पति की मौत के 6 साल बाद पत्नी को अलमारी के पीछे मिला मोबाइल, वीडियो चलाया तो पति की आखिरी बात सुनकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई


छह साल पहले नरेश की मौत एक सड़क हादसे में हो गई थी। रात करीब साढ़े ग्यारह बजे उसकी कार शहर से बाहर जाने वाली सड़क पर एक पेड़ से टकराई मिली थी। पुलिस जांच में उस समय इसे सड़क दुर्घटना माना गया था। परिवार ने भी यही समझकर मामला खत्म कर दिया था। नरेश की पत्नी माधवी और उसका छोटा बेटा तब से उसी घर में रह रहे थे।

छह साल बाद एक दिन माधवी घर की पुरानी अलमारी साफ कर रही थी। अलमारी के पीछे उसे एक पुराना मोबाइल फोन मिला। फोन काफी समय से बंद था, लेकिन उसे चार्ज करने पर वह अचानक चालू हो गया। माधवी ने फोन में पड़े पुराने फोटो और वीडियो देखने शुरू किए। तभी उसे एक ऐसा वीडियो मिला जिसे देखकर उसके हाथ कांपने लगे।

वीडियो में नरेश अपनी कार के अंदर बैठा था और कैमरा सामने रखकर किसी से बात कर रहा था। वह बार-बार कह रहा था कि अगर उसके साथ कुछ गलत होता है तो उसके ऑफिस की पुरानी फाइल जरूर जांची जाए।

माधवी को यह देखकर समझ नहीं आया कि नरेश ने ऐसा वीडियो क्यों बनाया था।

उसने वीडियो को कई बार देखा। वीडियो के आखिर में नरेश ने सिर्फ इतना कहा था, "जिस आदमी पर मैंने भरोसा किया, वही सब जानता है।"

इसके बाद रिकॉर्डिंग खत्म हो गई।

माधवी ने उसी रात अपने पुराने पड़ोसी रमेश को फोन किया। रमेश को छह साल पुरानी दुर्घटना अच्छी तरह याद थी। उसने बताया कि हादसे वाली रात नरेश ने उसे फोन किया था और कहा था कि वह किसी जरूरी काम से बाहर जा रहा है।

माधवी ने पूछा, "क्या उसने कुछ और कहा था?"

रमेश कुछ देर चुप रहा।

फिर उसने कहा, "उसने बस इतना कहा था कि अगर वह सुबह तक वापस नहीं आया तो उसके ऑफिस की अलमारी देखना।"

माधवी के पैरों तले जमीन खिसक गई।

अगर नरेश ने सच में ऐसा कहा था तो फिर उसकी ऑफिस की अलमारी में ऐसा क्या था?

अगले दिन माधवी नरेश के पुराने ऑफिस पहुंची। कंपनी का पुराना कार्यालय अब बंद हो चुका था और वहां दूसरी फर्म काम कर रही थी। काफी कोशिश के बाद उसे पता चला कि नरेश की पुरानी फाइलें एक गोदाम में रखी गई थीं।

माधवी वहां पहुंची तो उसे एक पुरानी फाइल मिली।

फाइल में नरेश के कारोबार से जुड़े कुछ कागज और बैंक लेनदेन थे। कुछ रकम ऐसे खातों में भेजी गई थी जिनका नरेश से कोई सीधा संबंध नहीं था।

फाइल के आखिरी पन्ने पर नरेश की लिखावट में एक नाम था—विक्रम

विक्रम नरेश का करीबी दोस्त और कारोबारी साझेदार था।

माधवी को याद आया कि नरेश की मौत के बाद विक्रम सबसे पहले उनके घर पहुंचा था। उसने अंतिम संस्कार से लेकर बैंक और कारोबार के कई कामों में परिवार की मदद की थी।

अब माधवी को पहली बार उस पर शक हुआ।

लेकिन वह सीधे किसी पर आरोप नहीं लगाना चाहती थी।

उसने पुराने हादसे की पुलिस फाइल निकलवाने की कोशिश की। जांच में उसे पता चला कि दुर्घटना वाली रात नरेश की कार के ब्रेक में खराबी की बात दर्ज हुई थी, लेकिन उस समय वाहन की तकनीकी जांच का पूरा रिकॉर्ड फाइल में मौजूद नहीं था।

