सागर: मध्य प्रदेश के सागर जिले के सुदूर गाँव पिपरिया से एक ऐसी वारदात सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। एक देवरानी ने अपनी जेठानी पर जादू-टोना का आरोप लगाया, जिसके बाद परिवार में ऐसा विवाद बढ़ा कि एक मासूम की जान चली गई। पुलिस जांच ने जब इस मामले की पड़ताल की, तो एक ऐसी साजिश का पता चला, जिसे सुनकर हर किसी के होश उड़ गए। यह कहानी है गीता देवी (28) और उसकी देवरानी संध्या (26) की।
जादू-टोना का आरोप, बढ़ा घरेलू कलह
गाँव वालों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों से गीता और संध्या के बीच खटपट चल रही थी। दरअसल, पिछले साल संध्या का बच्चा मृत पैदा हुआ था, जबकि गीता को उसी साल एक स्वस्थ बच्चा हुआ था। संध्या को इस बात की बहुत जलन थी।
संध्या ने गाँव में यह अफवाह फैलानी शुरू कर दी कि गीता ने जादू-टोना करके उसके बच्चे को मार डाला है और अपने बच्चे को बचा लिया है। गाँव के कुछ अंधविश्वासी लोगों ने इस बात को सच मान लिया और गीता को डायन कहने लगे।
गीता ने पति रामकिशन (32) से इस बारे में शिकायत की, लेकिन रामकिशन ने अपनी छोटी बहू संध्या का पक्ष लिया। उसने कहा, "तुम्हें क्या पता, शायद सच में कुछ हो।"
घटना वाली रात का काला अंधेरा
2 अगस्त 2026 की रात, गाँव में अचानक चीख-पुकार मच गई। गीता के कमरे से तेज चीखें सुनाई दीं। जब तक पड़ोसी दौड़े, गीता बेड पर खून से लथपथ पड़ी थी और उसकी साँसें थम चुकी थीं। उसके 2 साल के मासूम बच्चे सोनू का शव भी उसके बगल में मिला।
परिवार ने तुरंत इसे जादू-टोना करार दिया। संध्या ने कहा, "देखो, मैंने कहा था न कि वह डायन है। उसने जादू-टोना किया और उसके पाप का असर उसके बच्चे पर भी हुआ।"
परिवार ने अंतिम संस्कार की जल्दी शुरू कर दी, लेकिन ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी।
पुलिस को क्यों हुआ शक?
गाँव के चौकी इंचार्ज प्रेम सिंह को जब यह खबर मिली, तो वे तुरंत मौके पर पहुँचे। उन्होंने देखा कि गीता के सिर पर गहरी चोट थी और उसके गले पर भी निशान थे। बच्चे सोनू के शरीर पर भी कई चोट के निशान थे, जो किसी हिंसक हमले के संकेत थे।
पुलिस को यह बात अजीब लगी कि परिवार बिना पोस्टमार्टम के अंतिम संस्कार करना चाहता था। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और मामले की गहन जांच शुरू की।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बदली दिशा
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने जब आई तो पुलिस के होश उड़ गए। डॉक्टरों ने साफ कहा कि गीता की मृत्यु सिर पर किसी भारी वस्तु से किए गए कई वार के कारण हुई है, जबकि बच्चे सोनू की मृत्यु गला घोंटने से हुई है। यह जादू-टोना नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई हत्या थी।
पुलिस अब उस व्यक्ति की तलाश करने लगी, जिसने इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया था।
चौंकाने वाला खुलासा - देवरानी की साजिश
पुलिस ने पूरे परिवार से पूछताछ शुरू की। सबसे पहले पुलिस की नज़र संध्या (देवरानी) पर गई, क्योंकि वह पिछले कुछ समय से गीता के खिलाफ अफवाहें फैला रही थी। जब पुलिस ने संध्या से सख्ती से पूछताछ की, तो वह टूट गई।
संध्या ने पुलिस को बताया कि उसने अपने पति मुरली (30) के साथ मिलकर यह साजिश रची थी। दरअसल, संध्या को डर था कि अगर गीता का बच्चा जीवित रहा तो सारी जायदाद उसी के नाम हो जाएगी। इसके अलावा, संध्या को गीता से इस बात की भी जलन थी कि गीता का पति रामकिशन घर का बड़ा बेटा होने के कारण सारी संपत्ति पर अधिकार जताता था।
संध्या ने बताया, "मैंने अपने पति मुरली को कहा कि अगर हमने गीता और उसके बच्चे को नहीं मारा, तो हमारा भविष्य अंधकारमय है। मुरली ने रात में चुपचाप जाकर गीता के सिर पर लोहे के सरिया से कई वार किए और बच्चे का गला घोंट दिया। फिर हमने सबको बताया कि यह जादू-टोना का परिणाम है।"
पति रामकिशन का रोल
जब पुलिस ने गीता के पति रामकिशन से पूछताछ की, तो उसने बताया कि उसे पहले से ही अपनी बहू संध्या और मुरली की योजना के बारे में पता था! उसने कहा, "मुझे डर था कि अगर मैंने कुछ कहा, तो मुझे भी मार देंगे। मैंने चुप रहना ही बेहतर समझा।"
पुलिस ने रामकिशन को भी षड्यंत्र का साथी मानते हुए गिरफ्तार कर लिया।
पीड़ित परिवार का बयान
गीता के पिता रामनरेश ने रोते हुए कहा, "मेरी बेटी बेकसूर थी। उस पर जादू-टोना का झूठा आरोप लगाकर उसे मार दिया गया। मेरा पोता भी मारा गया। इन दरिंदों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।"
कानूनी कार्रवाई
सागर पुलिस ने संध्या, मुरली और रामकिशन को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 (हत्या), धारा 108 (षड्यंत्र) और बाल हत्या की धाराओं के तहत गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस अधीक्षक (SP) विकास कुमार ने कहा, "यह एक सुनियोजित हत्या थी, जिसमें देवरानी ने अपनी जेठानी को जादू-टोना का झूठा आरोप लगाकर उसकी हत्या की। हम अदालत में पुख्ता सबूत पेश करेंगे और आरोपियों को कड़ी सजा दिलवाएँगे।"
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