प्रेमिका ने प्रेमी से कहा—“आज रात मेरे घर मत आना”... सुबह उसी घर से मिली एक ऐसी चीज, जिसने पूरे मोहल्ले को हिला दिया



रात के करीब 10 बजकर 40 मिनट हुए थे।

आरव अपनी बाइक लेकर नंदिनी के घर जाने ही वाला था कि उसके मोबाइल पर संदेश आया।

नंदिनी का संदेश था—

"आज रात मेरे घर मत आना। चाहे कुछ भी हो जाए, यहां मत आना।"

आरव ने तुरंत फोन किया।

फोन बंद था।

उसने दोबारा कॉल की।

फिर भी कोई जवाब नहीं।

आरव और नंदिनी पिछले तीन साल से एक-दूसरे को जानते थे। दोनों शादी करना चाहते थे, लेकिन नंदिनी के परिवार को यह रिश्ता मंजूर नहीं था।

पिछले कुछ दिनों से नंदिनी काफी परेशान भी थी।

लेकिन आज उसके संदेश में डर साफ दिखाई दे रहा था।

आरव ने फिर संदेश भेजा—

"क्या हुआ है? मुझे बताओ।"

कुछ देर बाद जवाब आया—

"अगर मुझ पर भरोसा करते हो तो आज रात यहां मत आना। सुबह सब समझ जाओगे।"

इसके बाद फोन बंद हो गया।


सुबह नंदिनी के घर के बाहर भीड़ जमा थी

अगली सुबह आरव की आंख एक पड़ोसी के फोन से खुली।

उसने कहा—

"तुम्हें पता है नंदिनी के घर के बाहर पुलिस खड़ी है?"

आरव के हाथ से मोबाइल लगभग गिर गया।

वह तुरंत वहां पहुंचा।

घर के बाहर लोगों की भीड़ थी।

मुख्य दरवाजे पर पुलिस की सील लगी थी।

आरव ने पूछा—

"क्या हुआ है?"

किसी को पूरी जानकारी नहीं थी।

लोग सिर्फ इतना बता रहे थे कि घर के अंदर से एक पुराना लोहे का संदूक मिला है।

लेकिन नंदिनी और उसके परिवार का कोई सदस्य घर में नहीं था।

आरव का दिल बैठ गया।


नंदिनी आखिर गई कहां थी?

आरव ने उसके मोबाइल पर फोन किया।

फोन बंद था।

तभी एक पुलिसकर्मी ने उससे पूछा—

"आप नंदिनी को जानते हैं?"

आरव ने हां कहा।

पुलिसकर्मी ने कहा—

"तो आपको शायद यह पता हो कि वह कल रात कहां गई थी।"

आरव ने तुरंत कहा—

"नहीं। उसने मुझे सिर्फ इतना कहा था कि मैं उसके घर न आऊं।"

पुलिसकर्मी ने उसकी तरफ गौर से देखा।

फिर बोला—

"यही बात हमें भी परेशान कर रही है।"


संदूक में मिला पहला सुराग

पुलिस ने घर के अंदर से एक पुराना संदूक बरामद किया था।

उसमें कुछ कपड़े, पुराने कागज और कई तस्वीरें थीं।

लेकिन एक तस्वीर देखकर आरव सन्न रह गया।

तस्वीर में नंदिनी करीब दस साल की थी।

उसके साथ एक आदमी खड़ा था।

आरव ने उसे पहचान लिया।

वह नंदिनी का चाचा था।

लेकिन वह आदमी अब इस दुनिया में नहीं था।

उसकी मौत करीब आठ साल पहले हो चुकी थी।


तस्वीर के पीछे लिखा था एक नाम

तस्वीर पलटने पर पीछे लिखा था—

"जिस दिन सच सामने आएगा, नंदिनी को यह संदूक जरूर खोलना होगा।"

नीचे एक तारीख थी।

18 अक्टूबर 2016

आरव ने पुलिसकर्मी से पूछा—

"क्या नंदिनी के चाचा की मौत सामान्य थी?"

पुलिसकर्मी ने जवाब नहीं दिया।

बस इतना कहा—

"पुरानी फाइल फिर से खुल सकती है।"


आठ साल पुरानी मौत का राज

नंदिनी के चाचा की मौत को परिवार ने आत्महत्या बताया था।

लेकिन संदूक में मिले दस्तावेज कुछ और कहानी बता रहे थे।

एक पुराने कागज में लिखा था कि उनकी मृत्यु से कुछ दिन पहले उन्होंने किसी अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ शिकायत करने की कोशिश की थी।

शिकायत कभी दर्ज नहीं हुई।

आरव को अब समझ आ रहा था कि नंदिनी पिछले कुछ दिनों से इतनी परेशान क्यों थी।

उसने शायद यह संदूक खोज लिया था।


फिर पुलिस को मिला एक छोटा रिकॉर्डर

संदूक के नीचे एक पुराना रिकॉर्डिंग उपकरण रखा था।

उसमें सिर्फ एक रिकॉर्डिंग थी।

आवाज नंदिनी के चाचा की थी।

उन्होंने कहा था—

"अगर यह रिकॉर्डिंग किसी दिन नंदिनी तक पहुंचे, तो उसे अपने परिवार में किसी पर भी आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए।"

रिकॉर्डिंग यहीं खत्म हो गई।

कमरे में सन्नाटा छा गया।

आरव ने पुलिस की तरफ देखा।

"क्या आपको लगता है नंदिनी खतरे में है?"

