हमारी शादी को चार साल हो चुके थे, और हर महीने की तरह इस बार भी मुझे उम्मीद नहीं थी कि वो इस बारे में कुछ खास सोचेंगे। पीरियड के दिनों में मैं हमेशा चिड़चिड़ी और थकी हुई महसूस करती हूं, लेकिन मेरे पति इस बात को हल्के में ही लेते थे। उनके लिए यह कोई बड़ी बात नहीं थी। मुझे भी आदत हो गई थी कि इस दौरान मुझे खुद ही अपना ध्यान रखना होगा।
सुबह उठी तो पहले ही दर्द से हालत खराब थी। चाय बनाई और देखा कि वो हमेशा की तरह तैयार होकर ऑफिस जाने की जल्दी में थे। मैंने हल्का सा इशारा भी दिया, "आज मेरी तबीयत ठीक नहीं लग रही।" उन्होंने मुस्कुराते हुए बस इतना कहा, "अरे, थोड़ा आराम कर लो, ठीक हो जाओगी!" और फिर जल्दी से अपना बैग उठाकर निकल गए।
मैं मन ही मन उदास हो गई। सोचा, "जैसे हर बार, इस बार भी मुझे अकेले ही झेलना होगा।"
करीब 10 बजे उनका फोन आया, "अरे, मेरा वॉलेट कहीं रख दिया था क्या? ज़रा देखोगी?" मुझे लगा, शायद मुझे चेक करने के लिए कह रहे हैं, लेकिन जैसे ही मैंने ड्रॉअर खोला, वहां एक छोटा सा पैकेट रखा था। अंदर एक चॉकलेट और एक छोटा सा नोट था – "थोड़ा मीठा खा लो, मूड अच्छा हो जाएगा।"
मेरा मन अचानक खुशी से भर गया। मैंने उन्हें फोन किया, "ये क्या है?" वो हंसे, "अभी ऑफिस में हूं, बाद में बात करेंगे।"
एक घंटे बाद फिर फोन आया, "अरे, मेरा कोई डॉक्यूमेंट शायद बेड के नीचे गिर गया होगा, देख सकती हो?" मैंने जाकर देखा तो वहां एक गर्म पानी की बोतल रखी थी और साथ में एक और नोट – "थोड़ा आराम कर लो, तुम्हें इससे राहत मिलेगी।"
अब मुझे समझ आ गया कि कुछ अलग चल रहा है।
हर घंटे उनका फोन आता और किसी न किसी बहाने से वो मुझे घर के अलग-अलग हिस्सों में भेजते, और हर बार वहां मेरे लिए कुछ न कुछ रखा होता – कभी हर्बल टी, कभी एक आरामदायक कुशन, कभी एक छोटी सी किताब जिसे मैं पढ़कर अच्छा महसूस करूं।
शाम तक आठ छोटे-छोटे तोहफे मिल चुके थे। अब तो मैं खुद ही अंदाजा लगाने लगी थी कि अगला गिफ्ट कहां होगा! लेकिन नौवां गिफ्ट नहीं मिला।
शाम को वो घर आए, और मैंने उनसे पूछ ही लिया, "अब बताइए, आखिरी गिफ्ट कहां छिपाया है?" वो मुस्कुराए और बोले, "तुम्हें खुद ही ढूंढना होगा।"
मैंने पूरा घर छान मारा, लेकिन कुछ नहीं मिला। फिर उन्होंने मेरी आँखों पर पट्टी बांधी और कहा, "अब खोलो!"
जैसे ही मैंने आंखें खोलीं, सामने एक गर्म सूप का कटोरा रखा था, और साथ में उनका एक प्यारा सा नोट (कागज पर लिखा) – "अब बस आराम करो, बाकी सब मैं संभाल लूंगा।"
उस रात मुझे एहसास हुआ कि प्यार बड़े तोहफों में नहीं, बल्कि छोटे-छोटे ख्यालों में छिपा होता है। मेरे पति की वो बात मुझे जब भी याद आती है आँखें उनके प्यार को महसूस करके भर जाती है।
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