क्या आप भी रात का खाना कभी 8 बजे, कभी 10 बजे और कभी-कभी तो 11 बजे के बाद खाते हैं?
अगर हाँ, तो हो सकता है आप खुद अपने पाचन, नींद और वजन के साथ खेल रहे हों!
आइए जानते हैं आयुर्वेद और साइंस की नजर से डिनर का सही टाइम।
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
स्रोत: चरक संहिता — सूत्रस्थान, अध्याय 5
- आयुर्वेद के अनुसार रात का भोजन सूर्यास्त के 2 घंटे के अंदर कर लेना चाहिए।
- देर से खाना खाने पर अग्नि (digestive fire) कमजोर हो जाती है, जिससे अधपका भोजन (अमा) बनता है।
- ये अमा समय के साथ गैस, कब्ज, मोटापा, डायबिटीज और नींद की गड़बड़ी का कारण बन सकता है।
साइंस क्या कहता है?
- देर से खाना खाने पर शरीर का metabolism धीमा हो जाता है।
- रिसर्च के अनुसार, रात 9 बजे के बाद खाना खाने वालों में acid reflux और obesity का रिस्क ज्यादा होता है।
- जल्दी डिनर करने से blood sugar बेहतर कंट्रोल में रहता है और sleep quality बढ़ती है।
उपाय + विधि
- टाइम सेट करें: कोशिश करें कि रोजाना रात 7 से 8 बजे के बीच खाना खा लें।
- हल्का डिनर लें: रात में दाल-सब्जी, सूप या खिचड़ी जैसे हल्के और आसानी से पचने वाले भोजन को प्राथमिकता दें।
- खाने के बाद टहलें: खाने के बाद 10-15 मिनट धीमी चाल से टहलें।
ध्यान दें:
- अगर आपका शेड्यूल लेट है (जैसे नाइट शिफ्ट), तो खाने का समय अपने सोने से कम से कम 3 घंटे पहले रखें।
सवाल आपसे:
आपका डिनर टाइम क्या है? जल्दी खाने वालों की टीम में हैं या देर रात खाने वालों की?
कमेंट में लिखें और बताएं क्यों।
Disclaimer: कोई भी उपाय करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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