प्रेमी से मिलने पहुंची शादीशुदा महिला... दरवाजा खुला तो सामने प्रेमी नहीं, उसकी पत्नी खड़ी थी, फिर खुला ऐसा राज


नेहा
की शादी को छह साल हो चुके थे। पति आदित्य एक निजी कंपनी में काम करता था और अक्सर देर रात तक ऑफिस में रहता था।

इसी दौरान नेहा की मुलाकात विवेक से हुई।

शुरुआत सामान्य बातचीत से हुई, लेकिन धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं। नेहा को लगता था कि विवेक ही उसे समझता है।

लेकिन विवेक ने नेहा से एक बात छिपा रखी थी।

वह पहले से शादीशुदा था।

नेहा को इसकी जानकारी नहीं थी।


उस रात नेहा सीधे विवेक के घर पहुंच गई

विवेक कई दिनों से फोन नहीं उठा रहा था।

नेहा ने दर्जनों बार कॉल किया।

कोई जवाब नहीं मिला।

आखिर उसने विवेक के एक पुराने संदेश से उसका पता खोज लिया और रात करीब 10 बजे वहां पहुंच गई।

उसने दरवाजा खटखटाया।

दरवाजा एक महिला ने खोला।

नेहा ने पूछा—

"विवेक घर पर हैं?"

महिला ने शांत आवाज में कहा—

"आप कौन हैं?"

नेहा ने विवेक का नाम लिया।

महिला कुछ सेकंड तक उसे देखती रही।

फिर बोली—

"मैं उनकी पत्नी हूं।"

नेहा के पैरों तले जमीन खिसक गई।


लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई

नेहा पीछे हटने ही वाली थी कि अंदर से विवेक बाहर आया।

उसने नेहा को देखते ही अपना सिर पकड़ लिया।

उसकी पत्नी कविता ने विवेक की तरफ देखा।

"तो यही है वह महिला?"

विवेक कुछ नहीं बोला।

कविता ने नेहा को अंदर बुलाया।

नेहा को लगा कि अब घर में बड़ा झगड़ा होगा।

लेकिन कविता ने जो बात कही, उससे नेहा और भी ज्यादा हैरान हो गई।


कविता को पहले से सब पता था

कविता ने कहा—

"मुझे तुम्हारे बारे में तीन महीने पहले पता चल गया था।"

नेहा चौंक गई।

"तो आपने मुझे रोका क्यों नहीं?"

कविता ने कहा—

"क्योंकि मुझे भी विवेक पर शक था। लेकिन उसका रिश्ता सिर्फ तुमसे नहीं था।"

नेहा ने विवेक की तरफ देखा।

विवेक चुप था।


एक से ज्यादा महिलाएं?

कविता ने अपना फोन निकाला।

उसमें कई नंबर और तस्वीरें थीं।

विवेक अलग-अलग महिलाओं से संपर्क में था।

लेकिन कविता ने पुलिस को इसकी जानकारी इसलिए नहीं दी थी क्योंकि उसे एक और चीज का शक था।

विवेक सिर्फ रिश्ते नहीं बना रहा था।

वह महिलाओं से पैसे भी ले रहा था।


नेहा के साथ भी ऐसा ही हुआ था

नेहा को अचानक याद आया कि पिछले छह महीनों में उसने विवेक को कई बार पैसे दिए थे।

कभी कारोबार में नुकसान के नाम पर।

कभी मां की बीमारी के नाम पर।

कभी किसी जरूरी काम के लिए।

कुल रकम काफी बड़ी थी।

कविता ने बताया कि उसने भी शादी के बाद विवेक को कई बार पैसे दिए थे।

अब दोनों महिलाओं को समझ आया कि वे एक ही जाल का हिस्सा थीं।


लेकिन विवेक के कमरे में मिला एक और सबूत

कविता ने अलमारी खोली।

अंदर कई लिफाफे रखे थे।

हर लिफाफे पर अलग-अलग महिलाओं के नाम लिखे थे।

कुछ में नकदी थी।

कुछ में दस्तावेजों की प्रतियां।

और कुछ में पहचान पत्रों की फोटो कॉपी।

नेहा को अब डर लगने लगा।

यह सिर्फ प्रेम संबंधों का मामला नहीं था।


फिर सामने आया तीसरा नाम

कविता ने बताया कि उसे कुछ दिन पहले एक अनजान व्यक्ति का फोन आया था।

उसने कहा था—

"आपके पति जिस खेल में हैं, उसमें आप दोनों भी फंस सकती हैं।"

