एक दिन वहाँ काम करने वाली महिलाओं में से एक ने उसे कहा की सरदार को तुम पर भरोसा नहीं है इसलिए उन्होंने तुम्हें इतनी भारी पाजेब बनवाकर पहनाई हैं


 एक बार दो कबीलों के बीच झगड़ा हुआ और जीतने वाले कबीले के सरदार को हारने वाले कबीले की एक लड़की(रूपमती) बहुत पसंद आ गई। तो जीतने के बाद वापस जाते हुए उसने रूपमती को उठवा लिया और अपनी एक हवेली में उसे उसके रहने का इंतज़ाम करवाया। वहाँ उसके पैरो में 2-2 किलो चाँदी की पाजेब पहना दी ताकि उसकी झंकार से पता रहे वो कहाँ है और वो अगर भागना भी चाहे तो उसके वजन से वहाँ से भाग ना सके। और उसके सेवा में कुछ महिलाओं को लगा दिया ताकि वो उसका कम भी कर सकें और साथ साथ उसपर नज़र भी रखें।

रूपमती का स्वभाव बहुत ही अच्छा था इसलिए वो वहाँ काम करने वाली महिलाओं के साथ बहुत ही जल्दी घुल मिल गई। एक दिन वहाँ काम करने वाली महिलाओं में से एक ने उसे कहा की सरदार को तुम पर भरोसा नहीं है इसलिए उन्होंने तुम्हें इतनी भारी पाजेब बनवाकर पहनाई हैं ताकि तुम यहाँ से भाग ना सको। बाक़ी महिलाओं ने भी उसकी बात का समर्थन किया। इस पर रूपमती ने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है सरदार को मुझपर भरोसा है इसीलिए उन्होंने इतनी सारी चाँदी मुझे दे रखी है। अगर भरोसा ना होता तो भला कोई इतनी चाँदी किसी को क्यूँ देगा..?

रूपमती को सरदार की हवेली में आए कुछ महीने बीत गये और धीरे धीरे सरदार को भी उसपर भरोसा हो गया। और इसी विश्वास के साथ उसने पाजेब उतरवा दी कि अब रूपमती वहाँ से नहीं भागेगी। लेकिन रूपमती को लगा की अब सरदार को मुझपर भरोसा नहीं रहा इसलिए सरदार ने अपनी चाँदी की पाजेब मुझसे वापस ले ली। यही बात रूपमती ने अपनी एक भरोसेमंद सेवादार को भी कही। सेवादार ने उसे समझाया भी की ऐसा नहीं है बल्कि अब जाकर तो कहीं सरदार को तुमपर भरोसा हुआ इसीलिए उन्होंने तुम्हारा पैरो की बेड़ियाँ निकालकर तुम्हें मुक्त किया है।

लेकिन रूपमती सोचती है की ऐसी जगह रहकर क्या फ़ायदा जहां उसपर कोई विश्वास ही नहीं करता। और उसी रात वो मौक़ा देखकर वहाँ से निकल जाती है। वो पाजेब जो सरदार के अविश्वास की प्रतीक थी वही रूपमती के लिए विश्वास की निशानी थी

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