बस में भीड़ देखकर दिल धक से रह गया। जितनी बार भी भीड़ को धक्का देकर चढ़ी हूँ, कोई न कोई मौका देखकर शरीर को छूने की कोशिश करता है।
लेकिन कोई उपाय नहीं था। घर जाने के लिए यही आख़िरी बस थी। किसी तरह दरवाज़े का हैंडल पकड़कर लटक गई। बस चलना शुरू हो गई। पसीने की वजह से बार-बार हाथ फिसल रहा था।
डर बढ़ता जा रहा था। बस अब काफ़ी तेज़ चल रही थी, लेकिन मेरी हालत बहुत खराब थी। अगर हाथ छूट जाता तो गिरकर बुरी तरह घायल होना तय था।
हाथ में तेज़ दर्द हो रहा था। पूरी ताकत लगाकर हैंडल पकड़े हुए थी, दर्द से आँखों में आँसू आ गए थे।
जैसे ही दर्द की वजह से हाथ छूटने वाला था, तभी एक मज़बूत हाथ ने झट से मेरा हाथ पकड़ लिया। घबराकर और डर से सिमटते हुए मैंने कहा,
“कृपया हाथ मत छोड़िए, मैं गिर जाऊँगी।”
जवाब आया,
“नहीं छोड़ूँगा।”
उस लड़के ने न जाने क्या सोचकर मेरा हाथ पकड़ा, और फिर कभी छोड़ा ही नहीं। हमारी शादी को आज 6 साल हो गए हैं। अब भी वह मेरा हाथ थामे हुए है। लगता है, कभी नहीं छोड़ेगा। उसका स्पर्श सच में कुछ अलग ही था!!!
Post a Comment