इज्जतनगर की रहस्यमयी मजार
उस वक्त जब अंग्रेजों का शासन था. तब रेल की पटरियों पर यह मजार पड़ी होती थी, जिसे कई बार हटाने का प्रयास भी किया गया. लेकिन हर बार असफल रहे और जब इस मजार के आसपास ट्रैक डालने का प्रयास किया तो जो पटरी बिछाई जाती थी. वह सुबह के समय अपनी जगह से पीछे हट जाती थी. जिसे देखकर अंग्रेज अधिकारियों ने अपने नौकरों को इसकी देखरेख करने के लिए रात में तैनात किया. लेकिन वह भी इसका राज नहीं बता पाए. इसके बाद अंग्रेज खुद रात के समय पर देखरेख करने खड़े हुए, तो उन्हें भी किसी के भी आने जाने की खबर नहीं हुई और पटरी खुद ब खुद अपनी जगह से पीछे हट चुकी थी.
इतिहासकार ने बताए किस्से
बरेली के इतिहासकार डॉ राजेश शर्मा ने लोकल 18 से खास बातचीत के दौरान बताया कि जब मीटर गैस से ब्रोड गैस किया गया, तब भी यह मांग उठ रही थी कि इस मजार को इस जगह से हटाया जाए. फिर जब इज्जतनगर का आधुनिकीकरण हुआ तब इस मजार को प्लेटफार्म पर ला दिया गया. लेकिन वहां से कोई इस मजार को नहीं हटा पाया. इसके अलावा वह यह भी बताते हैं कि बरेली में इस मजार का होना लोगों के लिए काफी आस्था का विषय बना हुआ है.
विकल्प कुदेशिया/बरेली: बरेली शहर काफी ऐतिहासिक और रहस्यमय चीजों से भरा हुआ है. इज्जतनगर में बनी मजार भी बहुत रहस्यमयी है. इसके बारे में आज तक कोई पता नहीं लगा पाया है. 1975 से ही यहां पर रेलवे ट्रैक डालने का कार्य होता था. कहा जाता है कि शायद यह मजार सैयद नन्हे शाह साहब की है. जो कि मुगलों के जमाने से वही रेलवे ट्रैक पर बनी हुई है. इसे हटाने का प्रयास अंग्रेजों ने काफी किया. मगर हमेशा से ही किसी रहस्य के कारण वह उसे नहीं हटा पाते थे.
बरेली में इस मजार का क्या है महत्व
मीटर गैस से ब्रेड गैस किया गया तब भी यह मांग उठ रही थी कि इस मजार कोई जगह से हटाया जाए. फिर जब इज्जतनगर का आधुनिकीकरण हुआ, तब इस मजार को प्लेटफार्म पर ला दिया गया. लेकिन वहां से कोई इस मजार को नहीं जा पाया. इसके अलावा बरेली में इस मजार का होना लोगों के लिए काफी आस्था का विषय बना हुआ है.
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