अजय अपनी पत्नी समीरा के साथ रहता था। अजय का सबसे करीबी दोस्त करण था। दोनों की दोस्ती करीब 15 साल पुरानी थी।
अजय को करण पर इतना भरोसा था कि वह अक्सर घर की चाबी भी उसे दे देता था।
लेकिन अजय को क्या पता था कि उसके घर की सबसे बड़ी कहानी उसी दोस्त से जुड़ी हुई है।
पिछले कुछ महीनों से समीरा और करण के बीच फोन पर बातचीत बढ़ गई थी।
जब अजय घर में होता तो दोनों सामान्य व्यवहार करते।
लेकिन अजय के ऑफिस जाते ही करण के फोन आने लगते।
समीरा हर बार कोई न कोई बहाना बना देती।
अजय को धीरे-धीरे शक होने लगा।
एक रात मोबाइल ने सब बदल दिया
एक रात अजय का फोन खराब हो गया।
उसे जरूरी काम के लिए समीरा का फोन लेना पड़ा।
फोन खोलते ही स्क्रीन पर एक संदेश दिखाई दिया।
"कल वही जगह। अजय को कुछ पता नहीं चलना चाहिए।"
संदेश करण का था।
अजय कुछ सेकंड तक स्क्रीन देखता रहा।
उसने तुरंत समीरा से सवाल नहीं किया।
उसने संदेश का स्क्रीनशॉट अपने फोन में भेज लिया।
और फिर सामान्य व्यवहार करने लगा।
अगले दिन अजय ने दोस्त की परीक्षा लेने का फैसला किया
अजय ने करण को फोन करके कहा—
"मैं दो दिन के लिए शहर से बाहर जा रहा हूं।"
करण ने तुरंत पूछा—
"कब निकल रहे हो?"
अजय ने जानबूझकर कहा—
"आज शाम।"
लेकिन वह शहर से बाहर नहीं गया।
उसने अपनी कार एक दोस्त के घर खड़ी की और खुद वापस घर के आसपास रहने लगा।
रात करीब 10 बजे करण की कार घर के सामने आकर रुकी।
अजय ने दूर से सब देखा।
लेकिन करण अकेला नहीं था
करण के साथ एक दूसरा आदमी भी था।
दोनों घर के अंदर गए।
अजय को उम्मीद थी कि वहां समीरा मिलेगी।
लेकिन कुछ देर बाद करण बाहर आया और उस दूसरे आदमी से बहस करने लगा।
अजय को समझ नहीं आया कि मामला क्या है।
तभी उसने देखा कि समीरा भी घर से बाहर आई।
उसके हाथ में एक छोटा बैग था।
अजय ने पहली बार अपनी पत्नी का पीछा किया
समीरा और करण एक कार में बैठे।
दूसरा आदमी भी उनके साथ था।
कार शहर के बाहर एक पुराने गोदाम के पास जाकर रुकी।
अजय ने कुछ दूरी पर अपनी कार रोक दी।
वह चुपचाप उनका पीछा करते हुए गोदाम तक पहुंचा।
अंदर से आवाजें आ रही थीं।
करण कह रहा था—
"अब इसे और छिपाना मुश्किल है।"
समीरा ने कहा—
"अगर अजय को पता चला तो सब खत्म हो जाएगा।"
अजय के लिए यह सुनना काफी था।
लेकिन तभी तीसरे व्यक्ति ने एक ऐसा नाम लिया जिसे सुनकर अजय के होश उड़ गए।
नाम था—अजय के पिता का
अजय के पिता की मृत्यु तीन साल पहले हो चुकी थी।
तीनों उस मौत से जुड़ी किसी पुरानी बात पर चर्चा कर रहे थे।
अजय को लगा कि शायद मामला उसके विवाह से कहीं ज्यादा बड़ा है।
उसने पुलिस को सूचना देने का फैसला किया।
गोदाम में मिला पुराना संदूक
पुलिस के पहुंचने से पहले अजय ने देखा कि करण एक पुराने संदूक को खोल रहा है।
अंदर जमीन के दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और कुछ पुराने फोटो थे।
एक फोटो में अजय के पिता करण के पिता के साथ दिखाई दे रहे थे।
पीछे तारीख लिखी थी—
2008
अजय ने तस्वीर उठाई।
करण ने उसे देखकर कहा—
"अब तुम्हें सच पता चलना ही चाहिए।"
तीन साल पहले की मौत का राज
करण ने बताया कि अजय के पिता की मृत्यु से पहले उन्होंने एक संपत्ति विवाद की जानकारी जुटाई थी।
परिवार की कुछ जमीन के दस्तावेजों में गड़बड़ी थी।
अजय के पिता ने इसकी जांच शुरू की थी।
लेकिन उनकी अचानक मृत्यु हो गई।
मामला वहीं दब गया।
करण के पास पुराने दस्तावेज थे।
समीरा को भी कुछ समय पहले उन दस्तावेजों के बारे में पता चला था।
इसीलिए दोनों चुपचाप मामले की जांच कर रहे थे।
लेकिन अजय को सबसे बड़ा झटका अभी लगना बाकी था
अजय ने पूछा—
"तो तुम दोनों मेरे पीछे क्यों पड़े थे?"
