पति के दोस्त का आधी रात पत्नी को फोन आया... उसने जो राज बताया, सुनकर पति के पैरों तले जमीन खिसक गई.....

रात के करीब 12:30 बजे थे।

अंजलि गहरी नींद में थी। तभी उसके मोबाइल पर लगातार दो बार फोन आया।

स्क्रीन पर नाम देखकर वह चौंक गई।

विक्रम कॉलिंग...

विक्रम उसके पति रोहित का सबसे करीबी दोस्त था।

इतनी रात को उसका फोन आना सामान्य नहीं था।

अंजलि ने फोन नहीं उठाया।

कुछ सेकंड बाद फिर फोन आया।

इस बार उसने कॉल रिसीव कर ली।

दूसरी तरफ कुछ पल तक खामोशी रही।

फिर विक्रम ने धीमी आवाज में कहा—

"भाभी... मुझे नहीं पता कि यह बात आपको बतानी चाहिए या नहीं, लेकिन अब चुप रहना शायद गलत होगा।"

अंजलि उठकर बैठ गई।

उसने पूछा—

"क्या हुआ?"

विक्रम ने कहा—

"रोहित के बारे में एक ऐसी बात है, जो आपको आज तक नहीं बताई गई।"

अंजलि के हाथ ठंडे पड़ गए।


"आप अकेली हैं?"

विक्रम ने अचानक पूछा।

अंजलि ने कमरे की तरफ देखा।

रोहित बगल में सो रहा था।

उसने कहा—

"हां। क्यों?"

विक्रम ने कहा—

"तो मेरी बात ध्यान से सुनिए। लेकिन अभी रोहित को मत बताइए कि मैंने फोन किया है।"

अंजलि के मन में शक पैदा हो गया।

उसने पूछा—

"आखिर बात क्या है?"

विक्रम ने सिर्फ इतना कहा—

"कल सुबह रोहित की अलमारी की सबसे नीचे वाली दराज खोलिए। वहां आपको एक नीला लिफाफा मिलेगा। उसे पढ़ने के बाद शायद आपको मेरी बात समझ आ जाएगी।"

अंजलि कुछ पूछ पाती, उससे पहले फोन कट गया।

पूरी रात उसकी आंखों में नींद नहीं आई।


सुबह खुला नीला लिफाफा

सुबह रोहित ऑफिस चला गया।

अंजलि काफी देर तक अलमारी के सामने खड़ी रही।

आखिर उसने नीचे वाली दराज खोली।

वहां कपड़ों के नीचे सचमुच एक नीला लिफाफा रखा था।

उस पर सिर्फ एक तारीख लिखी थी—

17 नवंबर 2019

अंजलि ने लिफाफा खोला।

अंदर एक पुरानी तस्वीर थी।

तस्वीर में रोहित और एक महिला खड़े थे।

महिला के चेहरे पर मुस्कान थी।

पीछे लिखा था—

"कुछ रिश्ते खत्म नहीं होते, सिर्फ छिपा दिए जाते हैं।"

अंजलि के हाथ कांपने लगे।

क्या रोहित का शादी से पहले किसी महिला से रिश्ता था?

अगर था तो विक्रम को यह सब कैसे पता था?

और उसने इतने सालों तक यह बात क्यों छिपाई?


अंजलि ने विक्रम को फिर फोन किया

उसने पूछा—

"यह महिला कौन है?"

विक्रम ने जवाब देने में काफी देर लगाई।

फिर बोला—

"मैं आपको सिर्फ इतना बता सकता हूं कि उसका नाम नेहा है।"

अंजलि ने पूछा—

"क्या रोहित का उससे रिश्ता था?"

विक्रम चुप रहा।

यही खामोशी अंजलि के लिए जवाब बन चुकी थी।

उसने उसी शाम रोहित से सवाल करने का फैसला किया।

लेकिन उससे पहले एक और घटना हो गई।


दरवाजे पर आई वही महिला

शाम करीब 6 बजे घर की घंटी बजी।

अंजलि ने दरवाजा खोला।

सामने एक महिला खड़ी थी।

अंजलि ने उसे तस्वीर में देखा था।

वह थी...

नेहा।

नेहा ने अंजलि को देखते ही कहा—

"आप अंजलि हैं?"

अंजलि ने धीरे से हां कहा।

नेहा ने कहा—

"मुझे आपसे रोहित के बारे में बात करनी है।"

अंजलि ने उसे अंदर बुलाया।

लेकिन नेहा ने घर में कदम रखने से पहले एक बात कही—

"मैं यहां आपका घर तोड़ने नहीं आई हूं। मैं तो उसे बचाने आई हूं।"

अंजलि कुछ समझ नहीं पाई।


नेहा ने जो बताया, उससे कहानी पलट गई

नेहा ने बताया कि छह साल पहले वह रोहित की सहकर्मी थी।

दोनों अच्छे दोस्त थे।

एक दिन नेहा के पिता पर भारी कर्ज हो गया।

रोहित ने उसकी मदद की।

लेकिन मदद करने के लिए उसने अपने दोस्त विक्रम से पैसे उधार लिए थे।

धीरे-धीरे मामला इतना बढ़ गया कि रोहित खुद आर्थिक परेशानी में आ गया।

फिर रोहित ने अपनी कुछ संपत्ति बेचकर नेहा के पिता का कर्ज चुका दिया।

अंजलि ने हैरानी से पूछा—

"लेकिन तस्वीर?"

