एक राजा जंगल में शिकार खेलते हुए भटक गया दो तीन दिन भटकने के बाद वह जंगल से बाहर निकला तो सामने एक जाट हल जोत रहा था, राजा उसके पास जाकर बोला कि भाई मैं बहुत भुखा हुं आप मुझे भोजन कराएं। जाट ने जेब से एक प्याज निकाला उसे मुक्का मारकर टुकड़े कर दिए और चार रोटी जोकि अपने लिए लाया था राजा को परोस दीं।
राजा बहुत भुखा था काफी थका हुआ था तो उसे वे साधारण रोटियां प्याज के साथ अमृत समान प्रतीत हुईं, खाना खाने के बाद राजा चलने कै तैयार हुआ और बोला कि भाई मैं आपके राज्य का राजा हूं और आज से तुम मेरे मित्र हो कभी किसी चीज की जरूरत पड़े तो राजमहल में आ जाना मैं तुम्हारी यथोचित मदद करूंगा।
कुछ समय बाद राज्य में अकाल पड़ा और अकाल भी ऐसा कि सात आठ वर्ष बारीश नहीं हुई, बिना बारिश खेती नहीं तो जाट के भूखे मरने की नौबत आ गई तभी उसे ख्याल आया कि राजा कहकर गया था कि हम मित्र हैं और जब भी जरूरत पड़े मेरे पास चले आना। अतः जाट राजमहल में पहुंच गया।
जाट को देखते ही राजा प्रसन्न हो गया और बोला मित्र तुम बैठो मेरी पुजा का समय हो गया बस दस मिनट में आता हुं। जाट ने कहा कि पुजा में क्या करोगे? राजा ने उत्तर दिया कि भाई मैं परमात्मा ने जो मुझे दिया है उसके लिए धन्यवाद देता हूं और जिस चीज की कमी है वो मांगता हूं। ऐसा कहकर राजा अंदर चला गया और जाट ने अपनी चादर कंधे पर रखी और वापस अपने गांव चल पड़ा।
राजा बाहर आया और पूछा कि मेरा मित्र कहां है? दरबारियों ने कहा कि महाराज वो तो चला गया। राजा बोला कि ओहो लगता है बूरा मान गया। एक मंत्री ने कहा कि नहीं महाराज बुरा नहीं माना वो तो बड़ी प्रसन्नता से गया है। एक हफ्ता हो गया आखिर राजा ने एक टुकड़ी साथ ली और जाट के घर की तरफ बढ़ चला। देखा तो जाट ने हल जोत रखा अच्छी बारीश हुई थी चिड़िया चहचहा रही।
राजा ने कहा कि भाई तु महल में भी आया एक दस मिनट भी नहीं ठहर सका? किस जरूरत में आया था? जाट बोला कि राजा साहब मैं आया तो जरूरत में ही था मगर जब मुझे पता चला कि आप खुद मांग रहे हो तो मैं किसी मंगते से क्या मांगता? तो मैंने भी उसी से मांग लिया जिससे तु मांगता है। मैं जबतक गांव में पहुंचा तबतक ही बारीश शुरू हो चुकी थी।
Post a Comment