आराम से जो मरे वो सुखी : Akbar Birbal Ki Kahani

बीरबल बोले, “हुजूर, कोई आदमी कितना सुखी है या कितना दुःखी है, इसका पता तो उसके मरने के बाद ही चल पाता है।”

“बीरबल, तुम क्या कहना चाहते हो, हम समझे नहीं।” शहंशाह अकबर ने कहा।

बीरबल बोले, “जहांपनाह, आज जो आदमी सुखी है, वही कल को मुसीबत में पड़कर दुखी हो जाता है। फिर ऐसे में किसी जिंदा व्यक्ति को कैसे सुखी या दुखी कहा जा सकता है।

यहाँ अनगिनत ऐसे आदमी हैं, जो दिखते तो सुखी हैं, पर उनका दिल दुःखों से भरा पड़ा है। फिर उन्हें सुखी कैसे कहा जा सकता है। हुजूर, मेरी राय में तो जो व्यक्ति सुखपूर्वक मरता है, वही सुखी होता है।’

बीरबल के इस जवाब को सुनकर शहंशाह बहुत प्रसन्न हुए और उनकी तारीफ करने लगे।

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