पत्नी के फोन में रोज एक ही नंबर आता था, पति ने नंबर मिलाया तो दूसरी तरफ से मिली चौंकाने वाली खबर

 


38 वर्षीय राकेश को पिछले कुछ दिनों से अपनी पत्नी नेहा के व्यवहार में बदलाव महसूस हो रहा था। नेहा के फोन पर रोज देर शाम एक ही नंबर से कॉल आती थी। कॉल आते ही वह दूसरे कमरे में चली जाती और कुछ देर बाद वापस आती। राकेश ने कई बार पूछने की कोशिश की, लेकिन नेहा हर बार यही कहकर बात टाल देती कि किसी परिचित का फोन है।

शुरुआत में राकेश ने इस बात को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया। लेकिन एक रात नेहा नहाने गई तो उसका फोन सोफे पर रह गया। उसी समय फिर उसी नंबर से कॉल आई। राकेश ने स्क्रीन पर नंबर देखा। वह नंबर उसके लिए बिल्कुल अनजान था। कुछ सेकंड बाद कॉल कट गई और उसी नंबर से एक संदेश आया—"कल वाली बात किसी को मत बताना।"

राकेश के मन में शक पैदा हो गया। उसने नेहा से तुरंत सवाल नहीं किया। अगले दिन उसने देखा कि वही नंबर सुबह भी कॉल कर रहा था। इस बार नेहा घर से बाहर निकलकर बात करने लगी। राकेश ने दूर से देखा कि बातचीत के दौरान उसका चेहरा काफी परेशान था।

राकेश को लगा कि मामला किसी प्रेम संबंध से जुड़ा हो सकता है। उसने उस नंबर पर खुद कॉल करने का फैसला किया। फोन दो बार बजा और फिर एक बुजुर्ग आदमी ने कॉल उठाई। राकेश ने बिना अपना नाम बताए पूछा, "आप इस नंबर से मेरी पत्नी को फोन क्यों करते हैं?"

दूसरी तरफ कुछ सेकंड तक खामोशी रही। फिर उस आदमी ने पूछा, "आप राकेश बोल रहे हैं?"

राकेश चौंक गया। उसने पूछा, "आप मुझे कैसे जानते हैं?"

आदमी ने कहा, "अगर आप राकेश हैं तो अपनी पत्नी से कहिए कि वह पुराने मकान वाली फाइल लेकर कल मेरे पास आए।"

इतना कहकर उसने फोन काट दिया।

राकेश अब और परेशान हो गया। उसने नेहा से पुराने मकान और फाइल के बारे में पूछा। नेहा का चेहरा अचानक बदल गया। उसने कहा कि उसे इस बारे में कुछ नहीं पता।

लेकिन राकेश को यकीन नहीं हुआ।

अगली सुबह उसने नेहा का पीछा करने का फैसला किया। नेहा एक ऑटो से शहर के पुराने इलाके में पहुंची और करीब बीस साल पुराने एक मकान के सामने उतर गई। वहां वही बुजुर्ग आदमी पहले से उसका इंतजार कर रहा था।

राकेश कुछ दूरी पर खड़ा होकर दोनों को देखने लगा। उसे उम्मीद थी कि शायद कोई प्रेम संबंध सामने आएगा, लेकिन कुछ ही मिनटों में उसकी पूरी सोच बदल गई।

बुजुर्ग ने नेहा को एक पुरानी फाइल दी। नेहा ने फाइल खोलकर कुछ कागज देखे और अचानक रोने लगी। उसने कहा, "अगर ये सच है तो राकेश को अब सब पता चलना चाहिए।"

राकेश यह सुनकर खुद उनके सामने पहुंच गया।

नेहा उसे देखकर घबरा गई। बुजुर्ग ने राकेश की तरफ देखा और कहा, "अब शायद समय आ गया है कि आपको भी सच्चाई पता चले।"

उस आदमी का नाम हरिदास था। उसने बताया कि वह करीब बीस साल पहले राकेश के पिता की दुकान में काम करता था। राकेश के पिता की अचानक मौत के बाद कारोबार बंद हो गया था। परिवार को बताया गया था कि कारोबार में लगातार नुकसान हो रहा था, लेकिन हरिदास के पास कुछ पुराने दस्तावेज थे जिनसे पता चलता था कि कारोबार से बड़ी रकम किसी दूसरे खाते में भेजी गई थी।

राकेश के पिता ने अपनी मौत से कुछ दिन पहले हरिदास को कुछ कागज सुरक्षित रखने के लिए दिए थे। हरिदास डर गया और उसने उन कागजों को वर्षों तक अपने पास रखा। कुछ महीने पहले उसे पता चला कि राकेश अब उसी पुराने मकान को बेचने की तैयारी कर रहा है, इसलिए उसने नेहा से संपर्क किया।

राकेश ने पत्नी से पूछा कि उसने यह सब उससे क्यों छिपाया।

नेहा ने बताया कि उसे कुछ महीने पहले पुराने सामान में अपने ससुर की एक चिट्ठी मिली थी। चिट्ठी में उसी मकान और कुछ दस्तावेजों का जिक्र था। उसने हरिदास की मदद से उन कागजों को ढूंढना शुरू किया, लेकिन उसे डर था कि अगर बात गलत व्यक्ति तक पहुंच गई तो सारे सबूत गायब हो सकते हैं।

राकेश अभी यह सब समझ ही रहा था कि हरिदास ने फाइल से एक फोटो निकाली। फोटो में राकेश के पिता के साथ एक ऐसा व्यक्ति खड़ा था जिसे राकेश अच्छी तरह जानता था। वह उसके पिता का पुराना कारोबारी साझेदार महेश था।

हरिदास ने बताया कि कारोबार बंद होने के बाद महेश ने काफी संपत्ति खरीदी थी। पुराने बैंक रिकॉर्ड में भी कुछ ऐसे लेनदेन मिले थे जिनका संबंध उसी समय से था। हालांकि दस्तावेजों से केवल शक पैदा होता था, किसी व्यक्ति को अपराधी साबित करने के लिए और सबूत जरूरी थे।

राकेश ने उसी दिन पुलिस को पूरी जानकारी देने का फैसला किया। पुराने दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और फाइल पुलिस को सौंप दी गई। जांच में कुछ संदिग्ध लेनदेन सामने आए और पुराने कारोबारी विवाद की दोबारा जांच शुरू हुई।

सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि राकेश जिस नंबर को अपनी पत्नी के किसी गुप्त प्रेम संबंध का सबूत समझ रहा था, वह नंबर असल में हरिदास का था। नेहा उससे छिपकर इसलिए बात कर रही थी क्योंकि वह अपने ससुर के पुराने कारोबार से जुड़ा सच पता लगाने की कोशिश कर रही थी।

राकेश को अपनी पत्नी पर शक करने का अफसोस हुआ, लेकिन नेहा ने भी माना कि उससे बड़ी गलती हुई थी। अगर वह शुरुआत में ही राकेश को सब कुछ बता देती तो शायद इतने दिनों तक दोनों के बीच गलतफहमी पैदा नहीं होती।

मामले की जांच आगे बढ़ी, लेकिन राकेश के पिता की मौत को लेकर किसी तरह का अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया। पुलिस ने पुराने वित्तीय रिकॉर्ड और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच जारी रखी।

राकेश को उस दिन सिर्फ एक बात समझ आई—कभी-कभी फोन पर आने वाला एक अनजान नंबर जिस राज की ओर इशारा करता है, वह आपकी सोच से बिल्कुल अलग हो सकता है।

0/Post a Comment/Comments