रात के करीब 1:17 बजे मोहित के मोबाइल पर एक संदेश आया।
वह गहरी नींद में था। मोबाइल की रोशनी से उसकी पत्नी राधिका की भी आंख खुल गई।
स्क्रीन पर जो नाम था, उसे देखकर राधिका भी चौंक गई।
"पूजा"
पूजा मोहित के सबसे करीबी दोस्त नरेश की पत्नी थी।
राधिका ने मोहित से पूछा—
"इतनी रात को पूजा का मैसेज?"
मोहित ने मोबाइल उठाया।
संदेश में सिर्फ एक लाइन थी—
"मुझे आपसे अकेले में मिलना है। कृपया नरेश को मत बताइए। बात बहुत जरूरी है।"
मोहित कुछ देर तक स्क्रीन देखता रहा।
फिर उसने मोबाइल बंद कर दिया।
राधिका ने पूछा—
"क्या हुआ?"
मोहित ने कहा—
"पता नहीं। सुबह बात करूंगा।"
लेकिन सुबह होने से पहले ही एक दूसरा संदेश आ गया।
"अगर आपने बात नहीं की तो बहुत देर हो जाएगी।"
सुबह हुई पहली मुलाकात
सुबह मोहित अकेले एक पुराने कैफे में पहुंचा।
कुछ देर बाद पूजा वहां आई।
उसका चेहरा परेशान था।
बैठते ही उसने कहा—
"मैं जानती हूं कि आपको मेरा यहां बुलाना गलत लग रहा होगा। लेकिन मेरे पास कोई और रास्ता नहीं था।"
मोहित ने पूछा—
"आखिर बात क्या है?"
पूजा ने अपने बैग से एक पुराना लिफाफा निकाला।
लिफाफे पर लगभग दस साल पुरानी तारीख लिखी थी।
18 अगस्त 2016
मोहित ने पूछा—
"यह क्या है?"
पूजा ने कहा—
"इसे खोलने से पहले मुझे आपसे एक वादा चाहिए।"
"कैसा वादा?"
"जो भी सच आपको पता चले... पहले नरेश से गुस्से में कुछ मत कहना।"
मोहित ने लिफाफा खोल दिया।
अंदर कुछ पुराने कागज और एक तस्वीर थी।
तस्वीर देखकर उसके चेहरे के भाव बदल गए।
तस्वीर में कौन था?
तस्वीर में नरेश बहुत कम उम्र का दिखाई दे रहा था।
उसके साथ एक बुजुर्ग व्यक्ति खड़ा था।
मोहित उस व्यक्ति को पहचानता था।
वह नरेश के पिता थे।
लेकिन तस्वीर के पीछे लिखी एक लाइन ने उसे उलझन में डाल दिया—
"जिस दिन यह तस्वीर सामने आएगी, उस दिन सच छिपाना मुश्किल होगा।"
मोहित ने पूछा—
"तुम्हें यह कहां मिला?"
पूजा ने कहा—
"नरेश के पुराने सामान में।"
फिर उसने एक और बात बताई।
"मेरे पति ने मुझसे पिछले कुछ महीनों से एक बात छिपाई है।"
मोहित को लगा मामला बहुत गंभीर है
पूजा ने बताया कि नरेश हर महीने एक निश्चित रकम किसी पुराने बैंक खाते में भेजता था।
वह पूछती तो कहता—
"पिताजी के पुराने मामले से जुड़ा खर्च है।"
लेकिन उसके पिता की मृत्यु कई साल पहले हो चुकी थी।
फिर पैसा कहां जा रहा था?
पूजा को शक होने लगा।
उसने एक दिन बैंक के पुराने कागज देखे।
वह खाता एक ऐसे व्यक्ति के नाम था जिसे परिवार में कोई जानता तक नहीं था।
पूजा ने उस व्यक्ति का पता लगाने की कोशिश की।
और तभी उसे यह पुरानी तस्वीर मिली।
दस साल पुराना हादसा
मोहित ने तस्वीर को गौर से देखा।
उसे अचानक कुछ याद आया।
करीब दस साल पहले एक सड़क दुर्घटना हुई थी।
उस हादसे में एक बुजुर्ग व्यक्ति की मृत्यु हो गई थी।
उस समय नरेश के पिता पर लापरवाही का आरोप लगा था।
लेकिन बाद में मामला बंद हो गया था।
मोहित ने पूछा—
"क्या तुम्हें लगता है कि यह उसी घटना से जुड़ा है?"
