पत्नी रात-रात भर एक अनजान आदमी से मिलती थी, पति ने पीछा किया तो सामने आया 7 साल पुराना ऐसा रहस्य जिसे परिवार ने दफना दिया था

 


विकास को पिछले कुछ महीनों से अपनी पत्नी संगीता के व्यवहार में बदलाव महसूस हो रहा था। शादी को करीब नौ साल हो चुके थे और दोनों की जिंदगी बाहर से बिल्कुल सामान्य दिखाई देती थी। विकास एक निजी कंपनी में काम करता था और अक्सर शाम तक ऑफिस में रहता था। संगीता घर संभालती थी, लेकिन पिछले कुछ समय से वह विकास के घर से निकलने के बाद कई बार बाहर जाने लगी थी।

विकास जब भी पूछता कि कहां जा रही हो, संगीता कोई न कोई बहाना बना देती। कभी वह कहती कि पड़ोस में जा रही है, कभी किसी रिश्तेदार के यहां और कभी बाजार का काम बताती। विकास ने शुरुआत में इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन एक दिन उसने देखा कि संगीता के फोन पर एक ही नंबर से लगातार कॉल आ रही थीं। वह फोन उठाती और तुरंत दूसरे कमरे में चली जाती।

एक रात विकास ने पूछा, "किसका फोन है?"

संगीता ने कहा, "एक जानने वाले का है।"

विकास ने पूछा, "कौन जानने वाला?"

संगीता ने जवाब नहीं दिया।

उस रात विकास देर तक सो नहीं पाया। उसके मन में शक पैदा होने लगा कि शायद उसकी पत्नी उससे कोई बड़ा राज छिपा रही है।

कुछ दिनों बाद संगीता ने बताया कि उसे रात में अपनी एक सहेली के घर जाना है। विकास ने कुछ नहीं कहा, लेकिन इस बार उसने चुपचाप उसका पीछा करने का फैसला किया।

संगीता घर से निकली और करीब बीस मिनट बाद शहर के पुराने हिस्से में स्थित एक सुनसान मकान के सामने पहुंची। विकास ने अपनी गाड़ी कुछ दूरी पर रोक दी। उसने देखा कि संगीता ने आसपास देखा और फिर मकान का दरवाजा खोलकर अंदर चली गई।

विकास को लगा कि आखिर उसका शक सही साबित हो गया है।

करीब पंद्रह मिनट बाद एक युवक वहां पहुंचा। उसने भी दरवाजा खटखटाया और अंदर चला गया।

विकास का गुस्सा बढ़ गया।

वह तुरंत अंदर जाने ही वाला था कि उसे लगा पहले देखना चाहिए कि अंदर हो क्या रहा है।

कुछ देर बाद उसे कमरे के अंदर से तेज आवाज में बहस सुनाई दी।

संगीता कह रही थी, "मैंने कहा था कि अब इस मामले को यहीं खत्म करो।"

युवक ने जवाब दिया, "जब तक असली कागज नहीं मिलेंगे, यह मामला खत्म नहीं होगा।"

विकास यह सुनकर रुक गया।

उसे कुछ समझ नहीं आया।

अगर यह प्रेम संबंध था तो वे किसी कागज की बात क्यों कर रहे थे?

कुछ मिनट बाद दरवाजा खुला और युवक बाहर आया। विकास ने उसका चेहरा देखा तो वह हैरान रह गया। वह युवक अमन था, जो कभी उसके बड़े भाई राकेश के साथ कारोबार में काम करता था।

विकास ने अमन का रास्ता रोक लिया।

अमन उसे देखकर घबरा गया।

विकास ने पूछा, "तुम यहां क्या कर रहे हो?"

अमन कुछ बोलता, उससे पहले संगीता भी बाहर आ गई।

विकास ने पत्नी से पूछा, "अब बताओ असली बात क्या है?"

संगीता की आंखों में आंसू आ गए। उसने कहा कि वह काफी समय से एक पुराने मामले की सच्चाई पता लगाने की कोशिश कर रही थी।

करीब सात साल पहले विकास के बड़े भाई राकेश की अचानक मौत हो गई थी। परिवार ने इसे बीमारी से हुई सामान्य मौत माना था। लेकिन कुछ महीने पहले संगीता को राकेश की पुरानी फाइलों में एक पत्र मिला था।

पत्र में राकेश ने लिखा था कि उसके कारोबार के कुछ पैसे गायब हो रहे हैं और उसे शक है कि किसी करीबी व्यक्ति ने उसके साथ धोखा किया है।

संगीता ने वह पत्र विकास को इसलिए नहीं दिखाया क्योंकि उसमें एक ऐसा नाम था जिसे देखकर परिवार में बड़ा विवाद हो सकता था।

विकास ने पूछा, "किसका नाम था?"

संगीता ने जवाब देने से पहले कुछ सेकंड उसकी तरफ देखा।

फिर उसने कहा, "तुम्हारे अपने चाचा का।"

विकास के होश उड़ गए।

उसने पूछा, "तुमने मुझसे यह बात इतने दिनों तक क्यों छिपाई?"

