मिथुन चक्रवर्ती का 90 के दशक में 'बी' और 'सी' ग्रेड फिल्मों की तरफ मुड़ना कोई मजबूरी नहीं, बल्कि एक बहुत ही सोची-समझी बिज़नेस स्ट्रेटजी थी। जब मुंबई के बड़े निर्माता-निर्देशक खान त्रयी (शाहरुख, आमिर, सलमान) के साथ बड़े बजट की फिल्मों में व्यस्त हो रहे थे, तब मिथुन दा ने अपना एक अलग साम्राज्य खड़ा कर लिया था।
90 के दशक की शुरुआत में मिथुन दा मुंबई छोड़कर ऊटी बस गए थे। वहां उन्होंने अपना 'मोनार्क' होटल शुरू किया। उन्होंने फिल्म निर्माताओं के सामने एक शर्त रखी थी:
- फिल्म की पूरी शूटिंग ऊटी में ही होगी।
- फिल्म की पूरी यूनिट उनके 'मोनार्क' होटल में ही रुकेगी।
इससे निर्माताओं को रहने-खाने पर भारी डिस्काउंट मिलता था और मिथुन दा के होटल का बिज़नेस भी साल भर चलता रहता था।
उन्होंने अपनी एक समानांतर फिल्म इंडस्ट्री खड़ी कर ली थी जिसे 'Mithun’s Dream Factory' कहा जाता था।
- वह सुबह 9 से शाम 6 बजे तक ही शूटिंग करते थे, जिससे वह अपने परिवार और होटल बिज़नेस को समय दे पाते थे।
- ये फिल्में बहुत कम बजट (करीब 1 से 1.5 करोड़ रुपये) में 30-40 दिनों में बनकर तैयार हो जाती थीं। छोटे शहरों और सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों में ये फिल्में जबरदस्त कमाई करती थीं, इसलिए डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए मिथुन दा एक 'सुरक्षित निवेश' बन गए थे।
- जबकि बॉलीवुड एलीट क्लास और मल्टीप्लेक्स की तरफ बढ़ रहा था, मिथुन दा ने टियर-2 और टियर-3 शहरों के दर्शकों पर अपनी पकड़ बनाए रखी। गुंडा, जल्लाद, और शेर-ए-हिंदुस्तान जैसी फिल्में इसी दौर की हैं। इन फिल्मों की क्वालिटी भले ही कमजोर थी, लेकिन इनके डायलॉग और एक्शन मास ऑडियंस के बीच बेहद लोकप्रिय थे।
मिथुन दा ने एक इंटरव्यू में स्वीकार किया था कि उन्होंने ये फिल्में अपने परिवार और होटल कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा के लिए की थीं।
इसी दौर की वजह से उनके नाम बतौर लीड एक्टर सबसे ज्यादा फिल्में (करीब 250 से ज्यादा) करने का रिकॉर्ड दर्ज हुआ।
आपको जानकर हैरानी होगी कि 1995 से 1999 के बीच, जब वो ये तथाकथित 'बी ग्रेड' फिल्में कर रहे थे, तब वह भारत के सबसे ज्यादा इनकम टैक्स भरने वाले अभिनेताओं में से एक थे।
भले ही इन फिल्मों की आलोचना हुई, लेकिन इसी दौरान मिथुन दा ने तहदेर कथा (1992) और स्वामी विवेकानंद (1998) जैसी फिल्मों के लिए नेशनल अवॉर्ड भी जीते। यानी वह एक तरफ बिज़नेस के लिए मसाला फिल्में कर रहे थे और दूसरी तरफ अपनी कला को भी जीवित रखे हुए थे।
नमोस्तुते!
सभी चित्र गूगल से साभार…
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