विनोद और उसकी पत्नी शालिनी अपनी दो बेटियों और सास के साथ रहते थे। शादी को करीब आठ साल हो चुके थे।
पिछले कुछ महीनों से विनोद को लग रहा था कि शालिनी उससे कुछ छिपा रही है।
वह रात में अक्सर फोन लेकर छत पर चली जाती।
कभी-कभी आधी रात के बाद उसके कमरे से धीमी आवाज में बात करने की आवाज आती।
विनोद पूछता तो शालिनी हमेशा एक ही बात कहती—
"किसी सहेली से बात कर रही थी।"
विनोद ने कभी उस पर खुलकर शक नहीं किया।
लेकिन एक रात उसने ऐसी आवाज सुनी, जिसे वह पहचानता नहीं था।
आधी रात कमरे में कौन था?
रात करीब 12:30 बजे विनोद की नींद खुली।
बगल में शालिनी नहीं थी।
कमरे से बाहर निकलते ही उसे पत्नी के कमरे से किसी पुरुष की धीमी आवाज सुनाई दी।
विनोद कुछ सेकंड तक दरवाजे के बाहर खड़ा रहा।
फिर उसने अचानक दरवाजा खोल दिया।
अंदर शालिनी अकेली खड़ी थी।
कमरे में कोई पुरुष नहीं था।
लेकिन खिड़की खुली हुई थी।
और नीचे आंगन में एक आदमी तेजी से भागता दिखाई दिया।
विनोद ने उसी रात सवाल किया
"कौन था?"
शालिनी ने कहा—
"मुझे नहीं पता।"
विनोद गुस्से में बोला—
"मेरे घर में आधी रात को कोई आया और तुम्हें पता नहीं?"
शालिनी चुप रही।
फिर उसने सिर्फ इतना कहा—
"अभी मुझ पर भरोसा करो। सही समय आने पर सब बताऊंगी।"
विनोद को यह जवाब और ज्यादा परेशान करने लगा।
अगले दिन उसे एक पुराना लिफाफा मिला
सुबह विनोद को अपनी मां के पुराने संदूक की सफाई करते समय एक लिफाफा मिला।
लिफाफे पर उसके पिता का नाम लिखा था।
विनोद के पिता की मृत्यु करीब 12 साल पहले हो चुकी थी।
लिफाफे के अंदर एक कागज था।
उसमें लिखा था—
"अगर कभी यह कागज तुम्हारे हाथ लगे तो दुकान के पुराने हिसाब की जांच करना।"
विनोद ने कागज पढ़ा तो उसे अपने पिता के पुराने कारोबार की याद आई।
शालिनी को इस कागज की जानकारी थी
विनोद ने पत्नी से पूछा—
"क्या तुम्हें मेरे पापा के पुराने कारोबार के बारे में कुछ पता है?"
शालिनी कुछ देर चुप रही।
फिर उसने कहा—
"हां।"
विनोद चौंक गया।
"कब से?"
शालिनी ने बताया कि उसे करीब छह महीने पहले पुराने दस्तावेजों में कुछ बैंक रिकॉर्ड मिले थे।
उनमें ऐसे लेनदेन थे जिनके बारे में परिवार को कभी जानकारी नहीं दी गई थी।
रात में आने वाला आदमी कौन था?
शालिनी ने बताया कि वह आदमी अरुण था।
अरुण उसके ससुर के पुराने कारोबार में काम करता था।
वह कई सालों से शहर से बाहर रह रहा था।
कुछ महीने पहले उसने शालिनी से संपर्क किया।
उसके पास विनोद के पिता से जुड़ी पुरानी फाइलें थीं।
इसीलिए वह रात में घर आया था।
लेकिन वह रात में ही क्यों आता था?
अरुण ने शालिनी को बताया था कि उसे डर था कि कोई उसकी निगरानी कर रहा है।
उसके पास कुछ ऐसे दस्तावेज थे जिनसे पुराने वित्तीय घोटाले का पता चल सकता था।
शालिनी ने उन दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिए उससे संपर्क किया।
लेकिन उसने विनोद को कुछ नहीं बताया।
यही उसकी सबसे बड़ी गलती थी।
विनोद ने अरुण से मिलने का फैसला किया
अगले दिन विनोद ने अरुण को फोन किया।
अरुण ने मिलने के लिए शहर के बाहर एक पुराने ढाबे का नाम बताया।
विनोद वहां पहुंचा।
अरुण ने एक फाइल उसके सामने रखी।
उसमें उसके पिता के कारोबार के पुराने बैंक रिकॉर्ड थे।
कई रकम ऐसे खातों में गई थीं जिनका परिवार से कोई संबंध नहीं था।
फिर मिला सबसे बड़ा सुराग
एक खाते का नाम देखकर विनोद हैरान रह गया।
वह खाता उसके पिता के पुराने कारोबारी साझेदार महेश से जुड़ा था।
महेश परिवार का बहुत करीबी व्यक्ति था।
विनोद ने पूछा—
"क्या पापा को इसके बारे में पता था?"