माधवी ने यह जानकारी पुलिस को दी।

पुलिस ने पुराने वाहन रिकॉर्ड और केस डायरी दोबारा देखी। जांच के दौरान पता चला कि दुर्घटना से कुछ दिन पहले नरेश ने अपनी कार की सर्विस कराई थी और सर्विस सेंटर के रिकॉर्ड में ब्रेक सिस्टम में किसी बड़ी खराबी का उल्लेख नहीं था।

अब मामला संदिग्ध हो गया।

पुलिस ने विक्रम से पूछताछ की।

विक्रम ने कहा कि नरेश की मौत एक दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना थी और उसका इससे कोई लेना-देना नहीं था।

लेकिन जब उससे पुराने कारोबारी लेनदेन के बारे में पूछा गया तो उसके बयान में कई बातें मेल नहीं खाईं।

इसी दौरान माधवी को वही पुराना मोबाइल फिर से देखना याद आया। उसने वीडियो की तारीख देखी।

वीडियो हादसे वाली रात का नहीं था।

वह वीडियो हादसे से तीन दिन पहले रिकॉर्ड किया गया था।

माधवी ने फोन की बाकी फाइलें जांचीं।

उसे एक ऑडियो रिकॉर्डिंग मिली।

रिकॉर्डिंग में नरेश किसी व्यक्ति से बहस कर रहा था।

आवाज साफ नहीं थी, लेकिन एक लाइन स्पष्ट सुनाई दे रही थी—

"अगर तुमने पैसे वापस नहीं किए तो मैं सबको बता दूंगा।"

पुलिस ने ऑडियो की जांच शुरू की।

इसी बीच जांच में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई। नरेश के खाते से दुर्घटना से एक दिन पहले एक बड़ी रकम निकाली गई थी। वह रकम उसी दिन एक ऐसे खाते में पहुंची थी जो विक्रम के कारोबारी संपर्क से जुड़ा था।

विक्रम ने फिर भी इसे संयोग बताया।

लेकिन पुलिस ने उसके पुराने बैंक रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी।

कुछ दिनों बाद पुलिस को पता चला कि हादसे वाली रात विक्रम का फोन उस इलाके के आसपास सक्रिय था जहां नरेश की कार मिली थी। हालांकि सिर्फ मोबाइल लोकेशन से किसी व्यक्ति की मौजूदगी या अपराध साबित नहीं होता, इसलिए पुलिस ने अन्य सबूत भी जुटाने शुरू किए।

माधवी के लिए अब छह साल पुरानी दुर्घटना एक साधारण हादसा नहीं रह गई थी।

उसने अपने पति को खो दिया था, लेकिन पहली बार उसे लग रहा था कि शायद उसने उस रात जो कुछ हुआ था उसका असली कारण कभी जाना ही नहीं।

पुलिस ने पुराने वाहन की दोबारा तकनीकी जांच कराई। जांच में वाहन के ब्रेक सिस्टम से जुड़े कुछ ऐसे संकेत मिले जिनकी उस समय पूरी तरह जांच नहीं हुई थी।

अब पुलिस ने पुराने केस को नए तथ्यों के आधार पर दोबारा जांचना शुरू किया।

विक्रम से फिर पूछताछ हुई।

इस बार उसके बयान में एक और विरोधाभास सामने आया।

उसने कहा था कि वह हादसे वाली रात अपने घर पर था, लेकिन कुछ पुराने रिकॉर्ड और गवाहों के बयान उसके इस दावे से पूरी तरह मेल नहीं खाते थे।

माधवी ने छह साल बाद पहली बार अपने पति के पुराने कमरे में बैठकर वह मोबाइल वीडियो फिर देखा।

नरेश की आखिरी लाइन उसके कानों में गूंज रही थी—

"जिस आदमी पर मैंने भरोसा किया, वही सब जानता है।"

अब उसे समझ आ रहा था कि नरेश शायद किसी खतरे का अंदाजा लगा चुका था।

मामले की जांच जारी रही। पुराने बैंक रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा, वाहन की तकनीकी रिपोर्ट और कारोबारी दस्तावेजों को दोबारा जोड़ा गया।

माधवी के लिए सबसे बड़ा सवाल अब यही था कि अगर नरेश को खतरे का अंदाजा था तो उसने पुलिस को पहले ही सब कुछ क्यों नहीं बताया?

और विक्रम आखिर ऐसा क्या छिपा रहा था जिसे नरेश अपनी मौत से कुछ दिन पहले सामने लाने वाला था?

छह साल तक जिस घटना को परिवार एक सड़क हादसा समझकर भूल चुका था, उसी घटना की एक पुरानी वीडियो रिकॉर्डिंग ने पूरा मामला फिर से खोल दिया था।

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