काव्या अचानक नींद से जागी। कमरे में अंधेरा था और उसके पति रोहन गहरी नींद में सो रहे थे।
काव्या पानी पीने के लिए उठी तो उसकी नजर रोहन के मोबाइल पर पड़ी।
मोबाइल की स्क्रीन पर एक तस्वीर खुली हुई थी।
काव्या ने बस एक नजर डाली...
और उसके हाथ-पैर ठंडे पड़ गए।
तस्वीर में खुद काव्या खड़ी थी।
वह अपने घर के उसी कमरे में खड़ी थी।
वही कपड़े।
वही बाल।
वही दीवार।
वही घड़ी।
लेकिन तस्वीर की तारीख देखकर काव्या की सांस अटक गई।
तस्वीर उसी दिन की थी।
समस्या सिर्फ इतनी थी कि उस दिन काव्या पूरे दिन अपनी मां के घर थी।
वह अपने घर में आई ही नहीं थी।
रोहन से पूछा तो उसने फोन छीन लिया
काव्या ने तुरंत रोहन को जगाया।
"ये तस्वीर कहां से आई?"
रोहन ने मोबाइल देखा और अचानक उसका चेहरा सफेद पड़ गया।
उसने फोन काव्या के हाथ से ले लिया।
"तुमने यह क्यों देखा?"
काव्या ने कहा—
"मुझे इसका जवाब चाहिए।"
रोहन कुछ सेकंड तक चुप रहा।
फिर बोला—
"मुझे खुद नहीं पता ये तस्वीर मेरे फोन में कैसे आई।"
काव्या को उसका जवाब बिल्कुल भरोसेमंद नहीं लगा।
उसने पूछा—
"लेकिन तस्वीर तुम्हारे फोन में है।"
रोहन ने कहा—
"हां। और यही बात मुझे भी डरा रही है।"
तस्वीर को ध्यान से देखा तो दूसरा रहस्य मिला
काव्या ने तस्वीर दोबारा देखी।
वह घर के मुख्य कमरे में खड़ी थी।
उसके हाथ में एक कप था।
पीछे दीवार की घड़ी में समय था—
3:17 PM
काव्या ने अपना फोन निकाला और उस दिन की तस्वीरें देखने लगी।
वह सचमुच अपनी मां के घर थी।
उसकी मां ने भी उस दिन की कई तस्वीरें खींची थीं।
समय भी दर्ज था।
3:02 PM।
फिर 3:17 बजे काव्या अपने घर में कैसे दिखाई दे सकती थी?
रोहन ने आखिर एक बात बताई
रोहन ने कहा—
"यह तस्वीर मुझे आज सुबह मिली थी।"
काव्या ने पूछा—
"तुमने मुझे बताया क्यों नहीं?"
रोहन बोला—
"क्योंकि इसके साथ एक और चीज मिली थी।"
उसने मोबाइल की गैलरी खोली।
तस्वीर के साथ एक छोटा वीडियो भी था।
वीडियो में घर का वही कमरा दिखाई दे रहा था।
कुछ सेकंड बाद दरवाजे के पास एक महिला दिखाई दी।
चेहरा साफ नहीं था।
लेकिन कपड़े...
काव्या जैसे ही थे।
काव्या ने वीडियो देखते ही फोन बंद कर दिया।
घर में कोई छिपकर रह रहा था?
अगले दिन रोहन ने पूरे घर की तलाशी ली।
स्टोर रूम।
छत।
रसोई।
बेडरूम।
सब कुछ सामान्य था।
लेकिन काव्या को एक अजीब चीज मिली।
उसकी अलमारी के पीछे दीवार में एक छोटा-सा निशान था।
रोहन ने लकड़ी का पैनल हटाया।
पीछे एक पतला सा खाली स्थान था।
और उसमें...
एक छोटा कैमरा लगा हुआ था।
काव्या की आंखें फैल गईं।
किसी ने उनके घर के अंदर कैमरा लगाया हुआ था।
लेकिन कैमरा किसने लगाया था?
रोहन ने कैमरा निकालकर देखा।
उसमें मेमोरी कार्ड था।
कार्ड में पिछले कई महीनों की रिकॉर्डिंग मौजूद थी।
काव्या ने रिकॉर्डिंग चलानी शुरू की।
अधिकतर वीडियो में घर खाली दिखाई देता था।
फिर एक रात...
कमरे का दरवाजा धीरे से खुला।
एक व्यक्ति अंदर आया।
चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था।
वह सीधे काव्या की अलमारी के पास गया।
कुछ तलाशा।
फिर वापस चला गया।
काव्या ने वीडियो रोक दिया।
"यह कौन है?"
