रीमा अपने पति मोहित और देवर करण के साथ रहती थी। शादी को छह साल हो चुके थे। मोहित एक निजी कंपनी में काम करता था और महीने में कई बार काम के सिलसिले में बाहर जाता था।
मोहित के बाहर जाते ही करण अक्सर रीमा से मिलने उसके कमरे में पहुंच जाता।
कभी वह कहता कि मां ने बुलाया है।
कभी किसी घरेलू सामान का बहाना बनाता।
लेकिन रीमा को धीरे-धीरे उसका व्यवहार अजीब लगने लगा था।
एक दिन उसने करण से साफ कह दिया—
"तुम्हें कोई काम हो तो बाहर से बोल दिया करो। बार-बार कमरे में आने की जरूरत नहीं है।"
करण कुछ नहीं बोला।
बस इतना कहा—
"भाभी, जब असली वजह पता चलेगी तो शायद आप खुद मुझे बुलाएंगी।"
रीमा उसकी बात समझ नहीं पाई।
उस रात करण के हाथ में था एक पुराना मोबाइल
मोहित उस दिन भी शहर से बाहर था।
रात करीब साढ़े दस बजे करण अचानक रीमा के कमरे के दरवाजे पर पहुंचा।
उसके हाथ में एक पुराना मोबाइल था।
रीमा ने पूछा—
"अब क्या हुआ?"
करण ने मोबाइल उसकी तरफ बढ़ाते हुए कहा—
"इसमें कुछ है जो आपको देखना चाहिए।"
रीमा ने मोबाइल लेने से इनकार कर दिया।
करण ने कहा—
"यह भैया से जुड़ा है।"
मोहित का नाम सुनते ही रीमा रुक गई।
उसने मोबाइल हाथ में ले लिया।
स्क्रीन पर एक पुराना वीडियो खुला था।
वीडियो में मोहित दिखाई दे रहा था।
लेकिन वह अकेला नहीं था।
वीडियो में दिख रहा था एक सुनसान गोदाम
वीडियो करीब चार साल पुराना था।
मोहित एक पुराने गोदाम के बाहर खड़ा था।
उसके सामने दो आदमी मौजूद थे।
तीनों के बीच किसी बात को लेकर बहस हो रही थी।
आवाज साफ नहीं थी।
फिर वीडियो अचानक बंद हो गया।
रीमा ने करण से पूछा—
"यह क्या है?"
करण ने जवाब दिया—
"भैया ने कहा था कि वह उस रात वहां गए ही नहीं थे।"
रीमा चौंक गई।
"तो यह वीडियो?"
करण बोला—
"यही पता करने की कोशिश कर रहा हूं।"
फिर करण ने एक और बात बताई
चार साल पहले उस गोदाम में चोरी हुई थी।
कंपनी का काफी सामान गायब हुआ था।
मोहित उस समय उसी कंपनी में काम करता था।
मामला कुछ दिनों तक चला और फिर बंद हो गया।
लेकिन करण को हाल ही में अपने पुराने फोन का बैकअप मिला था।
उसमें यह वीडियो मौजूद था।
उसे शक था कि उस चोरी के पीछे कोई बड़ा मामला था।
और मोहित शायद पूरी सच्चाई जानता था।
तभी बाहर गेट खुलने की आवाज आई
रीमा और करण दोनों चौंक गए।
करण ने तुरंत मोबाइल बंद किया।
बाहर कार आकर रुकी थी।
रीमा ने खिड़की से देखा।
मोहित वापस आ चुका था।
वह बिना किसी सूचना के रात में घर लौट आया था।
रीमा ने दरवाजा खोला।
मोहित ने अंदर आते ही करण को देखा।
उसके चेहरे पर चिंता साफ दिखाई दी।
उसने पूछा—
"तुम यहां क्या कर रहे हो?"
करण ने कोई जवाब नहीं दिया।
मोहित ने मोबाइल देखते ही सब समझ लिया
उसकी नजर रीमा के हाथ में पकड़े मोबाइल पर गई।
मोहित का चेहरा बदल गया।
उसने कहा—
"यह तुम्हें कहां से मिला?"
रीमा ने पूछा—
"तुमने चार साल पहले मुझसे झूठ क्यों बोला था?"
मोहित चुप रहा।
कमरे में कुछ सेकंड तक बिल्कुल सन्नाटा रहा।
फिर मोहित ने कहा—
"क्योंकि अगर मैंने सच बताया होता तो शायद हमारा पूरा परिवार खतरे में पड़ जाता।"
चार साल पुराना अपराध
मोहित ने बताया कि उस रात वह गोदाम में चोरी करने नहीं गया था।
वह कंपनी में हो रही एक बड़ी गड़बड़ी का पता लगाने गया था।
कंपनी के कुछ कर्मचारी सामान बाहर बेच रहे थे।
मोहित ने इसकी जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारी को देने की कोशिश की थी।
लेकिन उसे धमकी मिली।
उसने मामला पुलिस तक पहुंचाने की कोशिश की, मगर परिवार को धमकी मिलने के बाद पीछे हट गया।
फिर वीडियो चार साल तक छिपा क्यों रहा?
करण ने पूछा—
"अगर तुम निर्दोष थे तो वीडियो क्यों नहीं दिया?"
