हुक्म चलाने वाली आंटी ने जमाती को बनाया नौकर, फिर जमाती ने ऐसा किया कि पूरा मोहल्ला सहम गया! जानिए क्या थी वो रात


 दिल्ली के एक मध्यमवर्गीय मोहल्ले में रहती थी अनुराधा (45), जो अपने मोहल्ले में "आंटी नंबर 1" के नाम से मशहूर थी। वह हर किसी को हुक्म चलाती थी—दुकानदारों से लेकर पड़ोसियों तक, सब उसके इशारे पर नाचते थे। उसकी एक बेटी थी—रिया (22), जिसकी शादी 2 साल पहले अभिषेक (26) नाम के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर से हुई थी। अभिषेक दिल्ली में ही एक प्राइवेट कंपनी में काम करता था और वह अनुराधा के घर में ही रहता था।


अनुराधा ने अभिषेक को अपना नौकर बना रखा था। वह सुबह से शाम तक उसे काम करवाती—चाय बनाना, सब्जी काटना, बाजार जाना, बर्तन धोना, कपड़े धोना—हर काम उसी से करवाती। अभिषेक तो बड़ी मुश्किल से सॉफ्टवेयर इंजीनियर बना था, लेकिन अनुराधा उसे "बेकार" कहती और हर वक्त उसकी खिल्ली उड़ाती। वह उसे "नौकर" कहकर बुलाती और मेहमानों के सामने उसकी बेइज्जती करती। अभिषेक चुप रहता, क्योंकि उसे अपनी पत्नी रिया से प्यार था।


एक दिन अभिषेक को ऑफिस से प्रमोशन मिला और तनख्वाह भी बढ़ गई। वह बहुत खुश हुआ और उसने अनुराधा को बताया कि अब वे एक अलग घर ले सकते हैं। लेकिन अनुराधा ने उसकी बात को हँसी में उड़ा दिया और कहा, "तू क्या करेगा प्रमोशन का? तुझे तो मैंने पाला है। जब तक मैं जीवित हूँ, तू मेरे घर से नहीं निकल सकता।" अभिषेक को बहुत बुरा लगा, लेकिन वह चुप रहा।


एक रात अनुराधा ने अभिषेक को देर रात बाजार से दूध लाने के लिए भेजा। अभिषेक ने कहा कि बाजार बंद हो गया है, लेकिन अनुराधा ने कहा, "तुझे जाना ही पड़ेगा, मुझे सुबह दूध की ज़रूरत है।" अभिषेक के अंदर का गुस्सा उबलने लगा। उसने सोचा, "अब बहुत हुआ। इस आंटी को अपनी औकात दिखानी पड़ेगी।"


कुछ दिनों बाद, अभिषेक ने एक प्लान बनाया। वह रोज़ाना अनुराधा के लिए सुबह-सुबह गुनगुना पानी ले जाता, जिसमें वह कुछ प्राकृतिक जड़ी-बूटियाँ मिलाता था—जो जानलेवा नहीं थीं, लेकिन धीरे-धीरे शरीर को कमज़ोर कर देती थीं। अनुराधा को हर रोज़ कमज़ोरी महसूस होने लगी। वह डॉक्टर के पास गई, लेकिन डॉक्टर को कुछ पता नहीं चला। कुछ हफ्तों में ही अनुराधा अपने बिस्तर पर आ गई। अब वह बिस्तर से उठ नहीं पाती थी।


अब अभिषेक ने अनुराधा पर हुक्म चलाना शुरू कर दिया। वह उससे कहता, "आंटी, आपको चाहिए दूध? ठीक है, मैं लाऊँगा। लेकिन कुछ शर्तें होंगी।" अनुराधा को अपनी गलती का एहसास हुआ, लेकिन तब बहुत देर हो चुकी थी। अब अभिषेक ने उसे बताया कि जड़ी-बूटियाँ वही थीं जो उसे बीमार कर रही थीं। उसने कहा, "यह सबक है आपके लिए। अगर आपने फिर किसी को नौकर बनाने की कोशिश की, तो आपको पता है क्या होगा।" अनुराधा डर गई और उसके बाद उसने कभी अभिषेक को हुक्म नहीं दिया।


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