साल की शादी के बाद अजय ने अपनी पत्नी सुनीता को छोड़ दिया और अपनी कम उम्र की सेक्रेटरी के साथ रहने का फैसला किया। उसकी सेक्रेटरी ने शर्त रखी कि वे उसी करोड़ों की कीमत वाले घर में रहेंगे, जहाँ अजय अपनी पत्नी के साथ इतने वर्षों से रहता आया था।
अजय ने सुनीता को घर खाली करने के लिए सिर्फ तीन दिन का समय दिया।
पहले दिन, सुनीता ने अपना सामान पैक किया।
दूसरे दिन, उसने एक मूविंग कंपनी बुला ली।
तीसरे दिन, उसने मोमबत्तियाँ जलाईं और डाइनिंग टेबल पर अकेले बैठकर शानदार डिनर किया। उसने झींगे और कैवियार खाए, धीमा संगीत चलाया और फिर…
उसने बचे हुए झींगे के टुकड़ों को कैवियार में लपेटकर घर के हर कमरे में लगे परदों की रॉड के अंदर भर दिया।
इसके बाद उसने पूरी रसोई साफ की और चुपचाप घर छोड़ दिया।
शुरुआत में सब कुछ सामान्य रहा।
लेकिन कुछ दिनों बाद पूरे घर में भयानक बदबू फैलने लगी।
उन्होंने पूरा घर साफ करवाया, कालीन धुलवाए, एयर फ्रेशनर इस्तेमाल किए, विशेषज्ञों को बुलाया और घर में फ्यूमिगेशन भी करवाया—लेकिन बदबू कम नहीं हुई।
काम करने वाले कर्मचारी, घरेलू मदद और दोस्त—कोई भी उस बदबू को सहन नहीं कर पा रहा था।
आखिरकार, उन्होंने नया घर खरीदने के लिए बैंक से बड़ा कर्ज लिया। लेकिन पुराना घर बिक ही नहीं रहा था—वह भी अपनी आधी कीमत पर भी नहीं।
यहाँ तक कि रियल एस्टेट एजेंटों ने भी कोशिश करना छोड़ दिया।
एक दिन सुनीता ने अजय को फोन करके उसका हाल पूछा।
अजय ने उसे घर की पूरी कहानी और भयानक बदबू के बारे में बताया।
सुनीता ने कहा,
“मुझे अपना पुराना घर बहुत याद आता है। अगर आप चाहें तो मैं तलाक के बदले मिलने वाली रकम छोड़ सकती हूँ, बस वह घर मुझे दे दीजिए।”
अजय तुरंत तैयार हो गया।
उसी दिन उसने कागजात पर हस्ताक्षर कर दिए।
कुछ दिनों बाद अजय और उसकी नई प्रेमिका खुशी-खुशी खड़े होकर देख रहे थे कि मूविंग कंपनी उनका सारा सामान नए घर में पहुँचा रही है…
जिसमें परदों की वही रॉड भी शामिल थीं।
सीख
कभी भी किसी महिला को कमजोर समझने की गलती मत कीजिए। उसकी ताकत कई बार उसकी खामोशी के पीछे छिपी होती है।
हर लड़ाई शोर मचाकर नहीं लड़ी जाती।
कभी-कभी एक शांत इंसान ऐसा जवाब दे देता है, जिसे सामने वाला पूरी जिंदगी नहीं भूलता।
इसलिए किसी की खामोशी को उसकी कमजोरी समझने की भूल कभी मत कीजिए।
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