मुझे अपनी बहू की एक आदत हमेशा अजीब लगती थी।
वह रात में सोते समय अपने कमरे का दरवाजा कभी बंद नहीं करती थी।
शुरुआत में मैंने सोचा कि शायद उसे घुटन होती होगी या कमरे में हवा आने के लिए दरवाजा खुला रखती होगी। लेकिन जब मैंने कई रातों तक यही देखा तो एक दिन खुद को रोक नहीं पाई।
मैंने उससे पूछा—
“बेटा, तुम रात में कमरे का दरवाजा बंद क्यों नहीं करती?”
वह कुछ पल मेरी तरफ देखती रही। फिर हल्की-सी मुस्कान के साथ बोली—
“मांजी… क्योंकि मुझे डर लगता है।”
मैं चौंक गई।
“किससे डर लगता है?”
इस सवाल पर उसकी मुस्कान गायब हो गई।
उसने नजरें नीचे कर लीं और बोली—
“बस… ऐसे ही।”
मैंने दोबारा पूछा, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया।
उस दिन के बाद मेरे मन में तरह-तरह के सवाल उठने लगे।
हमारा घर बड़ा नहीं था। मैं, मेरा बेटा और बहू ही रहते थे। मेरा बेटा अक्सर काम के सिलसिले में देर रात तक बाहर रहता था। ऐसे में बहू का अकेले कमरे में रहना मुझे भी चिंता में डालता था।
लेकिन उसके डर की वजह समझ नहीं आती थी।
एक रात अचानक मेरी नींद खुली।
घर में बिल्कुल सन्नाटा था।
मैंने घड़ी देखी—करीब दो बजे थे।
तभी मुझे बाहर से किसी के कदमों की हल्की आवाज सुनाई दी।
धीरे-धीरे कोई हमारे घर के गलियारे में चल रहा था।
मैं बिस्तर से उठकर दरवाजे के पास पहुंची।
बहू के कमरे का दरवाजा हमेशा की तरह खुला था।
अंदर मेरी बहू गहरी नींद में सो रही थी।
मैंने सोचा शायद मेरा भ्रम होगा।
लेकिन तभी किसी की परछाईं कमरे के दरवाजे के पास दिखाई दी।
मैं डरकर दीवार के पीछे छिप गई।
वह व्यक्ति धीरे से बहू के कमरे में गया।
उसने इधर-उधर देखा और फिर उसके बिस्तर के पास एक छोटी-सी चीज रख दी।
इसके बाद वह बिना आवाज किए वापस बाहर निकल गया।
मैं कुछ समझ पाती, उससे पहले वह अंधेरे में गायब हो चुका था।
मेरे हाथ-पैर कांप रहे थे।
मैं तुरंत बहू के कमरे में गई, लेकिन वह अब भी सो रही थी।
सुबह होते ही मैंने उसे रात की पूरी बात बताई।
वह कुछ देर तक चुप रही।
फिर उसने बिस्तर के पास रखी उस चीज को उठाया।
वह एक छोटा-सा लिफाफा था।
बहू ने लिफाफा खोला।
अंदर एक कागज था।
उसे पढ़ते ही उसका चेहरा पीला पड़ गया।
मैंने पूछा—
“क्या लिखा है इसमें?”
वह कुछ नहीं बोली।
मैंने उसके हाथ से कागज लिया।
उस पर सिर्फ एक लाइन लिखी थी—
“आज रात दरवाजा बंद मत करना।”
मेरे होश उड़ गए।
मैंने बहू की तरफ देखा—
“ये कौन कर रहा है?”