नेहा ने कहा—

"वह तस्वीर उसी दिन की है जब रोहित ने आखिरी बार मेरे परिवार की मदद की थी।"

फिर उसने एक और बात कही।

"लेकिन असली वजह मैं नहीं हूं।"


असली राज विक्रम से जुड़ा था

नेहा ने बताया कि रोहित ने यह बात अपनी पत्नी से इसलिए छिपाई क्योंकि उसे डर था कि अंजलि इसे गलत समझेगी।

लेकिन विक्रम को सब पता था।

वास्तव में विक्रम ने ही रोहित को पैसे दिए थे।

और पिछले कई वर्षों से वह उस पैसे की वापसी की मांग भी नहीं कर रहा था।

अंजलि ने पूछा—

"तो फिर आधी रात को मुझे फोन क्यों किया?"

नेहा ने कहा—

"क्योंकि विक्रम को डर था कि अब यह बात किसी और तरीके से आपके सामने आएगी।"

अंजलि चौंक गई।

"किसी और तरीके से?"

नेहा ने मेज पर एक दूसरा लिफाफा रखा।


दूसरे लिफाफे में था असली खतरा

अंदर कुछ कानूनी कागज थे।

रोहित के नाम पर लिया गया एक पुराना कर्ज।

किसी ने उन दस्तावेजों के आधार पर रोहित को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया था।

वह व्यक्ति चाहता था कि रोहित अपने परिवार की एक जमीन उसके नाम कर दे।

रोहित पिछले कई महीनों से इस समस्या को अकेले संभाल रहा था।

विक्रम ने इसी वजह से अंजलि को सच बताने का फैसला किया।

अब अंजलि को समझ आया कि रोहित रात-रात भर फोन पर क्यों रहता था।

वह किसी दूसरी महिला से बात नहीं कर रहा था।

वह अपने परिवार को एक बड़े आर्थिक संकट से बचाने की कोशिश कर रहा था।


रोहित घर लौटा तो सब सामने था

उस रात रोहित घर आया।

अंजलि ने उसके सामने नीला लिफाफा रख दिया।

रोहित कुछ सेकंड तक उसे देखता रहा।

फिर उसकी आंखें झुक गईं।

"तुम्हें सब पता चल गया?"

अंजलि ने कहा—

"हां। लेकिन एक बात समझ नहीं आई। तुमने मुझसे यह सब छिपाया क्यों?"

रोहित ने कहा—

"मुझे लगा था कि अगर मैंने तुम्हें बताया तो तुम मेरी बात पर भरोसा नहीं करोगी।"

अंजलि ने जवाब दिया—

"मुझे झूठ से ज्यादा तकलीफ होती है।"

रोहित ने सिर झुका लिया।

कुछ देर बाद उसने कहा—

"अब से कुछ नहीं छिपाऊंगा।"

अंजलि ने उसका हाथ पकड़ लिया।


लेकिन कहानी का आखिरी मोड़

अगले दिन पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।

जांच में पता चला कि रोहित को ब्लैकमेल करने वाला व्यक्ति कोई बाहरी आदमी नहीं था।

वह उसी कंपनी का एक पुराना कर्मचारी था, जिसे रोहित ने कुछ महीने पहले नौकरी से निकाला था।

उसने पुराने दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल करके रोहित पर दबाव बनाने की कोशिश की थी।

मामला सामने आते ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

विक्रम ने अंजलि से कहा—

"मैंने सोचा था आप मुझे गलत समझेंगी।"

अंजलि ने मुस्कुराकर कहा—

"उस रात आपकी बात ने मुझे डरा जरूर दिया था, लेकिन शायद उसी वजह से मेरे पति का सबसे बड़ा राज मेरे सामने आ गया।"

विक्रम ने कहा—

"और वह राज आपकी सोच से बिल्कुल अलग निकला।"

अंजलि ने नीला लिफाफा उठाया और उसे हमेशा के लिए बंद कर दिया।

क्योंकि अब उसे समझ आ चुका था—

कभी-कभी किसी रिश्ते में दिखाई देने वाला शक असल में बेवफाई का नहीं, बल्कि किसी छिपी हुई परेशानी का संकेत होता है।

और कभी-कभी एक आधी रात का फोन पूरे परिवार को टूटने से बचा सकता है।

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