कमला को पिछले कुछ महीनों से अपनी बहू रितु के व्यवहार पर शक होने लगा था। रितु शादी के बाद से घर में सामान्य रहती थी, लेकिन पिछले कुछ समय से वह अक्सर अपना कमरा बंद रखती और किसी को अंदर नहीं आने देती। कमला ने कई बार पूछा भी कि कमरे में ऐसा क्या है, लेकिन रितु हर बार कहती कि बस निजी सामान रखा है।
कमला ने इस बात को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन एक रात रितु के कमरे से अचानक कुछ गिरने की तेज आवाज आई। कमला वहां पहुंचीं तो रितु कमरे के दरवाजे पर खड़ी थी। कमला ने अंदर देखने की कोशिश की, लेकिन रितु ने तुरंत दरवाजा बंद कर दिया।
अगली सुबह रितु किसी काम से बाजार गई हुई थी। कमला कमरे की सफाई करने पहुंचीं। अलमारी के नीचे उन्हें एक छोटा सा काला बैग दिखाई दिया। बैग पहले उन्होंने कभी नहीं देखा था। उन्होंने उसे बाहर निकाला तो अंदर कुछ पुराने कागज, एक मोबाइल फोन और कई चाबियां मिलीं।
कमला घबरा गईं। उन्हें समझ नहीं आया कि ये सामान रितु के कमरे में क्यों रखा था।
उन्होंने अपने बेटे अजय को फोन किया। अजय उस समय ऑफिस में था। कमला ने उसे सब बताया तो उसने कहा कि बिना रितु से पूछे किसी निष्कर्ष पर मत पहुंचना।
लेकिन उसी समय कमला की नजर एक कागज पर पड़ी। उस पर उनके दिवंगत पति का नाम लिखा था।
कमला के हाथ कांपने लगे।
उनके पति की मृत्यु करीब छह साल पहले हुई थी। परिवार को हमेशा यही बताया गया था कि उनके कारोबार में लगातार नुकसान के कारण उन्होंने सब कुछ बंद कर दिया था। लेकिन अब उसी पुराने कारोबार से जुड़े कागज रितु के कमरे में मिले थे।
अजय घर पहुंचा तो कमला ने पूरा बैग उसके सामने रख दिया। दोनों ने कागज देखने शुरू किए। उनमें कुछ बैंक रसीदें और जमीन से जुड़े दस्तावेज थे। एक कागज पर ऐसी रकम दर्ज थी जिसके बारे में अजय ने कभी अपने पिता से नहीं सुना था।
अजय ने रितु के लौटने का इंतजार किया।
शाम को रितु घर पहुंची तो उसने कमरे में रखा बैग देखा और तुरंत समझ गई कि उसका राज खुल चुका है। अजय ने उससे पूछा, "ये सब क्या है?"
रितु कुछ देर तक चुप रही। फिर उसने कहा, "मैं आपको यह बताना चाहती थी, लेकिन मुझे सही समय नहीं मिल रहा था।"
अजय ने पूछा, "ये कागज मेरे पिता के हैं?"
रितु ने सिर हिला दिया।
उसने बताया कि करीब चार महीने पहले उसे घर की पुरानी अलमारी में एक चिट्ठी मिली थी। चिट्ठी उसके ससुर ने किसी ऐसे व्यक्ति के नाम लिखी थी जिसका नाम परिवार में किसी ने कभी नहीं लिया था। उसमें पुराने कारोबार में हुई बड़ी रकम की गड़बड़ी का जिक्र था।
रितु ने अकेले उस मामले की जानकारी जुटानी शुरू कर दी थी।
कमला ने गुस्से में पूछा, "तो तुमने हमें बताया क्यों नहीं?"
रितु ने कहा, "क्योंकि मुझे डर था कि अगर गलत आदमी को इसकी खबर हो गई तो सारे कागज गायब हो जाएंगे।"
अजय ने बैग में रखा मोबाइल उठाया। फोन बंद था। उसने उसे चार्ज किया तो उसमें सिर्फ कुछ पुराने नंबर और तस्वीरें थीं।
एक तस्वीर देखकर अजय चौंक गया।
तस्वीर में उसके पिता के साथ एक आदमी खड़ा था जिसे वह पहचानता था। वह विक्रम था, जो कभी उसके पिता के कारोबार में हिसाब-किताब संभालता था।
अजय ने रितु से पूछा, "तुम विक्रम से मिली थीं?"
