एक मैडम को अचानक एक जरूरी इंटरव्यू के लिए जाना था। समय बेहद कम था और उन्हें डर था कि अगर वह समय पर नहीं पहुंचीं तो उनका इंटरव्यू छूट सकता है।
उन्होंने बिना देर किए Rapido बुक की।
कुछ ही देर बाद राइडर बाइक लेकर उनके पास पहुंच गया।
बाइक पर बैठते ही मैडम ने राइडर से कहा—
“भैया, प्लीज किसी भी तरह मुझे 20 मिनट के अंदर पहुंचा दो। अगर मैं लेट हो गई तो मेरा करियर खराब हो जाएगा।”
राइडर ने रास्ते के बारे में सोचा।
सामान्य रास्ता करीब 20 किलोमीटर का था और उस समय ट्रैफिक भी काफी था। उसके हिसाब से उस रास्ते से पहुंचने में लगभग एक घंटे तक का समय लग सकता था।
लेकिन राइडर ने महिला को निराश नहीं किया।
उसने कहा—
“मैडम, मेन रोड से तो काफी समय लगेगा। लेकिन मुझे एक शॉर्टकट पता है। अगर आप भरोसा करें तो मैं आपको जल्दी पहुंचाने की कोशिश करता हूं।”
महिला ने तुरंत हामी भर दी।
राइडर ने बाइक मुख्य सड़क से हटाई और कच्चे रास्तों की तरफ बढ़ गया।
कुछ दूर तक बाइक पगडंडियों से होती हुई आगे बढ़ती रही।
मैडम को भी समझ नहीं आ रहा था कि आखिर वह उन्हें कहां लेकर जा रहा है।
कुछ देर बाद सामने नदी दिखाई दी।
महिला ने सोचा कि शायद अब मुश्किल हो गई।
लेकिन राइडर ने वहां खड़ी एक बड़ी नाव की तरफ इशारा किया और कहा—
“मैडम, अब नदी पार करेंगे।”
उसने बाइक नाव पर चढ़ाई।
मैडम को भी नाव पर बैठाया और नदी पार करने के लिए निकल पड़ा।
जिस रास्ते से सामान्य तौर पर करीब 20 किलोमीटर का सफर करना पड़ता, उस शॉर्टकट से दूरी लगभग 12 किलोमीटर रह गई।
राइडर की कोशिश काम कर गई।
महिला अपनी लोकेशन पर करीब 10 मिनट पहले पहुंच गईं।
यानी उनका इंटरव्यू छूटने से बच गया।
लेकिन कहानी का असली मोड़ इसके बाद आया।
किराया देने की बारी आई तो शुरू हुआ विवाद
जब महिला को पैसे देने थे, तो राइडर ने ऐप में दिखाई जा रही रकम के हिसाब से किराया मांगा।
राइडर के मुताबिक किराया 20 किलोमीटर वाले सफर के हिसाब से था।
लेकिन महिला ने पैसे देने से पहले ही आपत्ति जता दी।
उन्होंने कहा—
“मैं तो सिर्फ 12 किलोमीटर ही आई हूं। मैं 20 किलोमीटर का पैसा क्यों दूं?”
राइडर यह सुनकर हैरान रह गया।
उसने समझाने की कोशिश की—
“मैडम, मैंने आपको 20 किलोमीटर का रास्ता बचाकर शॉर्टकट से पहुंचाया है। आपका समय बचा है। नदी पार कराने के लिए नाव वाले को भी मैंने अपनी जेब से 50 रुपये दिए हैं।”
लेकिन महिला अपनी बात पर अड़ी रहीं।
उनका कहना था कि जब उन्होंने बाइक से लगभग 12 किलोमीटर ही सफर किया है तो वह उतने ही किलोमीटर का भुगतान करेंगी।
राइडर ने फिर समझाने की कोशिश की कि उसने शॉर्टकट इसलिए लिया था क्योंकि महिला ने खुद जल्दी पहुंचाने की गुहार लगाई थी।
लेकिन बात नहीं बनी।
आखिरकार राइडर को कम पैसे लेकर ही वहां से जाना पड़ा।
मदद करने का मिला उल्टा अनुभव
राइडर ने शायद सोचा भी नहीं होगा कि जिस यात्री को समय पर पहुंचाने के लिए वह मुख्य रास्ता छोड़कर कच्चे रास्तों से जाएगा, नदी पार करवाएगा और अपनी जेब से नाव का किराया देगा, उसी यात्री के साथ आखिर में किराए को लेकर विवाद हो जाएगा।
उसके मन में यही बात रह गई कि उसने महिला का इंटरव्यू बचाने के लिए अपनी तरफ से पूरी कोशिश की, लेकिन उसकी मेहनत और अतिरिक्त खर्च की कोई कीमत नहीं समझी गई।
बताया जाता है कि इसके बाद उसने मन ही मन तय कर लिया कि आगे से किसी यात्री को जल्दी पहुंचाने के चक्कर में वह अपनी तरफ से ऐसे अतिरिक्त जोखिम और खर्च नहीं उठाएगा।
लेकिन सवाल यह भी है...
अगर किसी राइडर ने यात्री की सहमति से रास्ता बदला, समय बचाने के लिए अतिरिक्त साधन का इस्तेमाल किया और उसके लिए अपनी जेब से खर्च भी किया, तो क्या यात्री को उस अतिरिक्त प्रयास का सम्मान नहीं करना चाहिए?
दूसरी तरफ, किराया आखिरकार ऐप के नियमों और वास्तविक बुकिंग के हिसाब से ही तय होना चाहिए। इसलिए किसी भी पक्ष को बिना पूरी जानकारी के गलत ठहराना उचित नहीं होगा।
लेकिन इंसानियत के स्तर पर एक सवाल जरूर बनता है—
अगर किसी ने आपकी मुश्किल घड़ी में आपकी मदद करने की कोशिश की हो, तो क्या उसके अतिरिक्त प्रयास और खर्च की कद्र नहीं होनी चाहिए?
आपकी नजर में मैडम ने सही किया या राइडर की मदद का उन्हें कुछ अतिरिक्त भुगतान करना चाहिए था?
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