दो यार थे एक का नाम था फंसाता सिंह और दुसरे का नाम था बचाता सिंह। जो फंसाता सिंह था वो व्यापार करता था और बचाता सिंह उसके साथ रहता था, फंसाता सिंह कमाता और बचाता सिंह खाता।
एक बार वे एक नए शहर में गए वहां कमरा ले लिया, बचाता सिंह ने फंसाता सिंह से कहा कि जा भाई अपनी दिहाड़ी कमा मैं ठाठ से सोता हूं क्योंकि मेरा यही काम है। वो सो गया और फंसाता सिंह एक थैली अशर्फियां लेकर घोड़े पर व्यापार के लिए सवार हो गया।
रास्ते में उसे एक कसाई मिल गया। कसाई ने कहा कि अरे रूको भाई साहब आप तो व्यापारी लग रहे हो? फंसाता सिंह बोला कि हां व्यापारी हूं और इसीलिए शहर आया हूं ।
कसाई बोला कि क्या ये घोड़ा बेचोगे? फंसाता सिंह बोला तू हाथ में तो मांस काटने का दरांत पकड़े हुए है तू इस घोड़े का क्या करेगा? कसाई ने कहा कि मैं अपना रोजगार किसी तरह चलाऊं तुझे क्या? तू बस इस घोड़े का दाम बता।।
फंसाता सिंह ने घोड़े के दाम 500 अशर्फियां बताए, कसाई ने तुरंत 500 अशर्फियां गिन दीं, तो फंसाता सिंह घोडे के उपर बंधी अपनी 1000 अशर्फियों की थैली खोलने लगा तो कसाई ने डांटते हुए कहा कि ये क्या कर रहे हो मैं इसे खरीद चुका हूं।
फंसाता सिंह ने कहा कि भाई सामान तो खोलूंगा ही? कसाई बोला कि अपनी इस विषय में कोई बात हुई थी क्या? अगर नहीं तो घोड़ा मैंने खरीद लिया उसके साथ का भी सामान मेरा है। दोनों की बात बढ़ गई तो कसाई ने कहा कि चलो पंचायत कर लेते हैं।
गांव का नाम चतुरपूर था जोकि उसी कसाई का गांव था जहां ज्यादातर चोर डाकू लूटेरे रहते थे। पंचायत में पंचों ने पूछा कि खरीदने से पहले क्या बात हुई थी? फंसाता सिंह ने पूरी बात बताई तो पंचायत ने फैसला सुनाया कि भाई जब तेरी अर्शफी थीं तो जेब में रखता। अब घोड़े के साथ ही सौदा हो गया है तो अशर्फियां कसाई की ही होंगी।
लूट-पीटकर फंसाता सिंह वापस लौटा तो बचाता सिंह ने कहा कि ऐसी बुरी शक्ल क्यों बना रखी है ऐसा क्या हो गया? फंसाता सिंह ने पुरा किस्सा सुनाकर कहा कि आए तो व्यापार करने थे लेकिन ये तो सारा गांव ही ठगों से भरा पड़ा है।
बचाता सिंह ने कहा कि भाई पच्चीस अशर्फियां मुझे दे दो आज मैं व्यापार करूंगा। फंसाता सिंह ने कहा कि जब तू व्यापार करेगा मतलब काम करेगा तो 25 क्या 500 लेजा।
बचाता सिंह 25 अशर्फियां लेकर उसी कल्लू कसाई के घर पहुंच गया, कसाई अपनी दुकान में काम कर रहा और चारों ओर कहीं बकरा कहीं सुअर के सिर लटक रहे थे। बचाता सिंह ने पूछा कि भाई एक सिर कितने का है? कसाई बोला कि एक सिर की कीमत एक अशर्फी है।
बचाता सिंह ने कहा कि कितने सिर बेच सकते हो? कसाई के पास 4 सिर थे लेकिन उसने कहा कि कितने भी जितने आप चाहो। बचाता सिंह ने तुरंत 25 अशर्फियां गिन दीं और कहा 25 सिर दे दे। कसाई ने गिने तो उसके पास केवल पांच सिर थे बोला कि मेरे पास तो बस पांच सिर हैं।