मोहित ने कहा—
"क्योंकि वीडियो में जिन लोगों के चेहरे हैं, उनमें से एक आज भी शहर में है।"
रीमा ने पूछा—
"कौन?"
मोहित ने एक नाम बताया।
रीमा उसे सुनकर चौंक गई।
वह व्यक्ति उनके परिवार का बेहद करीबी परिचित था।
वह अक्सर उनके घर आता था।
लेकिन असली मोड़ अभी बाकी था
करण ने कहा—
"भैया, वीडियो का पूरा हिस्सा मेरे पास नहीं है।"
मोहित ने पूछा—
"मतलब?"
करण ने बताया कि उसके फोन में सिर्फ पहला हिस्सा था।
वीडियो के बाकी हिस्से की एक प्रति किसी दूसरे फोन में थी।
वह फोन पिछले चार साल से बंद पड़ा था।
करण ने कहा—
"अगर वह फोन मिल गया तो हमें पता चल जाएगा कि उस रात गोदाम में असल में क्या हुआ था।"
फोन कहां था?
मोहित ने कुछ सेकंड सोचा।
फिर उसे याद आया कि उसके पुराने घर के स्टोर रूम में एक लोहे का संदूक रखा था।
तीनों वहां पहुंचे।
संदूक के अंदर पुराने कागज, कुछ रसीदें और एक पुराना मोबाइल मिला।
मोबाइल बंद था।
लेकिन उसमें वही वीडियो मौजूद था।
इस बार वीडियो पूरा था।
पूरी रिकॉर्डिंग ने सब बदल दिया
वीडियो के अंतिम हिस्से में एक व्यक्ति गोदाम से सामान निकालते दिखाई दे रहा था।
मोहित ने उस समय उसे रोकने की कोशिश की थी।
लेकिन वह व्यक्ति धमकी देकर वहां से चला गया।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि वीडियो में चोरी का सामान किस वाहन में ले जाया गया, यह भी दिखाई दे रहा था।
वाहन का नंबर साफ था।
करण ने तुरंत उसका रिकॉर्ड निकलवाने की कोशिश की।
वाहन का मालिक कौन था?
रिकॉर्ड देखकर तीनों के होश उड़ गए।
वाहन उस व्यक्ति के नाम पर था जो पिछले चार साल से मोहित के परिवार का करीबी बना हुआ था।
यानी मोहित का डर सही था।
अपराधी अभी भी उनके आसपास था।
पुलिस के सामने खुला पूरा मामला
मोहित ने इस बार चुप रहने के बजाय सारी रिकॉर्डिंग पुलिस को सौंप दी।
पुराने मामले की दोबारा जांच शुरू हुई।
वाहन के रिकॉर्ड, कंपनी के दस्तावेज और बैंक लेनदेन की जांच हुई।
कुछ ही समय में पुलिस को ऐसे सबूत मिले जिनसे पता चला कि चोरी एक व्यक्ति का काम नहीं थी।
कई लोग मिलकर कंपनी का सामान बाहर बेच रहे थे।
रीमा को आखिर समझ आया कि करण उसके कमरे में क्यों आता था
रीमा को लंबे समय से लगता था कि करण का उसके कमरे में बार-बार आना किसी गलत वजह से है।
लेकिन करण लगातार पुराने वीडियो और दस्तावेजों को जोड़ रहा था।
वह जानता था कि अगर सीधे मोहित से सवाल किया तो शायद मोहित फिर चुप हो जाएगा।
इसलिए उसने पहले सबूत जुटाए।
रीमा ने करण से कहा—
"तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया?"
करण बोला—
"क्योंकि मुझे डर था कि अगर गलत आदमी को पता चल गया कि हमारे पास सबूत हैं, तो वह सब कुछ खत्म कर देगा।"
आखिरी खुलासा
जांच में पता चला कि चार साल पहले की चोरी के मामले में मोहित पर भी शक किया गया था।
लेकिन उसके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं था।
अब पुराने वीडियो ने साबित कर दिया कि वह वास्तव में चोरी रोकने की कोशिश कर रहा था।
मामला अदालत तक पहुंचा।
कई सालों से दबा अपराध फिर सामने आ गया।
और परिवार के भीतर जो शक पैदा हो गया था, वह भी खत्म हुआ।
अंत
जिस देवर के बारे में रीमा को लगता था कि वह पति की गैरमौजूदगी में उसके कमरे में किसी गलत इरादे से आता है...
वही देवर असल में उसके पति से जुड़ा चार साल पुराना अपराध का सबूत तलाश रहा था।
रीमा ने मोहित से कहा—
"अगर तुमने चार साल पहले सच बता दिया होता तो शायद आज इतना बड़ा मामला नहीं बनता।"
मोहित ने कहा—
"मैं परिवार को बचाना चाहता था।"
रीमा ने जवाब दिया—
"कभी-कभी सच छिपाना परिवार को बचाता नहीं, बल्कि खतरे को और लंबा कर देता है।"
उस रात के बाद करण कभी बिना वजह रीमा के कमरे में नहीं गया।
लेकिन वह पुराना मोबाइल...
उस परिवार के लिए सिर्फ एक फोन नहीं था। उसमें चार साल से दबा वह सच कैद था, जिसे सामने आने में बहुत देर हो चुकी थी।
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