कुछ महीने पहले आनंद ने अपनी पत्नी को शिवम के साथ देख लिया था। आशिकी ने वहां भी दिमाग लगाया और खुद को बेगुनाह बताते हुए शिवम पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया


इटावा उत्तर प्रदेश

लोग बेमतलब ही नफरत में अंधे होकर समाज में एक दूसरे को शक की निगाह से देख कर जी रहे है जबकि रोजाना ऐसी खबरें आ रही है कि कोई न कोई अपने ही घरवालों में से किसी के द्वारा मारा जा रहा है

यह कहानी है आशिकी देवी और उसके पति आनंद राजपूत की। बताया जा रहा है कि आशिकी ने अपने आशिक शिवम राजपूत (जो पड़ोसी/भतीजे के रूप में भी बताया जा रहा है) आशिक़ी में पड़कर के साथ मिलकर पति आनंद राजपूत की हत्या कर दी, ऐसा आरोप है।

बत्तीस साल का आनंद राजपूत प्रॉपर्टी डीलर/भट्ठा संचालक थे। उनकी लाश घर में संदिग्ध हालत में मिली। बताया गया कि आशिकी ने पति को दूध में नींद की गोलियां (नशे की दवाएं) मिलाकर खिलाईं, जिससे वह बेहोश हो गए। इसके बाद आशिकी और शिवम ने मिलकर उनका गला घोंटकर हत्या कर दी। हत्या के बाद शिवम ने कमरे का दरवाजा बाहर से लॉक कर दिया।

आशिकी ने शुरुआत में आत्महत्या का रोना रोया, लेकिन पुलिस को दरवाजा लॉक होने पर शक हुआ कि अगर आदमी ने अंदर खुद की कुशी की है तो दरवाजा बाहर से कैसे लॉक है??

पुलिस ने थोड़ा गहराई में उतर कर पूछताछ की तो आशिकी ने जुर्म कबूल लिया और शिवम की भूमिका बताई। दोनों गिरफ्तार हैं।

असल में कुछ महीने पहले आनंद ने अपनी पत्नी को शिवम के साथ देख लिया था। आशिकी ने वहां भी दिमाग लगाया और खुद को बेगुनाह बताते हुए शिवम पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया, जिसके चलते शिवम जेल गया।

जून की शुरुआत में शिवम रिहा हुआ, फिर दोनों का संबंध फिर शुरू हो गया। आनंद इस रिश्ते में बाधा बन गए, इसलिए दोनों ने हत्या की साजिश रची।

पुलिस ने मामले को बहुत तेजी से सुलझाया (कुछ रिपोर्ट्स में 10-24 घंटे बताया गया)। फॉरेंसिक सबूत, पड़ोसियों के बयान और CCTV फुटेज आदि से साजिश खुली।

यह घटना रिश्तों की जटिलता और अपराध की निंदनीय मिसाल है। पुलिस जांच जारी है, और अदालत में मामला चलेगा।

मध्यम वर्ग और लोअर मध्यम वर्ग अमीर लोगों को उनके चेहरे को या सर को न ढकने के कारण या तलाक़ लेकर अलग अलग रहने और दोबारा विवाह अथवा विधवा/विधुर पुनर्विवाह करने के कल्चर को गैर संस्कारी, बेशर्म, बे हया होने का ताना देता है लेकिन अपनी हर समस्या का समाधान "इसको काट दो" "उसको गेर दो" , "इसको गेर के काट दो", "उसको काट के गेर दो" में ही देखता है

कोई अपनी पत्नी की हत्या तो कोई अपने पति की, कोई अपनी मां की हत्या तो कोई अपने बाप की, कोई अपनी भाभी की हत्या तो कोई अपने भाई की हत्या कर रहा है। 

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