राजस्थान के भरतपुर जिले के नगला गाँव में 1 अगस्त 2026 की रात करीब 11 बजे अचानक आग की लपटें उठीं। पड़ोसियों ने देखा कि गाँव के रहने वाले रमेश चौधरी (40) के घर से धुआँ निकल रहा है। लोग तुरंत मौके पर पहुँचे और आग बुझाने की कोशिश करने लगे।
रमेश चौधरी के पड़ोसी सुरेश ने बताया, "हमने जब घर का दरवाजा तोड़ा, तो अंदर का नज़ारा देखकर हमारे होश उड़ गए। रमेश का शव ज़मीन पर पड़ा था और वह बुरी तरह जल चुका था।"
रमेश की पत्नी सुनीता (35) और उनके 3 बच्चे (10, 8 और 5 साल) उस समय अपने नाना के घर गए हुए थे। आग में केवल रमेश की मौत हुई।
सुनीता ने अगली सुबह पुलिस को बताया, "मैं अपने बच्चों के साथ अपने पिता के घर गई हुई थी। मुझे नहीं पता क्या हुआ। शायद गैस सिलेंडर में रिसाव से आग लगी होगी।"
गाँव वालों ने इसे एक सामान्य हादसा माना, लेकिन पुलिस को कुछ अजीब लगा।
पुलिस को क्यों हुआ शक?
जब पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया, तो उन्हें कुछ संदिग्ध लगा। आग के निशान अजीब थे - एक स्थान पर ज़्यादा और दूसरी जगह कम। ऐसा लग रहा था जैसे आग किसी निश्चित स्थान पर लगाई गई हो और फिर फैली हो।
पड़ोसी श्याम सिंह ने पुलिस को बताया, "रमेश और उसकी पत्नी सुनीता के बीच पिछले कुछ महीनों से बहुत तनाव था। रमेश शराब पीता था और सुनीता के साथ मारपीट करता था। सुनीता अक्सर हमें बताती थी कि उसके पति से वह बहुत परेशान है।"
पुलिस को यह भी पता चला कि सुनीता ने एक दिन पहले बाज़ार से पेट्रोल खरीदा था, जबकि उनके घर में कोई गाड़ी नहीं थी।
पोस्टमार्टम ने खोला राज
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। रिपोर्ट ने जब आई तो पुलिस के होश उड़ गए।
डॉक्टरों ने साफ कहा कि रमेश की मृत्यु आग से नहीं, बल्कि गला घोंटने से हुई है। उसके गले पर गहरे नीले निशान थे। आग तो बाद में लगाई गई थी ताकि हत्या को हादसा का रूप दिया जा सके। रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि उसके पेट में नींद की गोलियाँ पाई गईं, जो उसे बेहोश करने के लिए दी गई थीं।
पुलिस को यह भी पता चला कि सुनीता ने अपने मोबाइल पर "आग कैसे लगाएं" और "नींद की गोली कितनी देर में असर करती है" सर्च किया था, जिसे उसने डिलीट कर दिया था, लेकिन साइबर टीम ने रिकवर कर लिया।
चौंकाने वाला खुलासा - भाभी ने क्यों किया कत्ल?
पुलिस ने जब सुनीता से सख्ती से पूछताछ की और सारे सबूत दिखाए, तो वह फूट-फूट कर रोने लगी और सब कुछ कबूल कर लिया।
सुनीता ने बताया, "मैं 12 साल से रमेश का आतंक सह रही थी। वह रोज़ाना शराब पीता था और मुझे पीटता था। मेरे तीन बच्चे डर के मारे काँपते थे। उसने मुझे घर से निकालने की भी धमकी दी थी। मैंने सोचा कि अगर वह मर गया, तो मैं और मेरे बच्चे इस नर्क से आज़ाद हो जाएँगे। मैंने रात को उसकी चाय में नींद की गोली मिला दी। जब वह बेहोश हुआ, तो मैंने उसका गला घोंट दिया और फिर पेट्रोल डालकर आग लगा दी ताकि कोई हत्या न समझे। मुझे पता है कि मैंने गलत किया, लेकिन मैं और मेरे बच्चे अब आज़ाद हैं।"
पड़ोसी का बयान
गाँव के लोगों ने सुनीता का साथ दिया। पड़ोसी रामकुमार ने कहा, "हम सब जानते थे कि रमेश कैसा था। वह सुनीता को बहुत पीटता था। हमने कई बार बीच-बीच में समझाने की कोशिश की, लेकिन वह किसी की नहीं सुनता था। सुनीता ने अपने बच्चों के लिए यह किया है। हम नहीं चाहते कि उसे बहुत सख्त सजा मिले।"
कानूनी कार्रवाई
भरतपुर पुलिस ने सुनीता को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 (हत्या) के तहत गिरफ्तार कर लिया है। हालाँकि, पुलिस रमेश द्वारा सुनीता को प्रताड़ित किए जाने के मामले की भी जाँच कर रही है और इस पहलू को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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