संगीता ने बताया कि उसे खुद यकीन नहीं था कि पत्र में लिखी बात सच है। इसलिए उसने अमन से संपर्क किया, क्योंकि वह राकेश के साथ काम करता था और पुराने कारोबार के बारे में बहुत कुछ जानता था।

अमन ने बताया कि राकेश की मौत से कुछ समय पहले उसने कई दस्तावेज अलग करके रखे थे। लेकिन मौत के बाद वे दस्तावेज गायब हो गए।

संगीता और अमन पिछले कई हफ्तों से उन्हीं दस्तावेजों को ढूंढ रहे थे।

विकास ने पूछा, "तो इस बंद मकान में क्या है?"

अमन ने कमरे के कोने में रखी एक पुरानी लकड़ी की अलमारी की तरफ इशारा किया।

अलमारी के पीछे एक छोटा सा लोहे का बॉक्स छिपा हुआ था।

बॉक्स खोलने पर उसमें पुराने बैंक रिकॉर्ड, जमीन के कागज और एक डायरी मिली।

विकास ने डायरी खोली।

उसमें राकेश ने कई तारीखों के सामने रकम लिख रखी थी। कुछ रकम ऐसे खातों में गई थीं जिनके बारे में विकास ने कभी नहीं सुना था।

लेकिन आखिरी पन्ने पर लिखी एक लाइन ने उसे सबसे ज्यादा परेशान कर दिया।

"अगर मेरे साथ कुछ हो जाए तो उस व्यक्ति पर भरोसा मत करना जो सबसे पहले मेरे परिवार के पास पहुंचेगा।"

विकास ने पूछा, "राकेश ने यह किसके बारे में लिखा था?"

अमन ने कहा, "हमें नहीं पता।"

उसी समय संगीता के फोन पर एक संदेश आया।

मैसेज में सिर्फ इतना लिखा था—

"तुम लोगों ने बॉक्स खोल दिया है, अब बहुत देर हो चुकी है।"

तीनों कुछ सेकंड तक एक-दूसरे को देखते रहे।

विकास ने तुरंत पुलिस को सूचना देने का फैसला किया।

पुलिस के आने के बाद पुराने दस्तावेज सुरक्षित किए गए। बैंक रिकॉर्ड की जांच शुरू हुई। जांच में सामने आया कि राकेश के कारोबार से वर्षों पहले बड़ी रकम अलग-अलग खातों में भेजी गई थी।

कुछ खातों का संबंध उसी कारोबारी नेटवर्क से निकला जिससे विकास के चाचा जुड़े हुए थे।

लेकिन पुलिस ने केवल इस आधार पर किसी को दोषी नहीं माना। पुराने दस्तावेजों, हस्ताक्षरों और बैंक रिकॉर्ड की विस्तृत जांच शुरू की गई।

जांच के दौरान एक और तथ्य सामने आया। जिस मकान में संगीता और अमन मिल रहे थे, वह मकान राकेश के पुराने कारोबारी साझेदार के नाम था। कई साल पहले राकेश ने वहां कुछ दस्तावेज सुरक्षित रखे थे।

विकास को अब समझ आ गया कि उसकी पत्नी उससे कोई प्रेम संबंध नहीं छिपा रही थी। वह एक पुराने मामले का सच खोज रही थी।

लेकिन उसके मन में एक सवाल अब भी था।

अगर संगीता इतने दिनों से राकेश की मौत और कारोबार से जुड़े सबूत खोज रही थी, तो उसने विकास को पहले ही सब कुछ क्यों नहीं बताया?

संगीता ने कहा, "क्योंकि मुझे डर था कि जिस आदमी का नाम सामने आएगा, उसे देखकर तुम शायद मेरी बात पर विश्वास ही नहीं करोगे।"

विकास चुप रहा।

उसे अपनी पत्नी पर शक करने का अफसोस था, लेकिन अब मामला सिर्फ उनके रिश्ते का नहीं था।

यह उनके परिवार के सात साल पुराने रहस्य का मामला बन चुका था।

पुलिस ने दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए और पुराने वित्तीय लेनदेन की जांच शुरू कर दी। राकेश की मौत को लेकर भी पुराने रिकॉर्ड की समीक्षा की गई, लेकिन उस समय उपलब्ध जानकारी के आधार पर उसकी मौत को अपराध से जोड़ने वाला कोई निर्णायक सबूत सामने नहीं आया।

मामला आगे बढ़ता रहा।

विकास को उस रात सिर्फ एक बात समझ आई—जिस महिला पर वह किसी दूसरे आदमी से छिपकर मिलने का शक कर रहा था, वही उसके परिवार के सबसे पुराने रहस्य का सच सामने लाने की कोशिश कर रही थी।

लेकिन असली सवाल अभी भी बाकी था—

राकेश ने अपनी मौत से पहले आखिर किस व्यक्ति से खतरा बताया था, और वह रहस्यमयी संदेश भेजने वाला कौन था?

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