अरुण ने कहा—
"इसीलिए उन्होंने सारे कागज इकट्ठे किए थे।"
फिर अचानक अरुण गायब हो गया
अगले दिन अरुण का फोन बंद हो गया।
विनोद ने कई बार कोशिश की।
कोई जवाब नहीं मिला।
उधर शालिनी को एक अज्ञात नंबर से संदेश आया—
"पुराने कागजों की तलाश बंद करो।"
शालिनी ने वह संदेश विनोद को दिखाया।
अब दोनों समझ गए कि मामला गंभीर है।
पुलिस को दी गई जानकारी
विनोद ने पुलिस को पूरे मामले की जानकारी दी।
पुलिस ने शालिनी के फोन से मिले संदेश, बैंक रिकॉर्ड और पुराने दस्तावेज सुरक्षित किए।
अरुण की तलाश शुरू हुई।
कुछ दिनों बाद वह दूसरे शहर में मिला।
उसने बताया कि उसे किसी ने धमकाया था।
जांच में सामने आया पुराना वित्तीय खेल
पुराने बैंक रिकॉर्ड की जांच में पता चला कि विनोद के पिता के कारोबार से कई सालों तक छोटी-बड़ी रकम अलग-अलग खातों में भेजी गई थी।
कुछ खाते फर्जी दस्तावेजों से खोले गए थे।
महेश का नाम कई लेनदेन में सामने आया।
लेकिन पुलिस ने सिर्फ नाम के आधार पर उसे दोषी नहीं माना।
पुराने रिकॉर्ड और हस्ताक्षरों की फोरेंसिक जांच शुरू की गई।
सबसे बड़ा सवाल—विनोद के पिता की मौत
परिवार में वर्षों से माना जाता था कि उनके पिता की मृत्यु प्राकृतिक कारणों से हुई थी।
लेकिन अब पुराने कारोबार का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने उनकी मृत्यु से जुड़े रिकॉर्ड भी देखे।
हालांकि कोई ऐसा निर्णायक सबूत नहीं मिला जिससे उनकी मौत को हत्या कहा जा सके।
इसलिए पुलिस ने उस मामले में कोई जल्दबाजी का निष्कर्ष नहीं निकाला।
शालिनी ने आखिर सच क्यों छिपाया?
विनोद ने उससे पूछा—
"अगर तुम गलत नहीं थीं तो मुझे पहले क्यों नहीं बताया?"
शालिनी ने कहा—
"क्योंकि मुझे लगा कि तुम्हें पता चलते ही तुम महेश से जाकर भिड़ जाओगे। मेरे पास उस समय कोई पक्का सबूत नहीं था।"
विनोद ने कहा—
"लेकिन तुम्हारे झूठ ने मुझे तुम पर शक करने के लिए मजबूर कर दिया।"
शालिनी ने सिर झुका लिया।
अंत
विनोद को लगा था कि उसकी पत्नी आधी रात किसी दूसरे आदमी से छिपकर मिल रही है।
लेकिन कमरे में सुनी गई वह आवाज एक पुराने अपराध की तरफ इशारा कर रही थी।
एक पुराना लिफाफा।
गायब बैंक रिकॉर्ड।
एक धमकी भरा संदेश।
और वर्षों पुराना कारोबारी विवाद।
इन सबने मिलकर परिवार के सामने ऐसा राज खोल दिया जिसे किसी ने कभी गंभीरता से नहीं देखा था।
शालिनी का राज प्रेम संबंध नहीं था।
लेकिन उसने पति से सच छिपाकर खुद अपने रिश्ते में शक जरूर पैदा कर दिया था।
और अब सबसे बड़ा सवाल यही था—
क्या पुराने कारोबार की हेराफेरी के पीछे सिर्फ पैसा था, या विनोद के पिता की मौत से भी इसका कोई संबंध था?
इस सवाल का जवाब जांच में तलाशा जाना बाकी था।
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