चाचा के प्यार में पागल भतीजी ने माँ-बाप को दिया जहर, फिर चाचा ने ऐसा किया कि सब हैरान रह गए!


 मध्य प्रदेश के एक छोटे से कस्बे में रहता था विक्रम (40), जो एक सरकारी स्कूल में शिक्षक था। उसकी पत्नी गीता (35) और दो बच्चे थे—एक बेटा अमित (10) और एक बेटी प्रिया (18)। विक्रम के छोटे भाई अमर (32) की पत्नी की कुछ साल पहले मौत हो गई थी, जिसके बाद अमर अपने बड़े भाई के घर ही रहने लगा था। अमर बहुत अच्छा दिखता था और उसका व्यवहार बहुत मिलनसार था।


प्रिया को अपने चाचा अमर से बहुत लगाव था। वह उसे "चाचा जी" कहकर पुकारती, लेकिन जैसे-जैसे वह बड़ी होती गई, यह लगाव प्यार में बदल गया। प्रिया चाहती थी कि वह उसके साथ रहे, उससे बात करे, उसकी तारीफ करे। अमर ने कई बार उसे समझाया, लेकिन प्रिया उसकी बात नहीं मानती थी।


एक दिन प्रिया ने अमर से कहा, "चाचा जी, मैं आपसे बहुत प्यार करती हूँ। मैं आपके बिना नहीं रह सकती। हम दोनों क्यों नहीं भाग जाते?" अमर सन्न रह गया। उसने कहा, "तुम मेरी भतीजी हो, मैं तुम्हारा चाचा हूँ। यह बिल्कुल गलत है। तुम्हें किसी और की तरफ देखना चाहिए।" प्रिया नहीं मानी। उसने कहा, "अगर आपने मुझसे शादी नहीं की, तो मैं आत्महत्या कर लूँगी।"


अमर ने यह बात अपने बड़े भाई विक्रम को बताई। विक्रम और गीता को बहुत गुस्सा आया। उन्होंने प्रिया को बहुत डाँटा और उसे कमरे में बंद कर दिया। उन्होंने कहा, "तुम्हें शर्म आनी चाहिए। अपने चाचा के बारे में ऐसा सोचना भी गलत है।" प्रिया रोने लगी, लेकिन उसके मन से अमर का प्यार कम नहीं हुआ।


कुछ दिनों बाद, प्रिया ने एक भयानक प्लान बनाया। उसने सोचा कि अगर उसके माता-पिता नहीं रहे, तो वह अमर के साथ रह सकती है। उसने अपनी माँ और पिता के खाने में चूहा मारने की दवा मिला दी—लेकिन जानलेवा नहीं, बल्कि उन्हें बीमार करने वाली। उसने सोचा था कि जब वे बीमार होंगे, तो अमर उनकी देखभाल करेगा और उसे पास रखेगा। लेकिन अनजाने में, उसकी गणना गलत हो गई और माता-पिता की हालत बहुत बिगड़ गई।


जब विक्रम और गीता की हालत बिगड़ी, तो परिवार ने उन्हें अस्पताल पहुँचाया। डॉक्टरों ने कहा कि उन्हें जहर दिया गया है। पुलिस मामले की जाँच करने लगी। प्रिया डर गई, लेकिन उसने कुछ नहीं बताया। अमर को संदेह हुआ। उसने प्रिया से पूछताछ की तो वह रोने लगी और उसने सब कुछ कबूल कर लिया। उसने कहा, "मैं आपके साथ रहना चाहती थी, इसलिए ऐसा किया।"


अमर को बहुत गुस्सा आया। उसने विक्रम और गीता के ठीक होने का इंतज़ार किया और फिर सबको सच्चाई बता दी। विक्रम और गीता बहुत दुखी हुए, लेकिन उन्होंने प्रिया को माफ नहीं किया। उन्होंने प्रिया को सज़ा दी—उसे सोशल मीडिया और दोस्तों से दूर रखा और मनोचिकित्सक के पास भेजा। अमर उसके बाद कभी अकेले में उससे नहीं मिला और परिवार से दूर रहने लगा। आज प्रिया को अपनी गलती का एहसास है, लेकिन तब बहुत देर हो चुकी थी। उसने अपने माता-पिता को लगभग मार डाला था और अपने चाचा को खो दिया था।

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