राजा ने किसान की बेटी से शादी करने की जिद की, किसान ने रख दी ऐसी शर्त कि तीन बैलों ने राजा का पूरा घमंड तोड़ दिया

एक बहुत मेहनती किसान खेत में काम कर रहा था, उसकी लड़की भी उसके साथ ही काम कर रही थी और वह बहुत खूबसूरत थी। वहां से राजा की सवारी गुजरी और उसकी नजर लड़की पर पड़ी, राजा दरबार में पहुंचा और अपने दूतों को किसान के पास भेजा और कहलवाया कि भाई इस लड़की की शादी राजा के साथ कर दे।

किसान ने सोचा कि मैं गरीब आदमी हूं और इसलिए राजा जबरदस्ती करना चाहता है, लड़की और राजा में उम्र का भी फर्क है संजोग बनता नहीं। लेकिन मैं इसे मना भी नहीं कर सकता। तो वह दूतों से बोला कि जाकर राजा से कहना मेरी कुछ शर्त है और राजा उसे पूरी कर देगा तो मैं इस लड़की की शादी उसके साथ कर दूंगा।

दूत राजा के पास पहुंचे और किसान की बात कह सुनाई, तो राजा बोला कि मैं इतने बड़े राज्य का स्वमी हूं मेरे सामने कौनसी शर्त अड़ सकती है। ऐसा कहकर वह किसान के पास पहुंचा और शर्त पुछी। किसान ने कहा राजा साहब वो दरवाजा देखो और वहां जाकर खड़े हो जाओ, मैं एक एक करके तीन बैल छोडुंगा आपको किसी एक की पूंछ पकड़नी है अगर नहीं पकड़ पाए तो मैं लड़की की शादी आपसे नहीं करूंगा।

राजा बोला कि काम कठिन है पर मैं करूंगा, ऐसा कहकर वह दरवाजे के पास जा खड़ा हुआ और इंतजार करने लगा इतने में किसान ने पहला बैल छोड़ा, पूरा तगड़ा बैल सींगों को कभी इधर कभी उधर लहराते हुए आगे बढ़ा। राजा ने देखा और पीछे हट गया और मन ही मन कहा कि इसे जाने देता हूं अगले की पूंछ पकडूंगा ये तो मार डालेगा।

दुसरा बैल छोड़ा वो उससे भी ज्यादा खुंखार था राजा ने उसे भी जाने दिया और मन में कहा तीसरे को जरूर पकडूंगा। तीसरा बैल छोड़ा गया और राजा ने पूंछ पकड़नी चाही लेकिन तीव्र गति से बैल निकल गया पूंछ हाथ में ही न आई, राजा का मुंह रेत में धंस गया। किसान ने उसे उठाया और कहा कि चलो आपका पिता राजा था आप भी राजा बन गए हो सकता है आपकी संतान भी ऐसे ही राजा बन जाए ।

एक बहुत मेहनती किसान खेत में काम कर रहा था, उसकी लड़की भी उसके साथ ही काम कर रही थी और वह बहुत खूबसूरत थी। वहां से राजा की सवारी गुजरी और उसकी नजर लड़की पर पड़ी, राजा दरबार में पहुंचा और अपने दूतों को किसान के पास भेजा और कहलवाया कि भाई इस लड़की की शादी राजा के साथ कर दे।

किसान ने सोचा कि मैं गरीब आदमी हूं और इसलिए राजा जबरदस्ती करना चाहता है, लड़की और राजा में उम्र का भी फर्क है संजोग बनता नहीं। लेकिन मैं इसे मना भी नहीं कर सकता। तो वह दूतों से बोला कि जाकर राजा से कहना मेरी कुछ शर्त है और राजा उसे पूरी कर देगा तो मैं इस लड़की की शादी उसके साथ कर दूंगा।

दूत राजा के पास पहुंचे और किसान की बात कह सुनाई, तो राजा बोला कि मैं इतने बड़े राज्य का स्वमी हूं मेरे सामने कौनसी शर्त अड़ सकती है। ऐसा कहकर वह किसान के पास पहुंचा और शर्त पुछी। किसान ने कहा राजा साहब वो दरवाजा देखो और वहां जाकर खड़े हो जाओ, मैं एक एक करके तीन बैल छोडुंगा आपको किसी एक की पूंछ पकड़नी है अगर नहीं पकड़ पाए तो मैं लड़की की शादी आपसे नहीं करूंगा।

राजा बोला कि काम कठिन है पर मैं करूंगा, ऐसा कहकर वह दरवाजे के पास जा खड़ा हुआ और इंतजार करने लगा इतने में किसान ने पहला बैल छोड़ा, पूरा तगड़ा बैल सींगों को कभी इधर कभी उधर लहराते हुए आगे बढ़ा। राजा ने देखा और पीछे हट गया और मन ही मन कहा कि इसे जाने देता हूं अगले की पूंछ पकडूंगा ये तो मार डालेगा।