रितु ने कहा, "हां।"
कमला यह सुनकर और परेशान हो गईं।
रितु ने बताया कि विक्रम ने ही उसे पुराने कारोबार के कुछ दस्तावेज दिए थे। वह वर्षों से दूसरे शहर में रह रहा था और उसके पास पुराने खातों की जानकारी थी।
अजय ने तुरंत विक्रम को फोन किया।
विक्रम ने मिलने से पहले ही कहा, "फोन पर बात मत करो। कल सुबह पुराने गोदाम के पास मिलो।"
अगले दिन अजय, रितु और कमला की जानकारी के बिना विक्रम से मिलने पहुंचे। विक्रम ने उन्हें बताया कि अजय के पिता ने अपनी मृत्यु से कुछ दिन पहले उसे कुछ दस्तावेज सुरक्षित रखने के लिए दिए थे। उन दस्तावेजों में ऐसे लेनदेन दर्ज थे जिनसे पता चलता था कि कारोबार की रकम धीरे-धीरे दूसरे खातों में भेजी गई थी।
अजय ने पूछा, "तो आपने इतने साल तक किसी को क्यों नहीं बताया?"
विक्रम ने कहा, "क्योंकि मुझे भी धमकी मिली थी।"
वह अभी अपनी बात पूरी कर ही रहा था कि उसे एक अज्ञात नंबर से फोन आया। फोन उठाते ही उसका चेहरा बदल गया। उसने कॉल काटकर कहा, "आप लोग यहां से चले जाइए। किसी को पता चल गया है कि ये कागज आपके पास हैं।"
अजय ने उसी समय पुलिस को सूचना देने का फैसला किया।
पुलिस ने दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए। पुराने बैंक रिकॉर्ड की जांच शुरू हुई। जांच में कुछ संदिग्ध लेनदेन सामने आए और पुराने कारोबार से जुड़े कई लोगों से पूछताछ की गई।
कुछ दिनों बाद पुलिस को पता चला कि जिस व्यक्ति के खाते में सबसे बड़ी रकम गई थी, उसका संबंध अजय के पिता के पुराने कारोबारी साझेदार से था। हालांकि सिर्फ बैंक रिकॉर्ड के आधार पर किसी को दोषी नहीं माना गया और जांच आगे जारी रही।
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा परेशान कमला थीं। उन्हें याद आया कि जिस बहू पर उन्हें चोरी-छिपे कुछ करने का शक था, वही पिछले कई महीनों से उनके पति के पुराने मामले की सच्चाई खोज रही थी।
कमला ने रितु से कहा, "मुझे लगा था तुम हमसे कुछ गलत छिपा रही हो।"
रितु ने जवाब दिया, "मैं सच छिपा रही थी, लेकिन वजह कुछ और थी।"
अजय ने कहा, "तुमने पहले बता दिया होता तो बात यहां तक नहीं पहुंचती।"
रितु ने सिर झुका लिया।
जांच के दौरान पुराने दस्तावेजों से यह तो सामने आया कि अजय के पिता के कारोबार में वित्तीय गड़बड़ी हुई थी, लेकिन उनकी मृत्यु को अपराध से जोड़ने वाला कोई निर्णायक सबूत नहीं मिला। पुलिस ने इस मामले में जल्दबाजी से कोई निष्कर्ष नहीं निकाला।
कमला को उस दिन पहली बार एहसास हुआ कि शक और सच्चाई के बीच कितना बड़ा फर्क हो सकता है। जिस कमरे की तलाशी उन्हें अपनी बहू का छिपा हुआ राज जानने के लिए जरूरी लगी थी, उसी कमरे से उनके परिवार के छह साल पुराने मामले की जांच का रास्ता खुल गया।
लेकिन पुलिस के हाथ लगे आखिरी दस्तावेज ने एक नया सवाल जरूर खड़ा कर दिया था—अगर अजय के पिता ने ये कागज इतने साल पहले सुरक्षित रखे थे, तो फिर किसी ने उन्हें दोबारा हासिल करने की कोशिश क्यों शुरू कर दी थी?
मामले की जांच जारी रही और परिवार को अब उस पुराने कारोबार की पूरी सच्चाई सामने आने का इंतजार था।
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