समीरा की आंखों में आंसू आ गए।
उसने कहा—
"मैं तुम्हें धोखा नहीं देना चाहती थी। लेकिन मुझे डर था कि अगर तुम्हें पहले बताया तो तुम सीधे उन लोगों से भिड़ जाओगे।"
अजय ने पूछा—
"और करण?"
करण ने कहा—
"मैं तुम्हारे पिता से किया हुआ एक पुराना वादा पूरा कर रहा था।"
लेकिन एक बात अभी भी रहस्य थी
अजय को मिले संदेश में लिखा था—
"अजय को कुछ पता नहीं चलना चाहिए।"
समीरा ने बताया कि वह संदेश इसलिए था क्योंकि वे अजय को अचानक यह बताकर खतरे में नहीं डालना चाहते थे।
लेकिन इस बीच करण के फोन से कुछ पुराने संदेश भी मिले थे जिनमें वह किसी अज्ञात व्यक्ति से संपर्क कर रहा था।
अब पुलिस को करण पर भी शक होने लगा।
जांच में खुला असली खेल
पुलिस ने पुराने बैंक रिकॉर्ड और संपत्ति दस्तावेजों की जांच की।
पता चला कि अजय के पिता की जमीन से जुड़े कुछ दस्तावेजों में जालसाजी की गई थी।
कई साल पहले जमीन की कीमत बढ़ने के बाद उसे हड़पने की कोशिश की गई थी।
करण को इस साजिश की जानकारी बाद में मिली थी।
लेकिन वह अकेले सबूत जुटा रहा था।
अजय का सबसे बड़ा भ्रम टूटा
अजय ने सोचा था कि उसकी पत्नी और उसका सबसे अच्छा दोस्त उसे धोखा दे रहे हैं।
लेकिन असल में दोनों एक पुराने पारिवारिक अपराध का सच खोज रहे थे।
हालांकि दोनों ने अजय से सच छिपाकर गलती जरूर की थी।
अजय ने समीरा से कहा—
"मुझे तुम्हारे और करण के बीच के रिश्ते पर शक था।"
समीरा ने जवाब दिया—
"मैं समझ सकती हूं। क्योंकि हमने तुम्हें पूरी सच्चाई कभी बताई ही नहीं।"
आखिरी सबूत ने मामला पलट दिया
गोदाम से मिले दस्तावेजों में एक ऐसा कागज था जिस पर अजय के पिता के हस्ताक्षर की नकल की गई थी।
फोरेंसिक जांच में इसकी पुष्टि हुई।
इसके बाद पुराने संपत्ति विवाद की जांच फिर शुरू हुई।
कई लोगों से पूछताछ हुई।
अजय के पिता की मौत से जुड़े पुराने रिकॉर्ड भी दोबारा देखे गए।
हालांकि उनकी मौत को हत्या साबित करने वाला पर्याप्त सबूत नहीं मिला, लेकिन संपत्ति जालसाजी का मामला मजबूत हो गया।
अंत
अजय ने जिस दोस्त पर पंद्रह साल तक आंख बंद करके भरोसा किया था, उसी पर उसे सबसे पहले शक हुआ।
उसे लगा कि उसकी पत्नी और करण उसके साथ विश्वासघात कर रहे हैं।
लेकिन जिस रात उसने दोनों का पीछा किया...
उसी रात उसे पता चला कि उसके परिवार का एक पुराना राज वर्षों से दबा हुआ था।
समीरा और करण ने सच छिपाकर अजय को जरूर अंधेरे में रखा था।
लेकिन उनका रिश्ता वैसा नहीं था जैसा अजय ने समझ लिया था।
और जिस दोस्त को वह अपना दुश्मन समझ रहा था...
वही उसके पिता से जुड़े पुराने दस्तावेजों को बचाकर बैठा था।
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