, घर के कामकाज भी खूब कर लेती है।
राघव गुस्से से कमरे से निकलकर छत पर आ पहुँचा। बिना कुछ खाए-पिए ही रात भर छत पर पड़े एक टूटे पलंग पर लेटा रहा। जैसे-तैसे सुबह हुई। राघव दुकान पर जाने के लिए तैयार हो चुका था। आज उसका नाश्ते में कुछ भी खाने का मन नहीं कर रहा था।
राघव अपने शोरूम पर जाने के लिए हमेशा पैदल पथ का ही सहारा लेता था। वह रास्ते में आने-जाने वाली लड़कियों को देखता हुआ आगे बढ़ रहा था। उसे राह में जो भी खूबसूरत लड़की दिखती, उसे लगता—इससे मेरी शादी होनी चाहिए।
अचानक उसका पैर पैदल पथ पर पड़े केले के छिलके से फिसल गया और वह पास पड़े कचरे के डिब्बे के ऊपर गिरा—धड़ाम।
वहीं एक ब्यूटी पार्लर की शॉप थी। उसमें से एक औरत बाहर निकली, तुरंत राघव को उठाया और अपने ब्यूटी पार्लर के भीतर ले जाते हुए कहा—ज्यादा चोट तो नहीं लगी भैया?
अंदर एक गद्देदार ऊँची कुर्सी पर बैठा दिया।
इतने में जींस और टी-शर्ट पहने हुए एक महिला ब्यूटी पार्लर के भीतर आई और सामने पड़ी दूसरी खाली कुर्सी पर बैठ गई।
राघव उस सांवली सी महिला को देखने लगा। एक धागे की मदद से उसकी आइब्रो बना दी गई। उसकी आँखें खूबसूरत लगने लगीं। बालों पर प्रेस करके बालों की चमक और बढ़ गई। चेहरे पर ब्लीच, फेशियल और न जाने क्या-क्या क्रीम लगाने के बाद—
उस महिला की खूबसूरती में चार चाँद लग गए।
राघव इस कलाकारी को देखकर दंग रह गया। राघव समझ चुका था—दुनिया की सभी दिखने वाली सुंदर लड़कियाँ और महिलाएँ सिर्फ एक दिखावा हैं।
सब ईश्वर की संतान हैं। हमें काले-गोरे का भेद नहीं रखना चाहिए। जिसका मन सुंदर है, वहाँ जिस्म का कोई मोल नहीं रहता।
देश को और समाज को अच्छे गुणों वाली पत्नियों की तलाश है—जो अपने पति का घर स्वर्ग बना दें।
माँ ने मुझे कल जिस लड़की का फोटो दिखाया था—
वह लड़की ब्यूटी पार्लर जाकर खुद को सज-सँवर कर भी फोटो खिंचवा सकती थी, पर उसने ऐसा नहीं किया।
वह जैसी है, खुद को वैसा ही रखना चाहती है। यही उसकी खूबसूरती का खजाना है।
राघव ने तुरंत अपनी जेब से मोबाइल निकाला और अपनी माँ को फोन पर बताया—
मुझे वही लड़की पसंद है, जिसे मैं कल कह रहा था—ना, ना, ना…
कहानी कैसी लगी?
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