एक पुराने मकान में रहता था बृजमोहन—60 साल का एक विधुर। उसकी बहू नीलिमा (25) उसके बेटे अरुण की पत्नी थी। अरुण सरकारी कर्मचारी था और नौकरी के कारण एक अलग शहर में रहता था, कभी-कभी ही घर आता था। नीलिमा अकेले बृजमोहन के साथ रहती थी।
बृजमोहन की नज़र अपनी बहू पर बहुत पहले से थी। वह उसे हमेशा छूने की कोशिश करता, बात करते समय बहुत करीब आ जाता। एक दिन बृजमोहन ने नीलिमा को कमरे में बंद कर दिया और कहा कि अगर उसने किसी को बताया तो वह उसे मार देगा। नीलिमा बहुत डर गई, लेकिन उसने अपनी बुद्धि का इस्तेमाल किया। उसने बृजमोहन से कहा कि वह उसकी बात मान लेगी, लेकिन उसने वादा किया कि वह किसी को नहीं बताएगी।
कुछ हफ्तों बाद, नीलिमा ने अपना प्लान बनाया। उसने बृजमोहन को एक दिन गाँव के बाहर बुलाया और वहाँ उसने दिखावा किया कि वह किसी से बात कर रही है—जैसे वह किसी को फोन कर रही है और कह रही है कि उसके पास बृजमोहन की गुप्त बातों के सबूत हैं। बृजमोहन ने सुना और डर गया। उसे लगा कि नीलिमा ने किसी को बता दिया है।
अगली सुबह बृजमोहन ने नीलिमा से पूछा, "तुमने किससे बात की?" नीलिमा ने कहा, "मैंने किसी को नहीं बताया, लेकिन अगर तुमने फिर मुझे परेशान किया, तो मैं उस सबूत को पुलिस को सौंप दूँगी।" बृजमोहन डर गया और फिर कभी उसने नीलिमा को परेशान नहीं किया। वह हमेशा उससे दूर-दूर रहता।
नीलिमा ने सबको चुप रखने का यह तरीका अपनाया और गाँव में सबको लगा कि सब ठीक है, लेकिन बृजमोहन अब अपनी बहू की आँखों में आँखें नहीं डाल पाता था।
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