बादशाह अकबर पूरे भारत पर राज करते थे अनेकों बेगम थीं लेकिन औलाद सुख से वंचित थे हर तरह के नीम हकीम आ चुके थे लेकिन अकबर को औलाद नहीं हो रही थी, एक दिन एक दरबारी ने कहा कि शहंशाह आप गुरू के दर्शन कर लो गुरूजी बहुत पहुंचे हुए हैं।
अकबर धर्म के प्रति कट्टर सोच नहीं रखता था इसलिए पंजाब में गुरू अमरदास जी के डेरे पर जा पहुंचा, गुरु अमरदास जी को उनके शिष्यों बताया कि बादशाह आ रहे हैं क्या उन्हें सीधे आपसे मिलवा दिया जाए? गुरूजी ने कहा कि यहां आने वाला हर व्यक्ति मेरे लिए बादशाह है और पहले पंगत होती है उसके बाद संगत होती है अतः बादशाह को पहले पंगत में लंगर छकना पडेगा।
अकबर पंगत में लंगर छकने बैठा तो रुखे सुखे भोजन में बड़ा आनंद आया, गुरु अमरदास जी से मिलते ही पूछ बैठा कि गुरूजी मेरे पास एक से बढ़कर एक रसोईया , खानसामा आदि हैं हिंदूस्तान के सबसे बेहतरीन व्यंजन बनते हैं लेकिन जो आनंद यहां लंगर छकने में आया वो कभी राजभवन के भोजन में भी नहीं आया ऐसा क्यों?
गुरूजी ने कहा कि बादशाह तुम्हारे खजाने में जो धन जमा होता है वो किसी से कौड़े मारकर लिया जाता है किसी को डराकर लिया जाता है कहीं कुछ और पाप होता है अतः वह पाप से भरी हुई कमाई है। जबकि जो आपने पंगत में लंगर छका है ये संगत के नाखुनों की कमाई है और इस भोजन की मिठास उसी चीज़ से आई है।
बादशाह ने हाथ जोड़कर कहा कि गुरूजी मैं सारे हिन्दुस्तान का बादशाह हूं लेकिन मेरी एक भी औलाद नहीं है, गुरू अमरदास जी ने अकबर को आशीर्वाद दिया और उसके बाद अकबर के घर सलीम का जन्म हुआ जोकि जहांगीर के नाम से मशहूर हुआ।
कहते हैं कि बहुत इंतजार के बाद अगर औलाद हो तो माता पिता को बहुत प्यारी होती है तो सलीम के पैदा होने पर बादशाह अकबर ने राजकाज के बहुत काम होते हुए भी उसे बहुत समय दिया, उसके साथ खेलता बातें करने की कोशिश करता। अकबर एक बार सलीम के साथ खेल रहा था नवजात सलीम भी पालने में लेटा हुआ पैर पटक पटक कर हंस रहा था।
उस समय कमरे में मौजूद दासी पोचा लगा रही थी तभी अकबर ने कहा कि दासी देखो सलीम कितना सुंदर बालक है । दासी ने कहा कि बादशाह ये हिंदुस्तान के बादशाह का लड़का है भला इससे सुंदर कौन हो सकता है? बादशाह ने कहा कि देखो जब ये हंसता है तो ऐसा लगता है जैसे कुदरत हंस पड़ी हो। दासी ने कहा कि बादशाह ऐसी हंसी मैंने तो कहीं देखी नहीं। दासी थी बेचारी और क्या कहती सामने बादशाह था।
कुछ देर बाद बादशाह फिर बोला दासी क्या इससे भी सुंदर बच्चा हो सकता है? दासी ने कहा कि बादशाह मैंने अपनी जिंदगी में इससे सुंदर बच्चा कभी नहीं देखा लेकिन चेहरे मोहरे भगवान बनाता है हो सकता है कोई इससे भी सुंदर बच्चा हो। अकबर ने कहा कि दासी तू पुरे फतेहपुर सीकरी में घूम और सलीम से सुंदर बच्चा मिल जाए तो दिखाओ मैं उसके मां बाप की झोली मालामाल कर दूंगा।
दासी कई दिनों तक घुमी और जब वापस आई तो दासी का घुम घुमकर बूरा हाल हो रहा और उसने अपने बदन से एक बच्चा चिपका रखा था और उस बच्चे को किसी भी सूरत में सलीम से सुंदर नहीं कह सकते वो कुरुप बच्चा था। दासी को देखते ही बादशाह ने पूछा कि आ गई दासी? मिल गया सुंदर बच्चा?
दासी ने कहा कि हां बादशाह मिल गया। बादशाह ने कहा सलीम से भी सुंदर बच्चा? चल दिखा इसको। दासी ने जैसे ही बच्चा बादशाह के सामने किया बादशाह का मुड़ बदल गया। बोला कि तू मेरी बात को मजाक समझ रही है क्या? मैंने कहा था सबसे सुंदर बच्चा और तू ये कुरूप बच्चा ले आई।
सिर झुकाकर दासी ने कहा बादशाह मैं पूरी नगरी में घुम ली लेकिन अपने बेटे से सुंदर कोई नहीं लगा आपका सलीम भी नहीं लगा।
ऐसा सुनकर बादशाह प्रसन्न हो गया और बोला तुमने सही कहा एक मां के लिए अपने बच्चे से सुंदर कोई नहीं हो सकता और हम तुम्हारी सच्चाई की कद्र करते हुए तुम्हें सोने की अशर्फियों से तौलने की घोषणा करते हैं।
दुनिया की नजर में सुंदरता चेहरे से होती है, लेकिन माँ की नजर में उसका बच्चा सुंदर नहीं होता बल्कि वह सुंदरता की परिभाषा ही होता है।
Post a Comment