दुसरा बैल छोड़ा वो उससे भी ज्यादा खुंखार था राजा ने उसे भी जाने दिया और मन में कहा तीसरे को जरूर पकडूंगा। तीसरा बैल छोड़ा गया और राजा ने पूंछ पकड़नी चाही लेकिन तीव्र गति से बैल निकल गया पूंछ हाथ में ही न आई, राजा का मुंह रेत में धंस गया। किसान ने उसे उठाया और कहा कि चलो आपका पिता राजा था आप भी राजा बन गए हो सकता है आपकी संतान भी ऐसे ही राजा बन जाए । लेकिन आप मेरी लड़की के योग्य नहीं आपने मौके का फायदा नहीं उठाया।

एक बहुत मेहनती किसान खेत में काम कर रहा था, उसकी लड़की भी उसके साथ ही काम कर रही थी और वह बहुत खूबसूरत थी। वहां से राजा की सवारी गुजरी और उसकी नजर लड़की पर पड़ी, राजा दरबार में पहुंचा और अपने दूतों को किसान के पास भेजा और कहलवाया कि भाई इस लड़की की शादी राजा के साथ कर दे।

किसान ने सोचा कि मैं गरीब आदमी हूं और इसलिए राजा जबरदस्ती करना चाहता है, लड़की और राजा में उम्र का भी फर्क है संजोग बनता नहीं। लेकिन मैं इसे मना भी नहीं कर सकता। तो वह दूतों से बोला कि जाकर राजा से कहना मेरी कुछ शर्त है और राजा उसे पूरी कर देगा तो मैं इस लड़की की शादी उसके साथ कर दूंगा।

दूत राजा के पास पहुंचे और किसान की बात कह सुनाई, तो राजा बोला कि मैं इतने बड़े राज्य का स्वमी हूं मेरे सामने कौनसी शर्त अड़ सकती है। ऐसा कहकर वह किसान के पास पहुंचा और शर्त पुछी। किसान ने कहा राजा साहब वो दरवाजा देखो और वहां जाकर खड़े हो जाओ, मैं एक एक करके तीन बैल छोडुंगा आपको किसी एक की पूंछ पकड़नी है अगर नहीं पकड़ पाए तो मैं लड़की की शादी आपसे नहीं करूंगा।

राजा बोला कि काम कठिन है पर मैं करूंगा, ऐसा कहकर वह दरवाजे के पास जा खड़ा हुआ और इंतजार करने लगा इतने में किसान ने पहला बैल छोड़ा, पूरा तगड़ा बैल सींगों को कभी इधर कभी उधर लहराते हुए आगे बढ़ा। राजा ने देखा और पीछे हट गया और मन ही मन कहा कि इसे जाने देता हूं अगले की पूंछ पकडूंगा ये तो मार डालेगा।

दुसरा बैल छोड़ा वो उससे भी ज्यादा खुंखार था राजा ने उसे भी जाने दिया और मन में कहा तीसरे को जरूर पकडूंगा। तीसरा बैल छोड़ा गया और राजा ने पूंछ पकड़नी चाही लेकिन तीव्र गति से बैल निकल गया पूंछ हाथ में ही न आई, राजा का मुंह रेत में धंस गया। किसान ने उसे उठाया और कहा कि चलो आपका पिता राजा था आप भी राजा बन गए हो सकता है आपकी संतान भी ऐसे ही राजा बन जाए ।

महाराज, आपने पहले बैल को इसलिए छोड़ दिया कि वह बहुत शक्तिशाली था। दूसरे को इसलिए जाने दिया कि वह पहले से भी अधिक भयंकर लगा। आप सोचते रहे कि तीसरा मौका आसान होगा, लेकिन जीवन में हर अगला अवसर पहले से आसान हो, यह जरूरी नहीं होता। कई बार जो पहला अवसर मिलता है, वही सबसे अच्छा होता है।

राजा किसान की बात सुनकर मौन हो गया।

किसान ने आगे कहा जिस व्यक्ति में निर्णय लेने का साहस नहीं होता, वह केवल अवसर ही नहीं, सम्मान भी खो देता है। मेरी बेटी कोई वस्तु नहीं है कि राजशक्ति के बल पर उसे पा लिया जाए। उसका जीवन ऐसे व्यक्ति के साथ ही बीतेगा जो समय पर सही निर्णय ले सके, परिश्रम का सम्मान करे और संबंधों को अधिकार नहीं, विश्वास समझे।

राजा को अपनी भूल का एहसास हो गया। उसने किसान और उसकी बेटी से क्षमा मांगी और कहा कि आज तुमने मुझे वह शिक्षा दी है जो मेरे सारे गुरुओं ने भी नहीं दी। राज्य चलाने के लिए केवल ताज नहीं, सही समय पर सही निर्णय लेने का साहस भी चाहिए।

राजा बिना किसी क्रोध या अहंकार के वापस अपने महल लौट गया। कुछ समय बाद किसान ने अपनी बेटी का विवाह उसकी इच्छा से एक मेहनती, योग्य और सदाचारी युवक के साथ कर दिया।

अवसर बार-बार नहीं आते। जो व्यक्ति डर, लालच या टालमटोल में पहला सही अवसर खो देता है, वह अक्सर बाद में पछतावे के सिवा कुछ नहीं पाता। साथ ही, किसी का पद या वैभव नहीं, बल्कि उसका चरित्र, विवेक और समय पर निर्णय लेने की क्षमता ही उसे वास्तव में योग्य बनाती है।

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