अरे भाई, मानसागर झील के बीच में जो अपना जल महल खड़ा है न, वो कोई आज-कल की चिंदी-चोरी वाली नौसिखिया इंजीनियरिंग नहीं है, बल्कि राजा सवाई जयसिंह के टाइम का एकदम कड़क और नेक्स्ट-लेवल का जुगाड़ है! लोग सोचते हैं कि 5 में से 4 मंजिल पानी में डूबी हैं तो इसकी दीवारें गल क्यों नहीं रहीं, तो सुनो बॉस—असली जादू इसके 'सीक्रेट मसाले' में है। उस जमाने के मिस्त्रियों ने सीमेंट की जगह चूना (lime), सुरखी (पिसी हुई ईंट), गुड़, मेथी, गूगुल और बेलगिरी का ऐसा तगड़ा देसी केमिकल लोचा तैयार किया था कि पानी इसके अंदर घुस ही नहीं सकता। ये कोई आम गारा नहीं है भाई, ये एक ऐसा स्पेशल वॉटरप्रूफ चूना-प्लास्टर है जो पानी के कांटेक्ट में आकर सड़ने के बजाय और ज्यादा सॉलिड, मतलब एकदम चट्टान जैसा टाइट हो जाता है; यही वजह है कि सदियों से पानी में रहने के बाद भी दीवारों में एक रत्ती भर सीलन या खराबी नहीं आई है।
अब आते हैं इसके आर्किटेक्चर वाले स्वैग पर, जो एकदम कतई जहर है! महल की दीवारें कोई पतली-दुबली नहीं हैं, बल्कि पानी के नीचे की मंजिलों में इनको इतना चौड़ा, मोटा और भारी-भरकम बनाया गया है कि पानी का तगड़ा हाइड्रोस्टेटिक प्रेशर भी इनका बाल बांका नहीं कर पाता। ये पूरा ढांचा टॉप क्वालिटी के मजबूत गुलाबी बलुआ पत्थर (Pink Sandstone) से बना है, जिसकी फिटिंग इतनी परफेक्ट और टाइट की गई है कि पानी को कहीं से भी रिसने का कोई लूपहोल यानी चांस ही नहीं मिलता। ऊपर से दीवारों पर जो इस खास प्लास्टर की कई सारी लेयर्स (परतें) चढ़ाई गई हैं, वो पानी को सीधे पत्थरों तक पहुंचने ही नहीं देतीं; मतलब पानी बाहर का बाहर ही रह जाता है और अंदर की डूबी हुई मंजिलों में एकदम सूखा और कूल माहौल रहता है, मानो पानी खुद महल को सैल्यूट ठोक के साइड से निकल रहा हो!
लेकिन भाई, सिर्फ पुरानी टेक्निक ही नहीं, बल्कि बीच में जो इसका डैमेज कंट्रोल हुआ है, वो भी एकदम देखने लायक सीन है। साल 2000 के आस-पास जब झील के गंदे और एसिडिक पानी ने इसकी दीवारों को थोड़ा नुकसान पहुंचाना शुरू किया था, तब राजस्थान सरकार और क्राफ्ट्समैन ने मिलकर इसका ऐसा धांसू कायाकल्प किया कि सब देखते रह गए। हिस्टोरिकल एक्सपर्ट्स ने सालों की रिसर्च के बाद उसी पुरानी पारंपरिक तकनीक को दोबारा जिंदा किया, दीवारों की री-पॉइंटिंग की, सारी दरारें एकदम चकाचक भरीं, और पूरे ड्रेनेज सिस्टम को सेट किया ताकि पानी का फ्लो सही रहे। तो भाई, बात एकदम साफ़ है—वो पुराना धाकड़ चूने का मसाला, पत्थरों की गजब मोटाई और टाइम-टू-टाइम मिला हुआ ये तगड़ा मेंटेनेंस, इन तीनों के कॉम्बो ने जल महल को ऐसा अमर बना दिया है कि वो पानी के बीच में भी छाती ठोक के एकदम टकाटक खड़ा है!
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