चाची-भतीजे की लव स्टोरी ने ली खौफनाक मोड़, फिर एक ने दूसरे को ऐसे उतारा मौत के घाट!


उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव में रहता था प्रमोद (35), जिसकी पत्नी सुमन (28) थी। प्रमोद का छोटा भाई राजेश शहर में नौकरी करता था, जिसका 20 साल का बेटा अजय गाँव में ही अपनी चाची सुमन और चाचा प्रमोद के साथ रहता था। अजय को अपनी चाची से बचपन से ही लगाव था, लेकिन जैसे-जैसे वह बड़ा हुआ, यह लगाव प्यार में बदल गया।


सुमन को भी अजय की तरफ आकर्षण महसूस होने लगा। प्रमोद अक्सर खेतों पर काम करता था, और अजय-सुमन को साथ बिताने के कई मौके मिलते थे। कुछ महीनों में ही दोनों के बीच गुप्त प्रेम संबंध बन गए। गाँव वालों को कुछ भनक लगी, लेकिन कोई भी पुख्ता तौर पर कुछ नहीं कह पाया।


एक दिन प्रमोद को अपनी पत्नी और भतीजे के बीच कुछ संदिग्ध दिखा। उसने उन पर नज़र रखनी शुरू कर दी। एक दिन जब वह खेत से पहले लौट आया, तो उसने अजय और सुमन को गले मिलते देखा। प्रमोद का खून खौल गया। उसने अजय को खूब पीटा और घर से निकाल दिया। सुमन को भी जमकर फटकारा।


कुछ दिनों बाद अजय ने सुमन को चिट्ठी लिखी कि वह उसे गाँव से दूर ले जाना चाहता है और दोनों शहर में नई ज़िंदगी शुरू करें। सुमन ने उसे मना कर दिया क्योंकि उसे अपने पति और घर की चिंता थी। अजय को यह बात बहुत बुरी लगी। उसने सोचा कि उसकी चाची ने उसे धोखा दिया है और वह उससे प्यार नहीं करती।


अजय ने प्रमोद से जाकर कह दिया कि सुमन ने ही उसे पहले बुलाया था और उसके पीछे पड़ी थी। प्रमोद इस झूठ पर विश्वास कर गया और उसने सुमन के साथ मारपीट शुरू कर दी। सुमन इस बात से बहुत आहत हुई। उसने सोचा कि जिस भतीजे के लिए उसने अपनी जान जोखिम में डाली, वही उसे धोखा दे रहा है।


एक रात जब प्रमोद घर पर नहीं था, तो सुमन ने अजय को बुलाया और उसे डाँटा। उसने कहा, "तुमने मुझे झूठा साबित कर दिया, मेरे पति ने मुझे पीटा, और तुम्हें कोई फ़र्क नहीं पड़ा।" अजय को अपनी गलती का एहसास हुआ, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। गुस्से में अजय ने कहा, "अगर तुमने मेरी बात नहीं मानी, तो मैं पूरे गाँव में बता दूँगा कि हम दोनों के बीच क्या था।"


सुमन को डर लगा कि कहीं अजय सच में ऐसा न कर दे। उसने फिर से अजय को मनाने की कोशिश की, लेकिन अजय जिद पर अड़ा रहा। उसने कहा, "अगर तुम साथ चलोगी, तो मैं कुछ नहीं बोलूँगा, वरना मैं सबको बता दूँगा।" सुमन को लगा कि अब उसे अजय से छुटकारा पाना होगा।


एक रात, सुमन ने अजय को खेत पर बुलाया और उससे कहा, "मैं तुम्हारे साथ चलने को राज़ी हूँ।" अजय बहुत खुश हुआ, लेकिन सुमन ने उसकी चाय में नींद की गोली मिला दी। कुछ देर बाद जब अजय बेहोश हो गया, तो उसने उसे खेत में ही एक गहरे गड्ढे में दफना दिया और फिर मिट्टी डालकर समतल कर दिया।


अगली सुबह अजय गायब था। प्रमोद ने पूरे गाँव में उसे ढूँढा, लेकिन वह नहीं मिला। किसी को नहीं पता था कि अजय कहाँ गया। सुमन ने कहा, "शायद वह कहीं और चला गया होगा।" प्रमोद ने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई, लेकिन कई महीनों तक अजय का कोई सुराग नहीं लगा।


एक दिन बारिश के बाद, खेत में वह स्थान थोड़ा धँस गया, और मिट्टी के साथ अजय के कपड़े का एक टुकड़ा बाहर निकल आया। गाँव वालों ने पुलिस को बुलाया, और पुलिस ने खुदाई करके अजय का शव बरामद किया। पूछताछ में सुमन ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि अजय उसे ब्लैकमेल कर रहा था और वह उसकी वजह से परेशान थी। पुलिस ने सुमन को गिरफ्तार कर लिया।

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