बहू की आंखों में आंसू आ गए।
उसने धीरे से कहा—
“मांजी, अब आपको मुझ पर विश्वास करना होगा।”
मैंने उसका हाथ पकड़ लिया।
“बेटा, मुझे सब सच-सच बताओ।”
तब उसने जो बताया, उसे सुनकर मैं अंदर तक हिल गई।
उसने कहा कि शादी के कुछ महीने बाद से ही उसे रात में अपने कमरे के बाहर किसी के चलने की आवाज सुनाई देने लगी थी।
कभी दरवाजे के पास कोई खड़ा रहता।
कभी खिड़की के बाहर से आवाज आती।
कभी सुबह उसके कमरे में ऐसी चीजें मिलतीं जिन्हें उसने वहां रखा ही नहीं था।
उसने कई बार मेरे बेटे से भी इस बारे में बात की थी, लेकिन उसे लगा कि शायद बहू डर रही है और घर में कोई नहीं आता।
एक रात बहू ने दरवाजा बंद कर लिया था।
आधी रात को दरवाजे पर तीन बार दस्तक हुई।
उसने दरवाजा नहीं खोला।
कुछ देर बाद खिड़की पर किसी ने जोर से हाथ मारा।
उस दिन से उसने दरवाजा खुला रखना शुरू कर दिया।
मैंने हैरानी से पूछा—
“लेकिन दरवाजा खुला रखने से तुम्हारा डर कम कैसे होता है?”
बहू ने कहा—
“क्योंकि मुझे लगता था कि अगर कोई अंदर आएगा तो कम से कम आपको आवाज सुनाई दे जाएगी।”
मेरी आंखों में आंसू आ गए।
मैंने उसे इतने दिनों तक अकेले डरते हुए देखा ही नहीं था।
लेकिन कहानी का सबसे बड़ा रहस्य अभी बाकी था।
हमने उस रात मिले लिफाफे को संभालकर रखा और अपने बेटे को सब बताया।
उसने घर के आसपास लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग निकलवाई।
रिकॉर्डिंग देखकर हम तीनों के होश उड़ गए।
रात में हमारे घर के पीछे से एक व्यक्ति अंदर आता दिखाई दे रहा था।
लेकिन वह कोई बाहरी आदमी नहीं था।
वह हमारे ही परिवार का एक ऐसा सदस्य था, जिस पर हमने कभी शक तक नहीं किया था।
असल वजह सामने आने के बाद पुलिस को जानकारी दी गई और मामले की जांच शुरू हुई।
तब पता चला कि बहू को डराने और घर में तनाव पैदा करने के पीछे संपत्ति से जुड़ा लालच था। मकसद यह था कि बहू डरकर मायके चली जाए और घर में उसके अधिकार को कमजोर किया जा सके।
बहू ने इतने दिनों तक सब कुछ सहते हुए भी घर नहीं छोड़ा था।
और वह दरवाजा इसलिए खुला रखती थी ताकि जरूरत पड़ने पर कोई उसकी मदद के लिए आवाज सुन सके।
मैंने अपनी बहू को गले लगा लिया।
मेरी आंखों से आंसू निकल रहे थे।
मैंने उससे कहा—
“बेटा, मुझे माफ कर देना। मुझे लगा था तुम कोई बात मुझसे छिपा रही हो। लेकिन तुम तो इतने दिनों से डर के साथ अकेली लड़ रही थीं।”
बहू ने कहा—
“मांजी, मुझे सिर्फ आपका विश्वास चाहिए था।”
उस दिन मुझे समझ आया कि घर में रहने वाले किसी इंसान के व्यवहार को देखकर तुरंत फैसला नहीं करना चाहिए।
कभी-कभी जो बात हमें अजीब लगती है, उसके पीछे कोई ऐसी मजबूरी छिपी होती है जिसे हम देख नहीं पाते।
बहू का खुला दरवाजा उसकी लापरवाही नहीं, बल्कि मदद के लिए खुला रखा गया रास्ता था।
और उस दिन के बाद हमारे घर का एक नियम बन गया—
किसी अपने के व्यवहार पर शक करने से पहले उसकी खामोशी को समझने की कोशिश करेंगे।
Post a Comment