रोहन ने कहा—
"मुझे लगता है मैं इसे जानता हूं।"
अगला खुलासा और भी चौंकाने वाला था
रोहन ने वीडियो को आगे बढ़ाया।
व्यक्ति ने अगली रात फिर घर में प्रवेश किया।
इस बार उसका चेहरा कुछ सेकंड के लिए कैमरे में आ गया।
रोहन ने स्क्रीन देखते ही कहा—
"यह मेरे बड़े भाई समीर का दोस्त है।"
काव्या चौंक गई।
"लेकिन वह हमारे घर में क्यों घुस रहा था?"
रोहन के पास इसका जवाब नहीं था।
फिर सामने आया चोरी का राज
काव्या ने घर में पिछले कुछ महीनों की घटनाएं याद कीं।
कुछ पुराने कागज गायब हुए थे।
एक बैंक की फाइल भी नहीं मिल रही थी।
और रोहन के पिता की संपत्ति से जुड़े दस्तावेज भी कुछ समय पहले गायब हुए थे।
क्या कैमरा सिर्फ निगरानी के लिए लगाया गया था?
या कोई घर के अंदर रखे दस्तावेज खोज रहा था?
असली निशाना काव्या नहीं थी
जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि रोहन के पिता की संपत्ति से जुड़े कुछ पुराने दस्तावेज अदालत में चल रहे एक विवाद में बेहद महत्वपूर्ण थे।
उन दस्तावेजों में जमीन के वास्तविक मालिक का नाम दर्ज था।
अगर वे कागज मिल जाते तो करोड़ों की संपत्ति का फैसला बदल सकता था।
काव्या के घर में कैमरा लगाने वाला व्यक्ति उन्हीं दस्तावेजों की तलाश कर रहा था।
लेकिन फिर सबसे बड़ा सवाल सामने आया—
काव्या की तस्वीर क्यों बनाई गई?
तस्वीर का असली रहस्य
जांच में पता चला कि वह तस्वीर किसी सामान्य कैमरे से नहीं ली गई थी।
किसी ने पुराने वीडियो से काव्या की शक्ल का इस्तेमाल करके एक नई तस्वीर तैयार की थी।
यानी तस्वीर में दिखाई देने वाली काव्या वास्तव में उस दिन वहां मौजूद नहीं थी।
वह तस्वीर जानबूझकर बनाई गई थी, ताकि ऐसा लगे कि काव्या उस समय घर में थी।
किसी को फंसाने की तैयारी हो रही थी।
लेकिन किसे फंसाना था?
काव्या ने रिकॉर्डिंग दोबारा देखी।
उसे एक बात दिखाई दी।
जिस रात कैमरे में वह आदमी घर में आया था, उसके कुछ मिनट बाद रोहन का भाई समीर भी बाहर दिखाई दिया।
काव्या ने रोहन से कहा—
"शायद यह अकेले नहीं कर रहा था।"
रोहन ने तुरंत पुलिस को जानकारी दी।
जांच में दोनों के बीच हुए कुछ संदेश सामने आए।
उन संदेशों से पता चला कि वे घर से संपत्ति के दस्तावेज हासिल करना चाहते थे।
और काव्या की नकली तस्वीर बनाकर उसके खिलाफ झूठा सबूत तैयार करना चाहते थे।
लेकिन योजना सफल नहीं हुई
कैमरे की रिकॉर्डिंग, मोबाइल संदेश और पुराने दस्तावेज जांच के लिए दिए गए।
कुछ ही दिनों में पूरा मामला खुलने लगा।
जिस तस्वीर ने काव्या को डराया था...
वही तस्वीर आखिरकार अपराधियों के खिलाफ सबसे महत्वपूर्ण सबूत बन गई।
काव्या ने वह तस्वीर अपने फोन में संभालकर रख ली।
रोहन ने पूछा—
"इसे क्यों रख रही हो?"
काव्या ने कहा—
"क्योंकि इस तस्वीर ने मुझे डराया जरूर था... लेकिन इसी ने हमें सच तक पहुंचाया।"
अंत
उस रात काव्या ने पहली बार महसूस किया कि किसी तस्वीर पर भरोसा करने से पहले यह जानना जरूरी है कि तस्वीर किसने बनाई, क्यों बनाई और उसके पीछे क्या मकसद था।
उसे लगा था कि कोई उसके घर में छिपकर उसकी जिंदगी पर नजर रख रहा है।
सच इससे भी ज्यादा खतरनाक था।
कोई उसके चेहरे का इस्तेमाल करके उसे ही एक ऐसे अपराध में फंसाना चाहता था, जिसके बारे में उसे कुछ पता तक नहीं था।
और सबसे डरावनी बात?
जिस दिन वह तस्वीर बनाई गई, उस दिन काव्या सच में अपने घर में थी ही नहीं।
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