बनना चाहती थी दरोगा, मां ने कहा- इसकी शादी कर दो... 80 बार हुई फेल, फिर लिख दी कामयाबी की गजब कहानी

Success Story: उषा का जो सपना अधूरा था, आखिरकार वो पूरा हो गया। यूपी पुलिस में भर्ती होने की चाह रखने वालीं उषा भले हीं दरोगा नहीं बन पाईं, लेकिन वो कर दिखाया, जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। आज उनकी कामयाबी के चर्चे दूर-दूर तक हैं और उनकी कहानी दूसरी महिलाओं को भी प्रेरणा दे रही हैं।

नई दिल्ली: उसे दरोगा बनना था। बचपन से ही ख्वाहिश थी कि वो कुछ ऐसा करे, जिससे बाकी लड़कियों को भी प्रेरणा मिले। यूपी पुलिस में भर्ती होने की बात जब उसने अपने पिता को बताई, तो उन्हें बड़ी खुशी हुई और वो बेटी को सपोर्ट करने के लिए तैयार हो गए। लेकिन, मां को बेटी का ये फैसला पसंद नहीं आया। उन्होंने कह दिया कि वो नहीं चाहतीं कि उनकी बेटी पुलिस में भर्ती हो। उन्होंने पति से कहा, लड़की की उम्र हो गई है, इसके लिए लड़का तलाशिए और शादी के बारे में सोचिए। आखिरकार उसे अपने परिवार के आगे झुकना पड़ा और उसकी शादी हो गई। लेकिन, उस लड़की ने हार नहीं मानी और उम्र के जिस पड़ाव पर लोग रिटायर हो जाते हैं, वहां उसने कामयाबी की एक शानदार कहानी लिख दी।

ये कहानी है उत्तर प्रदेश के सम्भल जिले में रहने वाली उषा श्रोतिया की, जिन्होंने 62 साल की उम्र में वो कर दिखाया, जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल हैं। दरअसल, उषा ने घर में तैयार होने वाले ड्राई फ्रूट्स के लड्डुओं को बार (चॉकलेट की तरह) की शक्ल में बदल दिया। उनके इस आइडिया से घर के बाहर भी लोगों को स्वास्थ्यवर्धक ड्राई फ्रूट्स लड्डू खाने को मिलने लगे। इन्हें ऑफिस के लिए बैग में रखकर ले जाना आसान हो गया। उषा को घर के बने लड्डुओं को बार में बदलने का आइडिया कैसे आया, इसकी कहानी भी काफी दिलचस्प है।

80 बार मिली नाकामयाबी

दरअसल, कॉर्पोरेट जॉब करने वाले उषा के बेटे यश जब एक बार विदेश यात्रा पर गए, तो उन्हें अपनी मां के हाथ के लड्डू बहुत याद आए। हालांकि, मजबूरी ये थे कि लड्डू जैसी मिठाई को ऑफिस बैग में रखकर ले जाना आसान नहीं था। बस यहीं से उषा को आइडिया मिल गया। उन्होंने लड्डुओं को बार में बदलने के आइडिया पर काम करना शुरू कर दिया। दे बेटर इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, उषा को शुरुआत में 80 बार नाकामयाबी का सामना करना पड़ा। आखिर में उषा अपने आइडिया में सफल हुईं और 'मामा नॉरिश' से अपने फूड स्टार्टअप की शुरुआत कर दी।

दादी-नानी की परंपरा को बचाने की कोशिश

उषा के बेटे यश बताते हैं कि उन्हें यकीन नहीं था कि उनकी मां इन लड्डू से 'बार' बना पाएगी। यश और उनकी पत्नी मजाक में अक्सर मां के बने 'बार' को एक-दूसरे पर फेंकते थे ताकि उनकी कठोरता को चेक किया जा सके। हालांकि, उषा ने इसे अपने लिए एक चुनौती समझा और आखिरकार कामयाबी पा ली। अपने मामा नॉरिश ब्रांड के तहत उषा लड्डुओं को 'बार' के रूप में घर-घर पहुंचाती हैं। मामा नॉरिश का मकसद दादी-नानी के पारंपरिक व्यंजनों को मॉर्डन रूप देकर उन्हें लोगों तक पहुंचाना है।

250 लोगों से सर्वे के बाद शुरू किया मामा नॉरिश

उषा के बेटे यश ने अपने दोस्त कुणाल गोयल के साथ मिलकर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, पुणे और बेंगलुरु में 250 कामकाजी लोगों से बातचीत कर एक सर्वे किया। इस सर्वे का मकसद यह जानना था कि क्या ये समस्या वाकई इतनी गंभीर है। यश बताते हैं कि सर्वे से पता चला कि कामकाजी लोगों को दादी-नानी का खाना बहुत पसंद आता है और वे इस विरासत को खोते हुए नहीं देखना चाहते। उषा बाजरा, मेथी, सूखे मेवे, अदरक और कमरकस के बीजों से बने लड्डू बार बनाती हैं। आज वो 150 से ज्यादा बड़ी कंपनियों को अपने लड्डू बार बेच चुकी हैं।

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