पूजा ने धीरे से सिर हिलाया।
"हां।"
लेकिन असली रहस्य कुछ और था
पूजा ने बताया कि उसे एक पुरानी डायरी मिली थी।
डायरी नरेश के पिता की थी।
उसमें लिखा था कि दुर्घटना उनकी गलती से नहीं हुई थी।
असल में सड़क निर्माण के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही हुई थी।
लेकिन उस समय किसी प्रभावशाली व्यक्ति के दबाव में मामला दूसरी दिशा में चला गया।
नरेश के पिता ने उस समय किसी निर्दोष व्यक्ति को बचाने के लिए चुप रहना स्वीकार किया था।
लेकिन इसके बदले उन्होंने एक परिवार की आर्थिक मदद करने का वादा किया था।
वही परिवार आज भी उस पुराने खाते से मदद पा रहा था।
फिर पूजा ने मोहित को असली वजह बताई
पूजा ने कहा—
"मैंने नरेश से पूछा था कि वह हर महीने पैसे किसे भेजता है। उसने कहा कि जब तक वह जिंदा है, वह यह बात किसी को नहीं बताएगा।"
मोहित ने पूछा—
"तो तुम मुझसे क्यों कह रही हो?"
पूजा की आंखों में आंसू आ गए।
"क्योंकि मुझे कल पता चला कि जिस परिवार की मदद वह कर रहा है, उस परिवार के बेटे पर अब उसी पुराने मामले में गलत आरोप लगाया जा रहा है।"
मोहित समझ गया कि मामला सिर्फ पैसों का नहीं था।
यह उस पुराने हादसे से जुड़ा हुआ था।
नरेश ने सच क्यों छिपाया?
उसी शाम मोहित ने नरेश से मिलने का फैसला किया।
नरेश ने पूरी बात सुनने के बाद कहा—
"मैं जानता था कि किसी दिन यह सच सामने आएगा।"
उसने बताया कि उसके पिता ने मरने से पहले उसे एक जिम्मेदारी दी थी।
उन्होंने कहा था—
"हमसे जो गलती हुई हो, उसकी कीमत किसी निर्दोष को मत चुकाने देना।"
नरेश तब बहुत छोटा था।
बड़ा होने के बाद उसने पिता की डायरी पढ़ी और उस परिवार की मदद करना शुरू कर दिया।
लेकिन उसने यह बात अपनी पत्नी तक से छिपाई।
उसे डर था कि कहीं परिवार में पुराना विवाद फिर न शुरू हो जाए।
आखिरी कागज ने बदल दी पूरी कहानी
पूजा ने जो लिफाफा संभालकर रखा था, उसमें एक पुराना हस्ताक्षरित बयान भी था।
उस बयान से साबित होता था कि दुर्घटना के समय नरेश के पिता ने जिस बात की गवाही दी थी, वह सही थी।
वर्षों बाद वही कागज उस निर्दोष परिवार के बेटे को गलत आरोप से बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण सबूत बन गया।
मामला दोबारा जांच में गया।
जांच के बाद पुराने रिकॉर्ड सामने आए और असली लापरवाही करने वालों की पहचान हुई।
जिस व्यक्ति पर वर्षों से गलत आरोप लगाया जा रहा था, उसका नाम साफ हो गया।
पूजा ने आखिर मोहित को ही क्यों चुना?
राधिका ने बाद में पूजा से यही सवाल पूछा।
पूजा ने कहा—
"क्योंकि मोहित और नरेश की दोस्ती इतनी पुरानी है कि मुझे भरोसा था वह गुस्से में नहीं, समझदारी से बात करेगा।"
राधिका ने मुस्कुराकर कहा—
"लेकिन अगली बार इतनी रात को संदेश मत भेजना। घर में शक पैदा हो जाता है।"
पूजा भी मुस्कुरा दी।
सालों से छिपा राज आखिर सामने आ गया
कुछ महीनों बाद वह पुराना मामला पूरी तरह सुलझ गया।
नरेश ने पहली बार अपनी पत्नी को बताया कि वह वर्षों से जिस परिवार की मदद कर रहा था, वह उसके पिता की आखिरी जिम्मेदारी थी।
पूजा ने उससे सिर्फ एक बात कही—
"मुझे तुम्हारे राज से ज्यादा दुख इस बात का है कि तुमने मुझे इतना कमजोर समझा कि मैं तुम्हारा साथ नहीं दे पाती।"
नरेश ने उसका हाथ पकड़ लिया।
और उस रात पहली बार दोनों ने उस पुराने मामले पर खुलकर बात की।
मोहित और राधिका भी समझ चुके थे कि आधी रात का वह संदेश किसी छिपे रिश्ते की शुरुआत नहीं था।
वह एक ऐसे सच की शुरुआत थी, जिसे दो परिवारों ने वर्षों तक अपने-अपने तरीके से संभालकर रखा था।
कभी-कभी रिश्तों में सबसे खतरनाक चीज कोई तीसरा इंसान नहीं होता... बल्कि वह राज होता है जिसे लोग अच्छे इरादे से छिपाते-छिपाते इतना बड़ा बना देते हैं कि एक दिन वही पूरे परिवार को हिला देता है।
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