अनहेल्दी लाइफस्टाइल और खराब खानपान के चलते पेट से जुड़ी समस्याएं बहुत आम हो गई है. पेट सही से साफ नहीं होने से कई बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. इससे कब्ज, गैस और पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है. ऐसे में खाने में हम किन मसालों का इस्तेमाल करते हैं. यह भी बहुत महत्व रखता है. मसाले न केवल खाने का स्वाद बढ़ाते हैं, बल्कि इनसे कई स्वास्थ्य लाभ भी मिलते हैं. कुछ जड़ी-बूटियां और मसाले आंतों की हेल्थ को बेहतर बनाने के साथ-साथ पाचन संबंधी बीमारियों के लक्षणों को कम करने में भी मदद कर सकते हैं.
पॉलीफेनॉल मिश्रण वाले मसाले
दरअसल, हेल्दी रहने के लिए हमारे खानपान का अच्छा होना बहुत जरूरी है. खाने को और ज्यादा हेल्दी उसमें डलने वाले मसाले होते हैं. कई जड़ी-बूटियों और मसालों में पॉलीफेनॉल यौगिक पाए जाते हैं, जिनमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं. आंत के बैक्टीरिया पॉलीफेनॉल को पचा सकते हैं. इससे हेल्दी बैक्टीरिया के विकास में मदद मिलती है.
अदरक
अदरक में जिंजरोल सहित कई पॉलीफेनॉल पाए जाते हैं, जिनमें एंटीऑक्सीडेंट गुण भी होते हैं. अदरक मतली और उल्टी को कम करने में भी मदद कर सकता है.
हल्दी
हल्दी में करक्यूमिन नामक एक एक्टिव यौगिक पाया जाता है. शोध से पता चलता है कि करक्यूमिन के सेवन से आंतों की सूजन यानी इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज आईबीडी से पीड़ित लोगों में सूजन कम हो सकती है. इसके अलावा करक्यूमिन से इरिटेबल बाउल डिजीज (आईबीएस) के लक्षणों में भी सुधार हो सकता है, जिनमें पेट दर्द भी शामिल है.
काली मिर्च
काली मिर्च में पाया जाने वाला यौगिक पाइपरिन, पाचन एंजाइमों को उत्तेजित करके, पोषक तत्वों के अवशोषण में सुधार करके और गैस, सूजन और कब्ज को कम करके पाचन में महत्वपूर्ण रूप से सहायता करता है.
जीरा
जीरा पाचन के लिए बहुत अच्छा होता है, क्योंकि यह पाचक एंजाइमों को बढ़ाता है. यह आंतों की कार्यप्रणाली को उत्तेजित करता है और अपच और पेट फूलने जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है. जीरे का पानी आंतों के स्वास्थ्य और पोषक तत्वों के अवशोषण में सुधार लाने में कारगर है.
दालचीनी
दालचीनी पाचन एंजाइमों को उत्तेजित करके और पेट फूलने को कम करके पाचन में सहायता करती है, जिससे यह पेट दर्द को शांत करने और पोषक तत्वों के अवशोषण में सुधार करने के लिए उपयोगी होती है.
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