बचाता सिंह ने कहा कि भाई पहले तुमने कहा था कि कितने भी ले लो, अब बात से मुकर रहा है और मैंने ये थोड़ी कहा था कि बकरे और सुअर के सिर दे, मैंने सिर का भाव पुछा था अब चाहे तू अपना सिर दे या अपने परिवार वालों का, मगर मुझे 25 सिर लाकर दे।
कसाई समझ गया कि ये तेरा भी गुरु आ गया। इसी बीच बचाता सिंह ने कहा कि भाई चाहे पंचायत कर ले कुछ भी कर मुझे 25 सिर चाहिएं। कसाई पैरों में गिरा, रोया और आखिर घोड़ा भी दिया और अशर्फियां भी लौटाईं, बचाता सिंह उन्हें लेकर घर आ गया बोला कि भाई आज तो बचा लिया पर कल चौकस रहना।
फंसाता सिंह अगले दिन फिर घोड़े पर निकला और आगे जाकर रास्ता भूल गया, वहां एक काना आदमी बैठा था उसने पूछा कि काने भाई ये रास्ता किस तरफ जाता है? काने व्यक्ति ने कहा कि रास्ता तो बता दूंगा मगर मेरी वो आंख लौटा दे जो तुमने ली थी।
फंसाता सिंह ने कहा कि मैंने तुम्हारी आंख कब ली थी? काना बोला कि फिर तुझे कैसे पता चला कि मैं काना भाई हूं? जल्दी से मेरी वो आंख लौटा। आसपास भीड़ जमा हो गई काने ने कहा कि ये मेरी आंख नहीं लौटा रहा। लोगों ने कहा कि भाई आंख तो देनी पड़ेगी दे इसकी आंख।
फंसाता सिंह फिर फंस गया रात हो गई, मौजूद आदमी बोले या तो इसकी आंख दे या फिर 500 अशर्फी देनी पड़ेंगी 500 अशर्फी में ही तो आंख गिरवी रखी थी। इतने में ही अपने दोस्त को ढुंढते हुए बचाता सिंह वहां पहुंच गया और बोला कि क्या माजरा है?
काने ने कहा कि भाई इसने मेरी आंख गिरवी रखी थी और अब वापस देता नहीं आंख तो लौटानी पड़ेगी। बचाता सिंह ने कहा कि भाई ये कहां से देगा इसने तो वो आंख 1000 अशर्फियों में मुझे दे दी थी। तू 1000 अशर्फी दे मैं तेरी आंख लौटा दूंगा।
काने ने कहा कि अगर ना लौटा सके तो? बचाता सिंह ने कहा कि तो मैं 2000 अशर्फी दे दूंगा। काने ने 1000 अशर्फी गिन दीं तो बचाता सिंह बोला कि भाई मैं एक बार वहां जाता हुं जहां मैं ठहरा हुआ हूं तबतक मेरा दोस्त आपके पास बैठा है। ऐसा कहकर वो उसी कल्लू कसाई के वहां जा पहुंचा और उसकी बकरी की आंखों में से आठ आंख निकाल लाया।
आते ही उसने कहा कि काने भाई एक चाकू लाओ। काने ने कहा कि चाकू का क्या करोगे? बचाता सिंह बोला कि मेरे पास कई आदमियों ने अपनी आंख गिरवी रख रखी हैं और इन्हीं में से ढुंढनी है तेरी आंख कौनसी है? पहले तेरी जो आंख लगी हुई है उसे इस चाकू से निकालूंगा इन आंखों से मिलाउंगा पहचानने के बाद ही तय होगा कि काने की आंख कौनसी है।
बचाता सिंह जैसे ही चाकू लेकर काने की तरफ बढ़ा उसके पास पहले ही एक आंख थी उसने हाथ जोड़ लिए। बचाता सिंह ने कहा कि फिर ये 1000 अशर्फी छोड़नी पड़ेंगी। कुलमिलाकर बचाता सिंह 1000 अशर्फियां लेकर घर आ गया।
अगले दिन फंसाता सिंह बोला कि आज व्यापार के लिए निकलता हूं। तभी बचाता सिंह बोला कि नहीं भाई बार बार बचाता सिंह नहीं छुड़ा पाएगा अब तो अगली नगरी में चलते हैं।
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