इस बार पुलिस अधिकारी ने साफ कहा—

"हमें यही डर है।"


अचानक आया नंदिनी का संदेश

करीब दोपहर को आरव के मोबाइल पर एक संदेश आया।

नंबर अनजान था।

संदेश में लिखा था—

"मुझे ढूंढने की कोशिश मत करना। मैंने जो देखा है, उसके बाद वापस घर जाना सुरक्षित नहीं है।"

आरव ने तुरंत जवाब दिया—

"तुम कहां हो?"

कुछ सेकंड बाद सिर्फ एक जवाब आया—

"पुरानी मिल।"

इसके बाद नंबर बंद हो गया।


पुरानी मिल में मिला नंदिनी का बैग

शहर से बाहर एक बंद पड़ी मिल थी।

आरव पुलिस के साथ वहां पहुंचा।

अंदर काफी अंधेरा था।

एक कमरे के कोने में नंदिनी का बैग पड़ा था।

बैग में उसका मोबाइल, कुछ दस्तावेज और वही पुरानी तस्वीर थी।

लेकिन नंदिनी वहां नहीं थी।

आरव की नजर फर्श पर पड़े एक कागज पर गई।

उस पर लिखा था—

"जिस आदमी को तुम सबसे ज्यादा अपना समझते हो, वही इस कहानी की आखिरी कड़ी है।"

आरव ने तुरंत नंदिनी के परिवार के लोगों के बारे में सोचना शुरू किया।


असली शक किस पर था?

जांच में पता चला कि नंदिनी के चाचा की मृत्यु से पहले उनके साथ आखिरी बार मिलने वाला व्यक्ति परिवार का ही एक करीबी सदस्य था।

वही व्यक्ति पिछले आठ साल से परिवार के सभी फैसलों में सबसे आगे रहता था।

उसने नंदिनी के चाचा की संपत्ति से जुड़े कई दस्तावेज भी संभाले थे।

पुलिस ने उससे पूछताछ शुरू की।

पहले उसने सब कुछ नकार दिया।

लेकिन पुराने बैंक रिकॉर्ड सामने आने के बाद कहानी बदलने लगी।


नंदिनी आखिर कहां थी?

तीन दिन बाद नंदिनी खुद पुलिस स्टेशन पहुंची।

आरव उसे देखते ही उसकी तरफ बढ़ा।

"तुमने मुझे क्यों नहीं बताया?"

नंदिनी की आंखों में आंसू थे।

उसने कहा—

"क्योंकि मुझे डर था कि अगर मैंने तुम्हें बताया तो तुम भी इस मामले में फंस जाओगे।"

उसने बताया कि उसने अपने चाचा की पुरानी डायरी ढूंढ ली थी।

डायरी में ऐसे लेनदेन और संपत्ति के कागजों का जिक्र था, जिनसे पता चलता था कि वर्षों पहले परिवार की जमीन हड़पने की कोशिश की गई थी।

उसके चाचा ने इसका विरोध किया था।


सबसे बड़ा खुलासा

नंदिनी ने बताया कि उसे शक था कि उसके चाचा की मौत आत्महत्या नहीं थी।

वह रात उसने इसलिए आरव को घर आने से रोका था क्योंकि उसे पता चल गया था कि कोई उसके पीछे लगा हुआ है।

वह अपने कुछ दस्तावेज सुरक्षित जगह पर रखने के लिए घर से निकली थी।

और पुलिस को मिला संदूक उसी का था।

उसने ही उसे घर से छिपाकर रखा था ताकि अगर उसके साथ कुछ हो जाए तो सबूत मिल सकें।


लेकिन नंदिनी ने आखिर आरव को सच क्यों नहीं बताया?

नंदिनी ने कहा—

"क्योंकि मुझे पता था कि तुम मुझे बचाने के लिए कुछ भी करोगे।"

आरव चुप रहा।

नंदिनी ने आगे कहा—

"और मुझे डर था कि इसी वजह से तुम्हें भी निशाना बनाया जा सकता है।"

जांच आगे बढ़ी।

पुराने दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड के आधार पर मामले की दोबारा जांच शुरू हुई।

कई साल पुराना राज धीरे-धीरे सामने आने लगा।


आखिरी सवाल अब भी बाकी था

नंदिनी ने आरव से कहा—

"उस रात मैंने तुम्हें जो संदेश भेजा था, उसमें सिर्फ एक बात सच थी।"

आरव ने पूछा—

"क्या?"

नंदिनी बोली—

"मुझे सच में डर था कि अगर तुम उस रात मेरे घर आ गए होते... तो शायद हम दोनों आज यहां नहीं होते।"

आरव ने उसका हाथ पकड़ लिया।

दोनों कुछ देर चुप रहे।

उस रात का संदेश अब भी आरव के फोन में सुरक्षित था।

"आज रात मेरे घर मत आना।"

उस समय उसे लगा था कि नंदिनी उससे दूर जा रही है।

लेकिन असल में...

वह उसे एक ऐसे अपराध से दूर रखने की कोशिश कर रही थी, जिसका राज उनके परिवार में वर्षों से दबा हुआ था।

और पुराना संदूक सिर्फ एक सबूत नहीं था।

वह उस रात की शुरुआत थी, जिसने आठ साल पुराने अपराध की पूरी कहानी फिर से खोल दी।

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