कविता ने उस नंबर की जानकारी जुटाई।

वह नंबर एक ऐसे व्यक्ति का था जो पहले वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में जांच के दायरे में रह चुका था।

अब मामला और गंभीर हो गया।


नेहा ने पुलिस को फोन किया

पुलिस के आने से पहले विवेक घर से भागने की कोशिश करने लगा।

लेकिन कविता ने दरवाजा बंद कर दिया।

कुछ देर बाद पुलिस पहुंच गई।

घर की तलाशी ली गई।

कई मोबाइल फोन, दस्तावेज और बैंक लेनदेन से जुड़े कागज मिले।


जांच में खुला बड़ा राज

पुलिस को पता चला कि विवेक कई लोगों से अलग-अलग कारणों से पैसे ले रहा था।

वह खुद को अलग-अलग लोगों के सामने अलग-अलग तरीके से पेश करता था।

कहीं कारोबारी।

कहीं निवेश सलाहकार।

कहीं परेशान पति।

और कुछ महिलाओं के सामने खुद को अविवाहित बताता था।

नेहा को समझ आया कि उसके साथ बनाया गया रिश्ता भी इसी जाल का हिस्सा था।


लेकिन कविता की कहानी भी साफ नहीं थी

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि कविता को अपने पति की गतिविधियों की जानकारी थी।

उसने कई बार उसके दस्तावेज संभालकर रखे थे।

उसने कुछ महिलाओं से संपर्क भी किया था।

पुलिस को शक हुआ कि कहीं कविता भी इस पूरे खेल में शामिल तो नहीं?

कविता ने इनकार किया।

उसने कहा—

"मैं उसके खिलाफ सबूत जुटा रही थी।"


फिर मिला सबसे महत्वपूर्ण सबूत

कविता ने पुलिस को एक पुराना ईमेल दिखाया।

उसमें विवेक को धमकी दी गई थी कि अगर उसने पैसे वापस नहीं किए तो उसके खिलाफ दस्तावेज पुलिस को सौंप दिए जाएंगे।

ईमेल में कई ऐसे नाम थे जिन्हें विवेक से पैसे लेने के मामले में जोड़ा जा सकता था।

अब पुलिस के पास जांच आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त सुराग थे।


नेहा के लिए सबसे बड़ा झटका

नेहा ने पुलिस के सामने स्वीकार किया कि वह विवेक से प्रेम करती थी।

लेकिन उसे यह नहीं पता था कि वह शादीशुदा है।

उसने विवेक को दिए पैसों का रिकॉर्ड भी पुलिस को दे दिया।

कई अन्य महिलाओं ने भी सामने आकर इसी तरह की शिकायतें दर्ज कराईं।

धीरे-धीरे पता चला कि विवेक ने वर्षों से लोगों को अलग-अलग कहानियां सुनाकर पैसे लिए थे।


कविता ने आखिर नेहा से क्या कहा?

मामला खत्म होने के बाद कविता ने नेहा से कहा—

"तुमने जो किया वह गलत था, क्योंकि तुम्हें लगा कि वह अकेला है। लेकिन तुम्हें सच्चाई पता नहीं थी।"

नेहा ने सिर झुका लिया।

"काश मुझे पहले पता होता।"

कविता ने कहा—

"कभी-कभी किसी रिश्ते में कदम रखने से पहले उसके पीछे की सच्चाई जानना जरूरी होता है।"


अंत

नेहा जिस रात अपने प्रेमी से मिलने उसके घर पहुंची थी, उसे लगा था कि वह अपने रिश्ते को लेकर कोई बड़ा फैसला करेगी।

लेकिन दरवाजा खुलते ही सामने उसकी प्रेमी की पत्नी खड़ी थी।

और उस रात सिर्फ एक प्रेम संबंध का सच नहीं खुला।

एक ऐसा जाल सामने आया जिसमें कई लोगों को अलग-अलग पहचान और झूठी कहानियों के जरिए फंसाया जा रहा था।

नेहा के लिए सबसे बड़ा सदमा यह था कि जिस आदमी को वह अपना प्रेमी समझती थी...

वह पहले से शादीशुदा था और उसकी जिंदगी में वह अकेली महिला भी नहीं थी।

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